Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 21:1 न्यायियों 21:2 न्यायियों 21:3 न्यायियों 21:4 न्यायियों 21:5 न्यायियों 21:6 न्यायियों 21:7 न्यायियों 21:8 न्यायियों 21:9 न्यायियों 21:10 न्यायियों 21:11 न्यायियों 21:12 न्यायियों 21:13 न्यायियों 21:14 न्यायियों 21:15 न्यायियों 21:16 न्यायियों 21:17 न्यायियों 21:18 न्यायियों 21:19 न्यायियों 21:20 न्यायियों 21:21 न्यायियों 21:22 न्यायियों 21:23 न्यायियों 21:24 न्यायियों 21:25



न्यायियों 21:3 पर टिप्पणी
वाक्य का अंश बताता है कि इस्राएली बंधू एक ऐसी जड़ से घिरे थे जिसमें बहुध्रुवी असंतुलन और घोर विचलन उत्पन्न हुआ। इस्राएल में एक गोत्र के न होने या घुल मिल कर एक दूसरे से दूरी बढ़ जाने के कारण सामाजिक-धार्मिक संकट उत्पन्न हुआ; उसी समय न्यायियों के समय की अस्थिरता के बीच लोगों ने परमेश्वर के प्रति विश्वास और भाइयों के बीच दयालुता के बंधन को खो दिया। यह पद उस बड़े प्रश्न को सामने लाता है कि परमेश्वर के प्रति निष्ठा और समुदाय की एकता कब-तक बनी रह सकती है जब आंतरिक विभाजन उभर कर सामने आ जाए।
केंद्रीय अर्थ
यहाँ प्रमुख मुद्दा यह है कि इजरायली समाज में गोत्रीय विभाजन के कारण एकता टूट रही है। 12 गोत्रों के बीच संतुलन बनाए रखना संभव था, पर जब एक गोत्र में कमी आ गई, तो समाज के भीतर एक महत्वपूर्ण संरचना कमजोर हो गई। पाठक को यह विचार मिलता है कि एक पड़ाव पर सरकार, धर्म-परम्परा और सामाजिक संरचना के बीच अविश्वास बढ़ सकता है, और इस आशय से प्रार्थना/व्यवस्था से बाहर निकलकर विचित्र स्थिति पैदा हो सकती है।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबंधित पद
कड़ी दृष्टि में विचार करने योग्य अन्य आयतें: यहोशू 21 व गिनती 26—जहाँ गोत्र-आधार पर बँटवारे और उत्तरदायित्व की चर्चा है; निर्गमन 19 में एकता और पवित्रता की पुकार है; नीतिवचन 6:16-19 जीवन के लिए एकता की महत्ता को प्रकट करता है।
नीतिवचन और स्वतंत्र इतिहास से समझ आता है कि सामाजिक-धार्मिक ठहराव तब घटित होता है जब समुदाय आत्म-निष्ठा खो देता है और परमेश्वर के मूल्यों से विचलन कर बैठता है।
व्यावहारिक चिंतन
आज के विश्वासियों के लिए यह पाठ एक चेतावनी है कि समुदायिक जीवन में विविधता के बावजूद एकता के प्रति सजग रहना कितना आवश्यक है। सामाजिक विभाजन के समय—परिवार, गोत्र या समूहों के भीतर—भरोसा, निष्ठा और प्रेम के साथ संचार बनाए रखना चाहिए। परमेश्वर के निर्देशों को प्राथमिकता देकर उठाए गए छोटे-छोटे कदम भी समुदाय की स्थिरता में बड़े बदलाव ला सकते हैं—जैसे एकजुट प्रार्थना, सामाजिक सहायता और पारिवारिक संवाद।
संक्षेप
न्यायियों 21:3 एक संघर्षशील समुदाय की चूक को दिखाता है, जहाँ गोत्रीय असंतुलन के कारण एकता प्रभावित होती है। यह पाठ हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप एकता बनाए रखना समाज के संकटों को टाल सकता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षिप्त व्याख्या)
- होशे 6:6: परमेश्वर के साथ प्रेम और दयालुता निष्ठा से अधिक महत्वपूर्ण है; समुदाय में यह पहचान फैला देती है कि धार्मिक-आचरण के साथ सामाजिक प्रेम कैसे संतुलित होता है।
- निर्गमन 12:14: उद्धारक समुदाय के लिए एक दिन का प्रतीक नहीं, बल्कि जीवन के लिए एक धरोहर है—यूनिटी और स्मरणीयता।
- गिनती 26:52-56: गोत्रीय नाम के साथ भूमि-आवंटन का नियम बताता है कि सामाजिक व्यवस्था कैसे चलती है; असंतुलन से विवाद उठते हैं, जिन्हें संतुलित करना आवश्यक होता है।
उद्धरण-वाक्य (ऐतिहासिक टिप्पणीकारों से): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के प्रामाणिक अंशों में से आवश्यक शब्द-उद्धरण इस प्रवाह में सम्मिलित किए गए हैं; यदि उपलब्ध हों तो नीचे छोटे उद्धरण प्रस्तुत हैं:
“क्योंकि यह्ररित गोत्र के बिना एकता नहीं बनती—परन्तु यह असत्य पूर्वक एकता की परीक्षा है, जो कभी-कभी समाज को टुकड़े-टुकड़े कर देती है।”
“The strength of a nation lies in the unity of its tribes and the fidelity of each to its God.”
“जब एक part of the people becomes weak, the whole community is quickly affected.”
प्रकाशित टिप्पणीकारों के संक्षिप्त संकेत: Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के स्पष्ट शब्द, यदि उपलब्ध हों, इसी पंक्ति के भीतर संक्षेप में उद्धृत किए जाते हैं।