Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
न्यायियों 9:1 न्यायियों 9:2 न्यायियों 9:3 न्यायियों 9:4 न्यायियों 9:5 न्यायियों 9:6 न्यायियों 9:7 न्यायियों 9:8 न्यायियों 9:9 न्यायियों 9:10 न्यायियों 9:11 न्यायियों 9:12 न्यायियों 9:13 न्यायियों 9:14 न्यायियों 9:15 न्यायियों 9:16 न्यायियों 9:17 न्यायियों 9:18 न्यायियों 9:19 न्यायियों 9:20 न्यायियों 9:21 न्यायियों 9:22 न्यायियों 9:23 न्यायियों 9:24 न्यायियों 9:25 न्यायियों 9:26 न्यायियों 9:27 न्यायियों 9:28 न्यायियों 9:29 न्यायियों 9:30 न्यायियों 9:31 न्यायियों 9:32 न्यायियों 9:33 न्यायियों 9:34 न्यायियों 9:35 न्यायियों 9:36 न्यायियों 9:37 न्यायियों 9:38 न्यायियों 9:39 न्यायियों 9:40 न्यायियों 9:41 न्यायियों 9:42 न्यायियों 9:43 न्यायियों 9:44 न्यायियों 9:45 न्यायियों 9:46 न्यायियों 9:47 न्यायियों 9:48 न्यायियों 9:49 न्यायियों 9:50 न्यायियों 9:51 न्यायियों 9:52 न्यायियों 9:53 न्यायियों 9:54 न्यायियों 9:55 न्यायियों 9:56 न्यायियों 9:57



न्यायियों 9:32 —Immediate setting
इस पद में चिरपरिचित दाऊद-युग के बजाय एक छोटी-सी साम्राज्य-योजना का दृश्य सामने आता है, जहां राजा-व्यवस्था के विरुद्ध ताबड़तोड़ कदम उठाने होते हैं। पवित्र ग्रंथ हमें बताता है कि रात के अंधेरे में मैदान पर घात लगाने की योजना बनाई जाती है, ताकि अचानक ही शत्रु पर विजय पाई जा सके। इस संदर्भ में प्रसिद्धि पाती है- परिस्थिति यह है कि गिल्गाल के अधीनस्थ एक समूह अपने आधिपत्य का विरोध देखकर ऐसा कदम उठाने का विचार करते हैं, ताकि प्रतिद्वंद्वी को चकमा देकर सत्ता की सुरक्षा की जा सके।
पाठ से परमेश्वर या विश्वास के बारे में जो खुलासा होता है
यह वाक्यांश दृढ़ कर्मशीलता और चतुराई की माँग को दर्शाता है, परन्तु साथ ही यह दिखाता है कि मनुष्यों की योजना कितनी बार परमेश्वर की संरचना से जुड़ी रहती है। न्यायियों की कथा प्रेरित करती है कि बिना परमेश्वर की चिपचिपी राह के पीछे, रात के घात के द्वारा उपलब्धि विभाजन की हो सकती है; परन्तु असल ताकत परमेश्वर पर निर्भर है। ग्रंथ हमें यह स्मरण कराता है कि ईश्वर अपने लोगों के लिए सुरक्षा के मार्ग खोलता है, चाहे वह परिस्थितियाँ कितनी भी घनी या अंधेरी क्यों न हों।
महत्वपूर्ण शब्दों/छवियों की स्पष्टीकरण
संबंधित पंक्तियाँ (Cross-references)
1) स्वर्गीय सुरक्षा के बारे में स्मरण करातीं अन्य गाथाएं: परमेश्वर अपनी जनता को अंधेरी घड़ियों में भी सुरक्षा देता है। उदाहरण के तौर पर, कठिन समय में ईश्वर की सहायता की गवाही देती घटनाएं देखें।
2) योजना बनाते समय विश्वास की भूमिका: ऐसे संदर्भ जहाँ मनुष्य की चालें चालाकी की जगह दो हिस्सों में बंटती हैं, परन्तु परमेश्वर का निर्देश ही निर्णायक होता है।
3) रक्षा की अनुभूति: रात की घात के बावजूद, परमेश्वर समुदाय के लिए मार्ग निकालते हैं और उसे विजयी बनाते हैं।
संक्षेप में, यह पाठ बताता है कि घात और चालाकी के बावजूद ईश्वर की सुरक्षा और योजना का सर्वोच्च स्थान है, और वास्तविक güç उसके निर्देशों में है।
आज के संदर्भ में उपयोगी आवेदन
- परिस्थिति चाहे कितनी भी संकटपूर्ण क्यों न हो, हर रात के घात को चकमा देने की बजाय पहले परमेश्वर से विषय-वस्तु माँगना चाहिए।
- संघर्ष के समय भी शांति और नैतिकता बनाए रखें; चतुराई के पीछे नहीं, सत्य के मार्ग पर चलें।
- समुदाय के भीतर एकता बनाए रखें ताकि सुरक्षा प्रभावित न हो और परमेश्वर की योजना में भागीदारी संभव हो।
महत्त्वपूर्ण उद्धरण ( Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से)
यह भाग सीधे उद्धृत नहीं है, परन्तु ऐतिहासिक टिप्पणियों में महत्त्वपूर्ण विचार मिले हैं कि रात की گھात-versus-ईश्वर की रक्षा के बीच संतुलन कैसे बना रहता है; इन टिप्पणीकारों की धारणा यही है कि मानवीय रणनीति के साथ ईश्वर की योजना भी साथ-साथ चलती है।