Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
लूका 23:1 लूका 23:2 लूका 23:3 लूका 23:4 लूका 23:5 लूका 23:6 लूका 23:7 लूका 23:8 लूका 23:9 लूका 23:10 लूका 23:11 लूका 23:12 लूका 23:13 लूका 23:14 लूका 23:15 लूका 23:16 लूका 23:17 लूका 23:18 लूका 23:19 लूका 23:20 लूका 23:21 लूका 23:22 लूका 23:23 लूका 23:24 लूका 23:25 लूका 23:26 लूका 23:27 लूका 23:28 लूका 23:29 लूका 23:30 लूका 23:31 लूका 23:32 लूका 23:33 लूका 23:34 लूका 23:35 लूका 23:36 लूका 23:37 लूका 23:38 लूका 23:39 लूका 23:40 लूका 23:41 लूका 23:42 लूका 23:43 लूका 23:44 लूका 23:45 लूका 23:46 लूका 23:47 लूका 23:48 लूका 23:49 लूका 23:50 लूका 23:51 लूका 23:52 लूका 23:53 लूका 23:54 लूका 23:55 लूका 23:56



लूका 23:7 — immediate setting
यूहन्नी नहीं, बल्कि प्रभु यीशु का प्रश्न-पत्र बनते समय रोमन अधिकारियों के आदेश से यीशु को पिलातुस से अलग कर हरोदेस की रियासत के पास भेजा गया। यहाँ स्पष्ट है कि यरूशलेम में राजनैतिक-यात्रा और मान-सम्मान का मिश्रण था: यीशु को यहूदी प्रबलताओं के विरुद्ध नहीं, बल्कि रियासत के राजनीतिक कूटनीतिक नियमों के तहत सौंपा गया। यह घटना यह दर्शाती है कि परमेश्वर की योजना विश्व-इतिहास के बड़े कदमों में भी काम कर रही है, भले ही मानव-चाल के भीतर अलग-अलग निर्णय क्यों न लिए जाते हों।
ईश्वर या विश्वास के बारे में पाठ से जो अनुमान मिलता है
यह पाठ हमें यह संकेत देता है कि प्रभु की योजना सार्वभौमिक सत्ता के अधीन है और मानवीय निर्णयों के बीच भी उसकी परम-स्वामी सत्ता काम करती है। यीशु के बारे में यह जानकारी बताती है कि वह “समझ कर” चल रहे थे कि घड़ी कब और कैसे आगे बढ़ेगी, और वह परिस्थिति के अनुसार सही मार्ग पर जा रहे थे—यह विश्वास की एक प्रबल दृष्टि है कि परमेश्वर अपने लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए परिस्थितियों को नियंत्रित कर रहा है।
महत्वपूर्ण शब्दों और imagery की स्पष्टीकरण
अनुरूप cross-references
- मार्क 15:1-5 में यीशु को पिलातुस के सामने लाने की प्रक्रिया से तुलनात्मक संदर्भ मिलता है कि कैसे राजनीतिक सत्ता यीशु की यात्रा में एकाधिक चरण लाती है। - प्रेरितों के काम 3:18 में यह दर्शाया गया है कि परमेश्वर की पूर्व-योजना से पवित्र भविष्य की घटनाएं घटती हैं, चाहे इंसानी निर्णय भिन्न-भिन्न हो। - मत्ती 22:21 में “देव के और César के” के वास्ते पाते हैं कि पृथ्वी के राज-कायदे और ईश्वर के उद्देश्य एक साथ चलते हैं, भिन्न-भिन्न मार्ग से सही परिणाम तक पहुँचते हैं।
तुरंत-आज का अनुप्रयोग
हम जो भी स्थितियों में हों—चाहे वे राजनैतिक या सामाजिक दबाव से भरी हों—हम परमेश्वर की sovereignty को याद रखें। यीशु का रवैया हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य, विश्वास और भगवान के मार्ग के अनुसार कदम उठाने चाहिए। यह भी याद रहे कि मानव-आचरण में हुई निर्णय-भिन्नताओं के बावजूद ईश्वर की योजना मुस्कान से आगे बढ़ती है; हमारे लिए यही है कि हम प्रार्थना, तेरी इच्छा पूरी हो—यह जीवन-यात्रा अपनाएँ।
टिप्पणी-नोट (दो-तीन छोटी सन्दर्भ): यीशु की यात्रा के साथ मानव-राजनीति का सम्मिलन एक ऐसे परिदृश्य को दिखाता है जहाँ देव-योजना और पृथ्वी की राजनीति मिलकर एक महान उद्धार-कार्य की पूर्व-तैयारी में जुटे रहते हैं।