नहूम 1:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यहोवा यह कहता है, “चाहे वे सब प्रकार के सामर्थी हों*, और बहुत भी हों, तो भी पूरी रीति से काटे जाएँगे और शून्य हो जाएँगे। मैंने तुझे दुःख दिया है, परन्तु फिर न दूँगा।

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नहूम 1:12 पद-दर-पद बाइबल टीका

नहूम 1:12, HINIRV संदर्भ में टिप्पणी

यह वह संदेश है जो यहोवा नहूम के द्वारा नबियों के समूह पर नहीं, बल्कि अस्थिरता और दुष्ट राज्य के विरुद्ध एक निर्धारित न्याय की घोषणा के रूप में देता है। पाठ यह स्पष्ट करता है कि परमेश्वर अपने योजनाबद्ध निर्णयों से पीछे नहीं हटते—चाहे बलशाली हों या कितने भी बड़े, उनके इच्छित फल काटे जाएँगे और खत्म हो जाएँगे। द्वैत में यह बात है कि परमेश्वर ने यहोवा-सभा के भीतर भी दुष्ट व्यवस्था के विरुद्ध कठोर उपाय स्वीकार कर लिए हैं, क्योंकि ईश्वर के न्याय के अंतर्गत लोग और साम्राज्य दोनों निर्गमित होकर समाप्त हो जाते हैं।

केंद्रीय अर्थ

कहावत के अनुसार, सामर्थ्य और संख्या भले कितनी भी क्यों न हो, परमेश्वर की योजना के विरुद्ध नहीं चल सकतीं; जब वह कहता है कि कुछ “कटे जाएँगे और शून्य होंगे,” तो इसका आशय यह है कि दुष्टों का शासन नष्ट हो जाएगा और वैध न्याय का पुनर्स्थापन होता है। यहदृष्टि यह भी बताती है कि परमेश्वर की करुणा और न्याय एक साथ रहते हैं—नहीं कि वह दु:ख देता है और फिर नहीं देता, बल्कि दुःख देकर भी वह उद्धार और पुनर्स्थापन की योजना बनाते हैं।

मुख्य थीम

  • सामर्थ्य के बावजूद पराक्राम का निष्कासन: बड़े बल के प्रतिरोध में भी परमेश्वर के निर्णय निर्णायक रहते हैं।
  • न्याय की पुख्ताता: यहोवा सत्ता में रहते हुए पाप की रीति को समाप्त कर डालते हैं।
  • कृपा के साथ न्याय: दुःख देने के कारण परमेश्वर उद्धार के अवसर भी खुलते हैं।

अन्य सन्दर्भों के साथ सम्बद्धता

- यहोशू 10:25 जैसे पाठ बताते हैं कि परमेश्वर शक्तिशाली राजा और सेनाओं से भी आगे हैं; उनके फैसले विश्व के इतिहास को दिशा देते हैं।

- भविष्यवाणी के दायरे में यह संदेश नहूम के समय के साथ-साथ अगले दिनों के न्याय की झलक देता है, जिसमें लोको को दुष्ट शासन से छुटकारा मिलने वाला है।

- नहूम 2–3 अध्याय में भी उसी न्याय की बारम्बारता आती है; परमेश्वर के तिलकित न्याय के सामने प्रतिवाद असत्‍व हो जाता है।

व्यावहारिक अनुस्मारक

जो लोग ईश्वर पर भरोसा करते हैं उन्हें यह स्मरण रखना चाहिए कि जीवन में बड़े-से-बड़े संकट भी परमेश्वर की देखरेख में हैं। अस्थिर शक्ति का अहंकार क्यों न हो, उसकी तुलना में ईश्वर के क्रोध और दयालुता के संतुलन को याद रखना चाहिए। विश्वासियों के लिए यह सीख है कि कठिन समय में भी प्रभु के नियमों के अनुसार चलना, अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना और परमेश्वर की ओर आश्रय लेना चाहिए।

छोटे cross-reference और संक्षिप्त व्याख्या

- यिर्मयाह 46:28: ईश्वर के उद्धार में भरोसा रखने का आह्वान; शक्तिशाली शासन भी अंततः उनकी योजना के अधीन है।

- इसायाह 46:10: परमेश्वर की योजनाओं की स्थिरता और उनके समय का निर्धारण।

- दानिएल 4:35: अधिकार और निर्णय परमेश्वर के हाथ में, पृथ्वी-स्तर पर भी।

इन संदर्भों के माध्यम से पाठ में निष्कर्ष निकलता है कि परमेश्वर का न्याय और सत्ता एक सुरक्षित कड़ी है जिसे ईमानदारी से स्वीकारना चाहिए।

संक्षिप्त निष्कर्ष

1:12 का यह पंक्ति यह बताती है कि चाहे संसार में कितनी भी शक्ति क्यों न हो, परमेश्वर के न्याय के बाहर नहीं रह सकता—सामर्थ्यपूर्ण सत्ता अंततः उनकी पवित्र नीति के अनुसार कट-जाने और शून्य हो जाने तक नहीं रुकती। साथ ही यह स्मरण कराती है कि दुःख के समय भी ईश्वर अपना उद्धार का रास्ता खोलते हैं, ताकि विश्वासियों को नयी आशा मिले।

महत्वपूर्ण उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से संक्षेप उल्लेख):

कहावत में स्पष्टता के लिए उपयोगी पार्श्व-उद्धरण उपलब्ध नहीं; पर इन पुरालेखों के सामान्य विचार इस प्रकार हैं कि परमेश्वर का न्याय सार्वभौम है और शक्ति के सामने भी उनके निर्णय की पुष्टि होती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

नहूम 1:12 समानांतर पद और संबंधित वचन

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