नहूम 1:2 बाइबल पद की व्याख्या
नहूम 1:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
यहोवा जलन रखनेवाला और बदला लेनेवाला परमेश्वर है; यहोवा बदला लेनेवाला और जलजलाहट करनेवाला है; यहोवा अपने द्रोहियों से बदला लेता है, और अपने शत्रुओं का पाप नहीं भूलता।
नहूम 1:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
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नहूम 1:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
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जकर्याह 8:2 (HINIRV) »
“सेनाओं का यहोवा यह कहता है: सिय्योन के लिये मुझे बड़ी जलन हुई वरन् बहुत ही जलजलाहट मुझ में उत्पन्न हुई है।

निर्गमन 20:5 (HINIRV) »
तू उनको दण्डवत् न करना, और न उनकी उपासना करना; क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा जलन रखने वाला परमेश्वर हूँ, और जो मुझसे बैर रखते हैं, उनके बेटों, पोतों, और परपोतों को भी पितरों का दण्ड दिया करता हूँ,

निर्गमन 34:14 (HINIRV) »
क्योंकि तुम्हें किसी दूसरे को परमेश्वर करके दण्डवत् करने की आज्ञा नहीं, क्योंकि यहोवा जिसका नाम जलनशील है, वह जल उठनेवाला परमेश्वर है,
मुख्य भाव: परमेश्वर की न्यायपूर्ण जलन और बदला लेने की निश्चितता
साहित्यिक संदर्भ
नहूम का संदेश ऐशूर की प्रबलता और उसकी अत्याचारों के विरुद्ध धर्मनिष्ठ लोगों को आश्वासन है। नहूम 1:2 में यहोवा की "जलन" और "बदला" लेने की वाणी न केवल व्यक्तिगत घृणा नहीं दर्शाती, बल्कि उत्पीड़ितों के लिए स्थायी न्याय की घोषणा है। यह वचन नहूम की पुरानी और निर्णायक पुकार का भाग है जो ऐशूर और विशेषकर निनेवे की अत्याचारपूर्ण नीति के प्रति परमेश्वर की प्रतिक्रिया बताता है।
धार्मिक तथा दैवीय अर्थ
यहाँ "जलन" का अर्थ ईश्वर की धार्मिक और न्याय के प्रति तीव्र आग्रह है—वह अपने लोगों की पवित्रता के रक्षक हैं और अन्याय सहन नहीं करते। "बदला लेना" का आशय प्रतिशोधात्मक क्रोध से अधिक न्याय की बहाली है; वह उन दुष्टाचारों को नहीं भूलता और इतिहास में रेखांकित पाप के लिए उत्तरदायी ठहराता है। इस वचन से समझ में आता है कि दया के साथ-साथ परमेश्वर का न्याय भी सतत है—वह अपने वचन और प्रतिज्ञा के अनुसार कार्य करता है।
पवित्रशास्त्र के साथ सम्बन्ध
विचारार्थ प्रश्न
1) जब परमेश्वर दया और न्याय दोनों है, तो हम व्यक्तिगत असमर्थता और क्षमा के बीच कैसे संतुलन रखें?
2) क्या "बदला लेना" का व्यावहारिक अर्थ समाज में न्याय की बहाली के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष परिधियों में क्या हो सकता है?
3) पीड़ित व्यक्ति के लिए परमेश्वर के न्याय पर भरोसा कैसे सांत्वना और सक्रिय सामाजिक धर्मनिर्णय दोनों प्रदान कर सकता है?
साक्ष्य और प्रमाणित उद्धरण
मैथ्यू हेनरी ने लिखा है कि परमेश्वर का "न्याय उदासीन नहीं रहता"; इस बात का भाव नहूम 1:2 में स्पष्ट है। (अर्थात्: "God is not negligent in His justice"—यहाँ अंग्रेजी में संक्षिप्त उद्धरण की अनुमति के संदर्भ में संकेत मात्र)। अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के विचार भी इस धारणा का समर्थन करते हैं कि परमेश्वर के क्रोध का लक्ष्य दुष्टता का समाप्ति और केवल दया का प्रचार है।
निष्कर्ष—एकीकृत सार
नहूम 1:2 हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर के दो पहलू—दया और न्याय—साथ चलते हैं। वह अपने अनुचित अत्याचारों के लिए जवाबदेह ठहराता है, परन्तु उसका क्रोध विध्वंस के लिए नहीं, बल्कि पाप की समाप्ति और लोगों की मुक्ति के लिए है। इस वचन से आश्वासन मिलता है कि दीन-दुखियों का मुद्दा अनदेखा नहीं रहेगा और न्याय की पूर्ति परमेश्वर की स्वाभाविक प्राथमिकता है। धार्मिक जीवन में यह हमें दया, धैर्य और परमेश्वर पर निर्भर विश्वास के बीच संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता है।