नहूम 1:5 बाइबल पद की व्याख्या
नहूम 1:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उसके स्पर्श से पहाड़ काँप उठते हैं और पहाड़ियाँ गल जाती हैं; उसके प्रताप से पृथ्वी वरन् सारा संसार अपने सब रहनेवालों समेत थरथरा उठता है।
नहूम 1:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
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नहूम 1:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
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मीका 1:4 (HINIRV) »
पहाड़ उसके नीचे गल जाएँगे, और तराई ऐसे फटेंगी, जैसे मोम आग की आँच से, और पानी जो घाट से नीचे बहता है।

यिर्मयाह 4:24 (HINIRV) »
मैंने पहाड़ों को देखा, वे हिल रहे थे, और सब पहाड़ियों को कि वे डोल रही थीं।

2 शमूएल 22:8 (HINIRV) »
“तब पृथ्वी हिल गई और डोल उठी; और आकाश की नींवें काँपकर बहुत ही हिल गईं, क्योंकि वह अति क्रोधित हुआ था।
नहूम 1:5 पर टिप्पणी (HINIRV)
नहूम के पहले अध्याय में परमेश्वर की क्रोध, न्याय और पवित्रता की प्रकृति पर जोर दिया गया है। इस कविता-परिदृश्य में लिखा गया है कि उसका प्रताप ही पृथ्वी और पहाड़ों की प्रकृति को व्यवस्थित कर देता है। यहाँ verse बताता है कि प्रभु के स्पर्श से पहाड़ काँप उठते हैं और संसार के रहने वालों के साथ सब कुछ थरथरा उठता है—यह चौंकाने वाला उद्घोष परमेश्वर की सजग सत्ता को दर्शाता है।
केंद्रीय अर्थ
यह वाक्य दिखाता है कि परमेश्वर की उपस्थिति और क्रोध किस प्रकार प्रकृति को समाहित कर देता है। पहाड़ों का काँपना और भूमि का पिघलना—ये चित्र दर्शाते हैं कि परमेश्वर कभी-भी निष्क्रिय नहीं है; उसका प्रभाव सम्पूर्ण सृजन पर प्रभाव डालता है। यह संदेश है कि प्रभु के न्याय के दिन संसार के अस्थिर तंत्र भी टिके नहीं रहते।
मुख्य विषय
अन्य प्रमुख विचार (2-3 cross-references)
यशयाह 2:11-12 — यह दिखाता है कि प्रभु की महिमा हर ऊँचे और शक्तिशाली के सामने कम हो जाती है; वह न्याय के दिन सब कुछ हिलाकर रख देता है।
भजन संहिता 97:4 — परमेश्वर की ज्योति-आँखें और क्रोध भौतिक तत्वों के लिए भी प्रभावी हैं; उसकी आवाज से पृथ्वी थरथराने लगती है।
सभोपदेशक 3:14 — जो कुछ भी परमेश्वर करता है उसे स्थिर माना जाना चाहिए, क्योंकि वह न्यायसंगत और स्थिर है।
व्याख्यों के अनुसार यह संकेत है कि परमेश्वर की प्रभुता केवल संकेतों में नहीं, बल्कि हर वस्तु-स्थान पर स्पष्ट है; दुष्टों के लिए न्याय और विश्वासियों के लिए सुरक्षा का स्रोत वही है।
व्यावहारिक विचार
प्रति-दिन के जीवन में यह विचार हमें प्रेरित करता है कि हम निश्चय करें: प्रभु के सामने विनम्र रहें, अस्थिरता के समय में भी भरोसा रखें और अपनी सूझ-बूझ के साथ न्यायपूर्ण जीवन जीयें। कठिन समय में भी परमेश्वर की सत्ता की याद दिलाती है कि हमारा ठौर केवल वही है, और वह अपने बच्चों को सच्चे दिल से संतोष देता है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
नहूम 1:5 में हर वस्तु पर प्रभु की अद्भुत सत्ता स्पष्ट रूप से दिखती है—पहाड़ काँपते हैं, पृथ्वी और संसार थरथराते हैं। यह हमें चेतावनी देता है कि परमेश्वर के न्याय से भागना संभव नहीं, परन्तु उसकी सुरक्षा और उद्धार पर भरोसा करना सदा संभव है।
उद्धरण और संयुक्त विचार
यदि आप पुराने चर्च-पैटर्न से प्रेरित गहराई पाना चाहते हों, तो मैथ्यू हेनरी, अलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सारगर्भित टिप्पणियाँ संक्षेप में ऐसे सार प्रस्तुत करती हैं: वे कहते हैं कि परमेश्वर की शक्ति और क्रोध प्रकृति तक फैलते हैं और उनके दर्शन से मनुष्य का ज्ञान और आचरण प्रभावित होता है; परन्तु उनका उद्धारक प्रेम भी प्रकाशित रहता है। इनके विचार नीचे से मिलते-जुलते हैं:
“करुणा और दया के साथ, वह न्याय के दिन भी पापी को अवसर देता है कि वह उससे पलट जाए।” — यही सारांश इन टिप्पणीकारों के भीतर एक साथ मिलता है।