Old Testament
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पाठ का संक्षिप्त परिचय
2 शमूएल 22 के इस पवित्र पाठ में दाऊद की प्रार्थना-गीत की भाषा है जिसमें परमेश्वर के तेजस्वी क्रोध और सामर्थ्य का वर्णन है। यहाँ भू-आकाश दोनों एक साथ काँपते हैं, क्योंकि परमेश्वर के प्रतिकार की तीव्रता और न्याय का उत्तेजक चिह्न उभर कर सामने आता है। यह चिह्न न केवल दाऊद के अनुभव को दर्शाता है, बल्कि यह यह भी दिखाता है कि परमेश्वर अपने दुष्टों के विरुद्ध निर्विघ्न न्याय से चुप नहीं रहता।
पद का पाठ-संदर्भ
“तब पृथ्वी हिल गई और डोल उठी; और आकाश की नींवें काँपकर बहुत ही हिल गईं, क्योंकि वह अति क्रोधित हुआ था।” (2 शमूएल 22:8, HINIRV)
वचन का अध्यात्मिक पाठ
यह वचन परमेश्वर के क्रोध के गहन स्वर को उद्घाटित करता है—ऐसा क्रोध जो अत्यंत न्यायपूर्ण है और जिसकी परिणति शास्त्र-नीति के अनुसार पाप पर परिणामस्वरूप होती है। पृथ्वी और आकाश की हलचल एक प्रकार का दृश्य-आह्वान है—मानव प्रजा और सृष्टि के लिए एक चेतावनी कि परमेश्वर के सामने पाप अविश्वसनीय रूप से गंभीर है। יחד, यह पंक्ति भरोसा देती है कि परमेश्वर नित्य न्याय-full हैं; वह अत्यंत क्रोधित होते हैं पर वह दया और उद्धार की राह भी खोलते हैं जब मनुष्य टूटकर प्रतिपालक बनकर लौटता है।
मुख्य पाठ से सीख
- परमेश्वर के क्रोध का उद्देश्य पाप का कठोर परिणाम दिखाना है, ताकि लोगों में भय और प्रतिफलन के साथ पथ में परिवर्तन हो।
- सृष्टि भी परमेश्वर के क्रोध के साथ भागीदारी करती है, जो उसकी सर्वोच्च सत्ता और न्याय के संकेत हैं।
अन्य ग्रन्थों से तुलनात्मक दृष्टि
इन संदर्भों के माध्यम से जानना जरूरी है कि परमेश्वर का क्रोध और न्याय पृथ्वी के हर कोने तक फैला हुआ है, परन्तु वही न्याय एक मार्ग खोलता है ताकि निष्ठावान लोग उसकी कृपा और उद्धार को अनुभव कर सकें।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
संवेदी cross-references (संक्षेप में)
- निर्गमन 19:18-19: परमेश्वर के प्रकट होने से उत्पन्न भय का उल्लेख; यह पाठ भी holiness और नीतिपरक कठोरता को उजागर करता है।
- यशाय 6:5: पाप के सामने आत्म-संहारिणी स्थिति और पवित्रता के मानक का अनुभव; सुधार की आवश्यकता का संकेत।
- हबक्कूक 3:6: परमेश्वर की सत्ता और न्याय की स्थिरता का स्मरण, जो संकट में भी भरोसा देता है।
सार-सारांश
2 शमूएल 22:8 में दिखती है परमेश्वर की क्रोध-युक्त, पर अहित-प्रतीत नहीं, बल्कि प्रेरक महिमा—ऐसी महिमा जो सत्य, न्याय और उद्धार की राह खोलती है। दाऊद के गीत का यह भाग हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर का क्रोध पाप पर कठोर है, परन्तु वह पापी को लौटने और उसकी कृपा पाने का मार्ग भी देता है।
उद्धरण और स्रोत संदर्भ
इस commentary में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायम स्रोतों से प्राप्त विचारों का समन्वय किया गया है। नीचे केवल वही मुक्त उद्धरण शामिल हैं जो स्पष्ट रूप से उल्लेखित हैं:
“तब पृथ्वी हिल गई और डोल उठी; और आकाश की नींवें काँपकर बहुत ही हिल गईं, क्योंकि वह अति क्रोधित हुआ था।” (2 शमूएल 22:8, HINIRV) — पाठ के शब्दों के लिए।