Old Testament
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2 शमूएल 22:1 2 शमूएल 22:2 2 शमूएल 22:3 2 शमूएल 22:4 2 शमूएल 22:5 2 शमूएल 22:6 2 शमूएल 22:7 2 शमूएल 22:8 2 शमूएल 22:9 2 शमूएल 22:10 2 शमूएल 22:11 2 शमूएल 22:12 2 शमूएल 22:13 2 शमूएल 22:14 2 शमूएल 22:15 2 शमूएल 22:16 2 शमूएल 22:17 2 शमूएल 22:18 2 शमूएल 22:19 2 शमूएल 22:20 2 शमूएल 22:21 2 शमूएल 22:22 2 शमूएल 22:23 2 शमूएल 22:24 2 शमूएल 22:25 2 शमूएल 22:26 2 शमूएल 22:27 2 शमूएल 22:28 2 शमूएल 22:29 2 शमूएल 22:30 2 शमूएल 22:31 2 शमूएल 22:32 2 शमूएल 22:33 2 शमूएल 22:34 2 शमूएल 22:35 2 शमूएल 22:36 2 शमूएल 22:37 2 शमूएल 22:38 2 शमूएल 22:39 2 शमूएल 22:40 2 शमूएल 22:41 2 शमूएल 22:42 2 शमूएल 22:43 2 शमूएल 22:44 2 शमूएल 22:45 2 शमूएल 22:46 2 शमूएल 22:47 2 शमूएल 22:48 2 शमूएल 22:49 2 शमूएल 22:50 2 शमूएल 22:51



2 शमूएल 22:43 (HINIRV) — संदर्भ और अर्थ
पद का संदर्भ दाऊद के गीतात्मक भजन के रूप में समर्पित है, जहाँ वह परमेश्वर की कृपा, सुरक्षा और दया से चमत्कृत होकर उसकी विजय का प्रदर्शन करता है। यह पंक्तियाँ एक युद्ध-पर्यवेक्षण के बाद दाऊद के अनुभव को व्यक्त करती हैं: परमेश्वर ने उनके शत्रुओं को हराकर दफन और पराजित किया, ताकि הארץ तथा युवाओं तक भी उसकी महिमा पहुंचे। यहाँ का तात्पर्य यह है कि परमेश्वर की न्यायप्रिय शासन में शत्रुता के हर निशान मिट जाते हैं और सत्यान्वेषी सत्ता अंततः उसकी शांति के मार्ग पर गिर पड़ती है।
मुख्य विचार
इस वचन में दाऊद कहता है कि शत्रुओं को इतने कठोर परिश्रम से चूर-चूर कर दिया गया कि वे भूमि की धूल के समान हो गए, जैसे कि वे कभी रहे ही नहीं। यह असत्य पर विजय, जोर-जुल्म पर विजय और परमेश्वर के शासन की उत्कटता का प्रतीक है। यह बताता है कि परमेश्वर के न्याय में ऐसे समय आते हैं जब दुष्टों की शक्ति क्षीण हो जाती है और धर्मियों को शांति मिलती है।
प्रमुख विषय
संबन्धित पदों के विचार
1) भजन 18 में दाऊद के समान गीत हैं, जहाँ वह परमेश्वर के उद्धार को सार्वजनिक करता है और शत्रुओं के संहार का उल्लेख करता है। 2) भजन 97:9-11 परमेश्वर के समस्त निंदा-निंदक को हराने की पुष्टि देता है और धर्मी को खुशी देता है। 3) दाऊद के अन्य गीतों में भी परमेश्वर के शासन की सुरक्षा और न्याय स्पष्ट होते हैं, जैसे कि 2 शमूएल 22 के समान स्वीकृति के गीत।
व्यावहारिक विचार
हम देख सकते हैं कि जब हम विश्वास की राह पर चलते हैं और परमेश्वर की पराक्रम पर भरोसा करते हैं, तब हमारे अनुभवों में सुरक्षा की गारंटी मिलती है। हमारी प्रेरणा यह होनी चाहिए कि हम अपने जीवन में भी परमेश्वर की न्याय-प्रतिष्ठा के लिए खड़े हों—क्योंकि वह असत्य और दुष्टता को अंततः रोक देता है और उन पर जो उसमें भरोसा रखते हैं उनकी रक्षा करता है।
छोटा समापन
यह शास्त्र हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर की व्यवस्था में प्रत्यक्ष विजय समय के साथ आती है। शत्रु परास्त होते हैं ताकि परमेश्वर की महिमा प्रकट हो और उसकी संबंधी प्रजा सुरक्षित रहे।
क्रॉस-रेफरेंस और नोट
संबंधित संदर्भ: भजनों में उद्धार का गीत (भजन 18), परमेश्वर के न्याय की घोषणा (भज 97); दाऊद के गीतों में परमेश्वर की सत्ता का अभिवर्तन।
नोट: नीचे उद्धृत प्रसिद्ध टिप्पणियाँ में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के एक-एक छोटे-से उद्धरण आवश्यकतानुसार समाहित हैं।
Matthew Henry से संक्षेप टिप्पणी: यह वचन परमेश्वर की δύναμη और न्याय की पुष्टि है; उनके द्वारा ही शत्रु निरस्त होते हैं।
Albert Barnes से संक्षेप टिप्पणी: शत्रुओं के पराजय से यह संकेत मिलता है कि परमेश्वर के राज्य का विस्तार कमजोर नहीं होता; वह अपने लोगों की सुरक्षा करता है।
Adam Clarke से संक्षेप टिप्पणी: यह परिणाम दुष्टता के शोषण पर रोक है, क्योंकि परमेश्वर की योजनाएँ स्थिर और पवित्र हैं।