2 शमूएल 22:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

अपने संकट में* मैंने यहोवा को पुकारा; और अपने परमेश्‍वर के सम्मुख चिल्लाया। उसने मेरी बात को अपने मन्दिर में से सुन लिया, और मेरी दुहाई उसके कानों में पहुँची।

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2 शमूएल 22:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

2 शमूएल 22:7 – संदर्भ में व्याख्या

यह कविता 2 शमूएल 22 में डेविड के दिव्य उद्धारगाथा का हिस्सा है, जिसमें उसने अपने संकट की घड़ी में परमेश्वर को पुकारकर सहायता माँगी और प्रभु ने ध्यान देकर उसकी दुहाई को सुना। यह हालात बताता है कि राह मुश्किल हो या प्रलय जैसा अनुभव हो, परमेश्वर की उपस्थिति और उसकी कानों में सूना जाना प्रेरणा बनती है। डेविड का परमेश्वर के प्रति भरोसा खासतौर पर संकट के समय उजागर होता है, जब वह कहता है कि ईश्वर ने उसकी पुकार सुनी।

मुख्य अर्थ

इस वाक्य में विशिष्ट बात यह है कि संकट के बीच भी दयालु परमेश्वर ध्यान देता है और उसकी दीन दशा सुनकर सहायता भेजता है। दाविद यह नहीं बताता कि वह निश्चयात्मक रूप से बच गया या नहीं, पर वह यह मानता है कि परमेश्वर ने उसकी बात सुनी और उसका उत्तर मिला—मंदिर से उसकी दुआ सुनाई गयी। यह विश्वास का कथन है कि प्रভु निष्ठुर नहीं, बल्कि अपने लोगों के दुख के समय उन तक पहुँचता है।

तीन प्रमुख विषय

  • प्रभु की उपस्थिति और सुनवाई: संकट के बीच ईश्वर के कान सक्रिय रहते हैं, उसकी वचनबद्धता दिखती है कि वह दीनोद्वेग की सुनवाई करता है।
  • दुआ और अपेक्षा: मेरे संकट में मैंने पुकारा; भले परिणाम अभी प्रत्यक्ष न हो, पर दुआ की पहुँच विश्वास में स्थिरता बनाती है।
  • मंदिर की प्रतीकात्मकता: परमेश्वर के मंदिर से उत्तर मिलना एक दृढ़ आश्वासन है कि उसकी महिमा और नीति सभी परिस्थितियों पर प्रभुत्व रखती है।

अनुसंधान-गत संदर्भ

– संदर्भ 1: भजन 34:18 से यह विचार मिलता है कि जो मन का दुखी है वह परमेश्वर के निकट आते ही बहुत निकटा पाता है; दर्द से निकट होना और सहायता मिलना संभव है।

– संदर्भ 2: भजन 3:4 में भी कहा गया है कि दुर्गम समय में दास भगवान को पुकारते ही वह उनकी सहायता करता है।

– संदर्भ 3: यशायाह 65:24 बतलाता है कि प्रार्थना करते समय ही उत्तर पल्लवित होता है; ईश्वर अपने रास्ते बनाने में तत्पर रहते हैं।

व्यावहारिक विचार

- संकट में रहने वाले पाठक यह सीख लें कि प्रार्थना केवल मुश्किल के अंत की मांग नहीं, बल्कि भरोसे की भाषा है जिसे परमेश्वर सुनते हैं।

- कठिन समय में भी सरल, मन से प्रवाहित की गयी प्रार्थना ईश्वर के साथ संबंध को मजबूत बनाती है और आवश्यकता के समय सहायता के मार्ग खोलती है।

क्रॉस-रेफरेंस और उनका संक्षेप

1) भजन 34:18: दुखी मन के पास परमेश्वर करीब रहते हैं; यह वाक्य बताता है कि ईश्वर दीन-हीनों की सहायता के लिए निकट आता है।

2) भजन 3:4: संकट के समय प्रार्थना से मुक्ति मिलती है; प्रार्थना में विश्वास गहराता है कि प्रत्यक्ष उत्तर संभव है।

3) यशायाह 65:24: प्रभु के कार्य पहले से निर्धारित रहते हैं और उसकी कृपा से उत्तर देते हैं।

संक्षिप्त निष्कर्ष

2 शमूएल 22:7 स्मरण दिलाता है कि संकट के बीच भी परमेश्वर का कान खुले रहते हैं और उसकी कृपा से उद्धार संभव है। दुआ की पहुँच मंदिर से सुनाई पड़ती है और यह विश्वास देता है कि ईश्वर अपने बच्चों की पुकार को अनसुना नहीं करते।

अनुमनित उद्धरण जिनमें Matthew Henry, Albert Barnes, या Adam Clarke से प्रत्यक्ष शब्दावली मिलती है (यदि उपलब्ध):

- “मेरे संकट में मैंने यहोवा को पुकारा; और उसकी ध्वनि मेरे कानों में पहुँची” (उद्धरण सार के लिए समाहित शब्दावली; पूर्ण वाक्य के छोटे अंश ऊपर के Commentary में संबद्ध हैं)।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 शमूएल 22:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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अपने संकट में मैंने यहोवा परमेश्‍वर को पुकारा; मैंने अपने परमेश्‍वर की दुहाई दी। और उसने अपने मन्दिर* में से मेरी वाणी सुनी। और मेरी दुहाई उसके पास पहुँचकर उसके कानों में पड़ी।

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यात्रा का गीत संकट के समय मैंने यहोवा को पुकारा, और उसने मेरी सुन ली।

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