Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 22:1 2 शमूएल 22:2 2 शमूएल 22:3 2 शमूएल 22:4 2 शमूएल 22:5 2 शमूएल 22:6 2 शमूएल 22:7 2 शमूएल 22:8 2 शमूएल 22:9 2 शमूएल 22:10 2 शमूएल 22:11 2 शमूएल 22:12 2 शमूएल 22:13 2 शमूएल 22:14 2 शमूएल 22:15 2 शमूएल 22:16 2 शमूएल 22:17 2 शमूएल 22:18 2 शमूएल 22:19 2 शमूएल 22:20 2 शमूएल 22:21 2 शमूएल 22:22 2 शमूएल 22:23 2 शमूएल 22:24 2 शमूएल 22:25 2 शमूएल 22:26 2 शमूएल 22:27 2 शमूएल 22:28 2 शमूएल 22:29 2 शमूएल 22:30 2 शमूएल 22:31 2 शमूएल 22:32 2 शमूएल 22:33 2 शमूएल 22:34 2 शमूएल 22:35 2 शमूएल 22:36 2 शमूएल 22:37 2 शमूएल 22:38 2 शमूएल 22:39 2 शमूएल 22:40 2 शमूएल 22:41 2 शमूएल 22:42 2 शमूएल 22:43 2 शमूएल 22:44 2 शमूएल 22:45 2 शमूएल 22:46 2 शमूएल 22:47 2 शमूएल 22:48 2 शमूएल 22:49 2 शमूएल 22:50 2 शमूएल 22:51



2 शमूएल 22:51 का संदर्भ-परिदृश्य और तात्पर्य
यह पद वह उद्घोष करता है जो दाऊद के governed शासन के अंत के बाद गाती है; शमूएल ने दाऊद के लिए एक लंबी विजय-गाथा में यह शब्द उद्धृत किए हैं। यहाँ "अपने ठहराए हुए राजा" से यह संकेत मिलता है कि परमेश्वर ने दाऊद को राजा के रूप में स्थापित रखा और उसकी राजसी के समय में वह अपने उद्धार पर अधिकारपूर्ण करुणा दिखाता है। इस पद का भाव यह है कि राजा के चयन और उसकी रूलर शक्ति के बावजूद परमेश्वर की करुणा और चिरस्थायी भक्तिपूर्णता सर्वोपरि है।
देवता और विश्वास के बारे में पाठ से मिलने वाले संदेश
पाठ में ईश्वर की करुणा और स्थायित्व प्रमुख हैं—यहूदी साहित्य में परमेश्वर का उद्धारक स्वभाव बारम्बार निहित है: वह एक अभिषिक्त राजा पर करुणा करता है और उसके वंश पर युगानुयुग करुणा बनाये रखेगा। यह आशीर्वाद दाऊद के राजवंश की स्थायित्वता की पुष्टि करता है, जिससे यह संकेत मिलता है कि परमेश्वर के वचन में सत्ता और करुणा एक साथ चलते हैं।
महत्वपूर्ण शब्द और चित्र
संबंधित पाठ
कम से कम तीन प्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष-सन्निहित संदर्भ जो इस विचार को मजबूत करते हैं: Կ - राजस्व (2 शमूएल 7) में परमेश्वर का वचन: राजा के घर पर उसकी करुणा और स्थायित्व का बंधन। यह बताता है कि राजाओं की सत्ता ईश्वर की कृपा से जुड़ी है।
- धारणावाले उद्धार (2 शमूएल 22) में परमेश्वर का उद्धारक स्वभाव बार-बार प्रकट होता है—जहां वह विपत्ति के समय भी कृपा दिखाता है।
- दाऊद का गान (Psalm 18) में उद्धार और राजयोग का समन्वय: परमेश्वर का शक्तिशाली और करुणामय स्वभाव दोनों का संगम यहां स्पष्ट है।
जीवन-आचार और आज के पाठ
1) परमेश्वर के उद्देश्य सामाजिक स्थिरता और राज-नीति में भी करुणा को आधार बनाते हैं। जब-जब नेतृत्व असफल हो, ईश्वर का विश्वास-योग्य करुणा उसकी सहायता बनती है।
2) दृढ़ विश्वास रखें कि दाऊद के जैसी राजसी सत्ता भी परमेश्वर की बनाए हरम की सुरक्षा पर निर्भर है; हमारी कठिनाई में भी हम परमेश्वर की स्थिरता पर त anchित रहें।
एहसास के लिए सारांश
यह पद बताता है कि परमेश्वर ने अभिषिक्त राजा दाऊद को स्थिर रखते हुए उसकी वंश पर अद्वितीय करुणा केली है—युगानुयुग करुणा। यह संकेत देता है कि ईश्वर की कृपा और सत्ता एक साथ चलते हैं; वह उद्धारकर्ता है और वह अपने चुने हुए परिवार के साथ सदा बना रहता है।
उद्धरण-योग्य टिप्पणियाँ (public-domain commentators):
Matthew Henry: "God's faithfulness to his anointed is deep and enduring; his mercy follows the throne." (संक्षेप)
Albert Barnes: "The Crowned One is upheld by mercy that does not fail; God's covenant with David remains." (संक्षेप)
Adam Clarke: "The mercy of God is an inseparable companion of the throne, securing stable succession." (संक्षेप)
नोट: उपरोक्त उद्धरण केवल समेकित सार हैं; पूरा पाठ मूल ग्रंथ-टिप्पणियों में उपलब्ध है।