ओबद्याह 1:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यहोवा की यह वाणी है, क्या मैं उस समय एदोम में से बुद्धिमानों को, और एसाव के पहाड़ में से चतुराई को नाश न करूँगा? (यह. 29:14, अय्यू. 5: 12,13)

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ओबद्याह 1:8 पद-दर-पद बाइबल टीका

ओबद्याह 1:8 — वाणी का उद्घोष: बुद्धिमानों का नाश और चतुराई की परीक्षा

ओबद्याह के शास्त्र का यह कठोर वाक्य यहूदियों के विरुद्ध बायत-आगाजों के समय इदम पर प्रभाव डालता है। यहाँ यहोवा यह स्पष्ट करता है कि इदोम के भीतर की बुद्धिमानी और एसाव के पहाड़ की चतुराई एक दिन परमेश्वर के निर्णय के सामने अस्थिर ठहरेंगी; न कभी यह शेष रहती है, न उनकी रणनीतियाँ सुरक्षित रहती हैं। यह दैवी न्याय का उद्घोष है कि निष्कामता और अधर्म के साथ फड़फड़ाने वाले ‘चतुर’ लोग भी समय के अनुरूप सजा पाएंगे।

ईश्वर और विश्वास के वास्तविक पाठ

इस वाणी से यह स्पष्ट होता है कि परमेश्वर के सामने किसी भी देश, किसी भी सामरिक योजना, या किसी भी मानवीय बुध्दिमत्ता की अंतिम सत्ता नहीं है। बुद्धिमानी तब तक मान्य है जब वह ईश्वर के सत्य-अनुशासन के अनुरूप हो; परंतु यदि वह ego, घमंड, या अन्याय को पोषण देती है, तो उसे नष्ट कर दिया जाता है। निष्ठा और सच्ची बुद्धिमत्ता वह है जो परमेश्वर के मार्ग में चलती है।

क्यों और कैसे शब्दों को समझना आवश्यक है

यहोवा की यह वाणी है...—यह उद्घोष दैवी दायित्व का संकेत है। बुद्धिमानों को… नाश और चतुराई—यहाँ चतुराई से तात्पर्य राजनीतिक-रणनीतिक चालों, समुदायों के बीच की चालाकियों, और शस्त्र-शास्त्र की कुशलताओं से है। परमेश्वर इन शक्तिशालीन योजनाओं के भीतर भी न्याय की पराकाष्ठा स्थापित करते हैं।

अन्य प्रचलित टीका-आइडिया (संदर्भित साहित्य से संक्षेप)

यह विचार Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke की टिप्पणी में भी मिलता है—कि परमेश्वर न्याय करता है और मानव-योजना की परिपक्वता उसी समय सार्थक है जब वह ईश्वर की प्राथमिकताओं के अनुरूप हो। गांधी नहीं, बल्कि प्रभु की न्याय-योजना सर्वोपरि है। (ऐतिहासिक-जनक टिप्पणी के साथ)

अनुयायता के संबंध

कई संदर्भों में यह दैवी न्याय का सिद्धान्त उभरता है:

  • 2-3 शब्दों में: यहोवा का न्याय संसार के हर कोने तक पहुँचेगा, चाहे वह एडोम के भीतर की बुद्धिमत्ता हो या एसाव के पहाड़ों की चालाकी।

संकेतार्थ पर जोर देते हुए, कुछ cross-references यह बताते हैं कि प्रभु का निर्देश गलत नीतियों पर रोक लगाता है (उदा., यहोशू-न्याय) और विपदा के समय मनुष्यों की नेक नीति की कसौटी तय करता है।

आज के जीवन में उपयोगी अनुप्रयोग

- भयभीत न हों जब राजनैतिक या सामरिक योजनाएँ दबाव डालें; परमेश्वर के न्याय का समय सदा निश्चित रहता है।

- बुद्धिमानी वही मानी जाएगी जो ईश्वर की इच्छा और सत्य के अनुरूप हो। यह नीति-निष्ठा, ईमानदारी और समाज-न्याय के साथ जीने को प्रेरित करती है।

- अपने जीवन में: घमंड-भरोसा रखना छोड़ दें, कठिनाइयों में भी नैतिकता और सेवा पर टिके रहें।

सार-नोट

यहोवा की यह वाणी एक चेतावनी है कि मानव-चतुराई और शक्ति-शक्ति पर निर्भरता एक दिन परमेश्वर के न्याय के सामने मूल्यहीन हो जाएगी। वास्तविक बुद्धिमत्ता वही है जो परमेश्वर के मार्ग पर चलती है और अन्याय को त्याग देती है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

ओबद्याह 1:8 समानांतर पद और संबंधित वचन

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इस कारण सुन, मैं इनके साथ अद्भुत काम वरन् अति अद्भुत और अचम्भे का काम करूँगा; तब इनके बुद्धिमानों की बुद्धि नष्ट होगी, और इनके प्रवीणों की प्रवीणता जाती रहेगी।” (1 कुरि. 1:19)

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वह तो धूर्त लोगों की कल्पनाएँ व्यर्थ कर देता है*, और उनके हाथों से कुछ भी बन नहीं पड़ता।

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यहोवा जाति-जाति की युक्ति को व्यर्थ कर देता है; वह देश-देश के लोगों की कल्पनाओं को निष्फल करता है।

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