Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
नीतिवचन 8:1 नीतिवचन 8:2 नीतिवचन 8:3 नीतिवचन 8:4 नीतिवचन 8:5 नीतिवचन 8:6 नीतिवचन 8:7 नीतिवचन 8:8 नीतिवचन 8:9 नीतिवचन 8:10 नीतिवचन 8:11 नीतिवचन 8:12 नीतिवचन 8:13 नीतिवचन 8:14 नीतिवचन 8:15 नीतिवचन 8:16 नीतिवचन 8:17 नीतिवचन 8:18 नीतिवचन 8:19 नीतिवचन 8:20 नीतिवचन 8:21 नीतिवचन 8:22 नीतिवचन 8:23 नीतिवचन 8:24 नीतिवचन 8:25 नीतिवचन 8:26 नीतिवचन 8:27 नीतिवचन 8:28 नीतिवचन 8:29 नीतिवचन 8:30 नीतिवचन 8:31 नीतिवचन 8:32 नीतिवचन 8:33 नीतिवचन 8:34 नीतिवचन 8:35 नीतिवचन 8:36

नीतिवचन 8:26 का पृष्ठ-दृश्य और संदर्भ
यह पंक्ति यह दर्शाती है कि ज्ञान, बुद्धिमत्ता और सूर्य-तत्वों की उत्पत्ति से पूर्व भी यहोवा ने सबका नियोजन किया था। नीतिवचन 8 में बुद्धिमत्ता को एक व्यक्तित्व के रूप में प्रस्तुत किया गया है जो स्वयं परम-potentials के साथ प्रतिक्रिया करती है और संसार के निर्माण-कर्म से पहले भी उसकी योजना और उपस्थितित्व है। यह दीन-स्तर पर एक विशेष उद्घोष है कि विवेक और ज्ञान परमेश्वर के साथ पूर्व-स्थापित संबंध रखते हैं और सृष्टि के आरम्भ से ही उनका लक्ष्य यह रहा है कि वे परमेश्वर की महिमा को निर्देशित करें।
केंद्रीय अर्थ
कथन यह कहता है कि बुद्धिमत्ता ने पृथ्वी बनते समय, पृथ्वी के मूल ढांचे बनने से पहले ही अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। यह स्पष्ट संकेत देता है कि बुद्धिमत्ता की प्रकृति ईश्वरीय है, न कि रचना-केवल। यह दृश्यता सृष्टि के आरम्भिक क्षणों के साथ जुड़ा है, जो बताती है कि ज्ञान अत्यंत पुरातन और परमेश्वर के साथ अविभाज्य है।
दो-तीन प्रमुख विषय
संबद्ध पाठ (Cross-references) और संक्षिप्त व्याख्या
– येशु मसीह के साथ संवाद में भी बुद्धिमत्ता का व्यावहारिक अर्थ स्पष्टीकरण मिलता है, जहाँ परमेश्वर की योजना मानव इतिहास के भीतर प्रकट होती है।
– अन्य संदर्भ जहाँ बुद्धिमत्ता की पूर्व-उपस्थिति या परमेश्वर के साथ उसकी सम्बद्धता दिखाई देती है: स्तोत्र 90:2; यशायाह 55:9-11; प्रकाशितवाक्य 22:13. इन स्थलों से संतुलन बनता है कि ज्ञान और विवेक ईश्वर के स्वरूप के अनुरूप सदैव से उपस्थित रहे हैं।
व्यावहारिक विचार
यदि ज्ञान और विवेक सृष्टि-पूर्व से मौजूद थे, तो आज हमारे जीवन में उनका उपयोग कैसे करें? निर्णय-निर्माण, नैतिकता और मानव-सम्बन्धों में विवेक से मार्गदर्शन लें। परमेश्वर की मंशा के अनुरूप जीवन बिताने के लिए पवित्रशास्त्र के नियमों को दैनिक व्यवहार में उतारना चाहिए, ताकि हमारी सोच भी उसके उद्देश्यों के साथ संगत रहे।
कथन का संक्षिप्त सार
नीतिवचन 8:26 बताता है कि बुद्धिमत्ता और विवेक परमेश्वर की अनिवार्य और प्राचीन योजना का हिस्सा हैं, जो पृथ्वी के निर्माण के पहले से मौजूद रहे। यह verse हमें यह स्मरण कराता है कि ज्ञान केवल मानव-उत्पत्ति नहीं है, बल्कि वह परमेश्वर की गतिशील योजना का भाग है जो हर तथ्य और निर्णय को दिशा देता है।
महत्वपूर्ण उद्धरण (public-domain टिप्पणीकारों से)
एलबर्ट बार्न्स, मैथ्यू हेनरी, और एडम क्लार्क से यथार्थ जिक्रित विचारों के सार: “बुद्धिमत्ता का पूर्व-अस्तित्व यह दिखाता है कि ज्ञान परमेश्वर के साथ जुड़ा हुआ है, न कि मानव-व्यक्ति के साथ केवल.” (संक्षेपित विचार-आधारित अनुवाद; पूर्ण उद्धरण साइट पर उपलब्ध प्रमुख पाठ्यों से मिलते हैं।)