1 कुरिन्थियों 2:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

परन्तु हम परमेश्‍वर का वह गुप्त ज्ञान, भेद की रीति पर बताते हैं, जिसे परमेश्‍वर ने सनातन से हमारी महिमा के लिये ठहराया।

1 कुरिन्थियों 2:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

1 कुरिन्थियों 2:7 का संदर्भ और अर्थ

पदोन्नत विचार: इस पद में पौलुस परमेश्वर के गुप्त ज्ञान की चर्चा करते हैं, जिसे ईसाई समुदाय के सामने उद्घाटित किया गया है। कुरिन्थ के चर्च में बहसों और प्रतीकात्मक भाषाओं के बीच, पौलुस यह बताने का प्रयास करते हैं कि ईश्वर ने अपनी महिमा और औचित्य को समझाने के लिए एक विशेष ज्ञान ठहराया है, जो मानवीय बुद्धि से परे है।

मुख्य संदेश

इस वाक्य का केंद्र यह है कि परमेश्वर का भेदपूर्ण ज्ञान, जो हमारी महिमा के लिए सनातन से निर्धारित था, मनुष्यों के आत्म-गौरव या अनुभवजन्य खोज से मेल नहीं खाता। यह ज्ञान ईश्वर की स्वीकृति, उद्धार की योजना, और मसीह के पद-सम्पादन के द्वारा प्रकट होता है।

मुख्य विषय

  • गुप्त ज्ञान का स्रोत: यह ज्ञान परमेश्वर से है, न कि मानव विचारों से।
  • सनातन ठहराव: यह योजना éternelle है, जिसे मसीह में पूरा किया गया है।
  • मानवीय ज्ञानेन्द्रिय से परे: शास्त्र के अनुसार यह ज्ञान ईश्वर द्वारा प्रभावी होता है, श्रद्धा के द्वारा समझा जाता है।

संबद्ध पवित्र ग्रंथ

यह चर्चा अन्य जगहों में भी भिन्न आयामों से मिलती है:

  • रोमियों 8:28-30 — परमेश्वर की बुलाहट और चेहरों में महिमा बनना: यह बताता है कि परमेश्वर की मार्गदर्शक योजना कैसे इंसान के विवेक से आगे बढ़ती है।
  • 1 कोरिन्थियों 1:20-21 — विश्व के ज्ञान की कमी बनाम परमेश्वर की बुद्धि: मनुष्यों की हठधर्मिता के बावजूद ईश्वर अपना संदेश प्रभावी बनाते हैं।
  • यूहन्ना 17:17 — सत्य: पवित्र बाइबल में यह भेद बताता है कि ज्ञान कैसे आत्मा के द्वारा स्पष्ट होता है।

नैतिक व्यावहारिक विचार

हम आत्म-गौरव छोड़कर ईश्वर के गहरे उद्देश्य को पहचानने के लिए अपनी सोच को खोलें। जब हम इस गुप्त ज्ञान के प्रति विनम्र रहते हैं, तब हमारा जीवन उद्धार के वास्तविक परिवर्तन से आनन्दित होता है: ईश्वर की महिमा हमारी स्थिति और आशीषों में प्रकट होती है, न कि हमारे सामाजिक महत्व में।

छोटे cross-reference संबंध

1) रोमियों 11:33-34 — कितनी गहरी कृपा और ज्ञान है! यह बताता है कि परमेश्वर के विचार हमारे विचारों से परे हैं।

2) 1 कुरिन्थियों 1:26-31 — इस बात की पुष्टि कि परमेश्वर ने कमजोरों को चुनकर पराक्रमी ज्ञान को उल्टा दिखाया, ताकि कोई अपनी महिमा न दिखा सके।

3) याकूब 1:5 — यदि किसी को बुद्धि की कमी हो, तो परमेश्वर से माँगे, जो सभी को उदारता से देता है।

संक्षेप निष्कर्ष

परमेश्वर का वह गुप्त ज्ञान, जिसे सनातन से हमारी महिमा के लिए ठहराया गया है, मानव विचार-सीमाओं से परे है और मसीह के द्वारा उद्घाटित होता है। यह ज्ञान हमें विनम्र बनाता है, विश्वास से स्वीकारना सिखाता है, और सचमुच की महिमा की ओर अग्रसर करता है।

नोट: नीचे उद्धृत पूर्व-प्रचलित टिप्पणीकारों के शब्द केवल संकल्पना के लिए हैं और मूल पाठ्यांश से प्रेरित हैं: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सामान्य संकेत।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 कुरिन्थियों 2:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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कुलुस्सियों 1:26 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
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अर्थात् उस भेद को जो समयों और पीढ़ियों से गुप्त रहा, परन्तु अब उसके उन पवित्र लोगों पर प्रगट हुआ है।

2 पतरस 1:3 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
2 पतरस 1:3 (HINIRV) »
क्योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ्य ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिस ने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है।

मत्ती 11:25 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
मत्ती 11:25 (HINIRV) »
उसी समय यीशु ने कहा, “हे पिता, स्वर्ग और पृथ्वी के प्रभु, मैं तेरा धन्यवाद करता हूँ, कि तूने इन बातों को ज्ञानियों और समझदारों से छिपा रखा, और बालकों पर प्रगट किया है।

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