Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 कुरिन्थियों 2:1 1 कुरिन्थियों 2:2 1 कुरिन्थियों 2:3 1 कुरिन्थियों 2:4 1 कुरिन्थियों 2:5 1 कुरिन्थियों 2:6 1 कुरिन्थियों 2:7 1 कुरिन्थियों 2:8 1 कुरिन्थियों 2:9 1 कुरिन्थियों 2:10 1 कुरिन्थियों 2:11 1 कुरिन्थियों 2:12 1 कुरिन्थियों 2:13 1 कुरिन्थियों 2:14 1 कुरिन्थियों 2:15 1 कुरिन्थियों 2:16



1 कुरिन्थियों 2:7 का संदर्भ और अर्थ
पदोन्नत विचार: इस पद में पौलुस परमेश्वर के गुप्त ज्ञान की चर्चा करते हैं, जिसे ईसाई समुदाय के सामने उद्घाटित किया गया है। कुरिन्थ के चर्च में बहसों और प्रतीकात्मक भाषाओं के बीच, पौलुस यह बताने का प्रयास करते हैं कि ईश्वर ने अपनी महिमा और औचित्य को समझाने के लिए एक विशेष ज्ञान ठहराया है, जो मानवीय बुद्धि से परे है।
मुख्य संदेश
इस वाक्य का केंद्र यह है कि परमेश्वर का भेदपूर्ण ज्ञान, जो हमारी महिमा के लिए सनातन से निर्धारित था, मनुष्यों के आत्म-गौरव या अनुभवजन्य खोज से मेल नहीं खाता। यह ज्ञान ईश्वर की स्वीकृति, उद्धार की योजना, और मसीह के पद-सम्पादन के द्वारा प्रकट होता है।
मुख्य विषय
संबद्ध पवित्र ग्रंथ
यह चर्चा अन्य जगहों में भी भिन्न आयामों से मिलती है:
नैतिक व्यावहारिक विचार
हम आत्म-गौरव छोड़कर ईश्वर के गहरे उद्देश्य को पहचानने के लिए अपनी सोच को खोलें। जब हम इस गुप्त ज्ञान के प्रति विनम्र रहते हैं, तब हमारा जीवन उद्धार के वास्तविक परिवर्तन से आनन्दित होता है: ईश्वर की महिमा हमारी स्थिति और आशीषों में प्रकट होती है, न कि हमारे सामाजिक महत्व में।
छोटे cross-reference संबंध
1) रोमियों 11:33-34 — कितनी गहरी कृपा और ज्ञान है! यह बताता है कि परमेश्वर के विचार हमारे विचारों से परे हैं।
2) 1 कुरिन्थियों 1:26-31 — इस बात की पुष्टि कि परमेश्वर ने कमजोरों को चुनकर पराक्रमी ज्ञान को उल्टा दिखाया, ताकि कोई अपनी महिमा न दिखा सके।
3) याकूब 1:5 — यदि किसी को बुद्धि की कमी हो, तो परमेश्वर से माँगे, जो सभी को उदारता से देता है।
संक्षेप निष्कर्ष
परमेश्वर का वह गुप्त ज्ञान, जिसे सनातन से हमारी महिमा के लिए ठहराया गया है, मानव विचार-सीमाओं से परे है और मसीह के द्वारा उद्घाटित होता है। यह ज्ञान हमें विनम्र बनाता है, विश्वास से स्वीकारना सिखाता है, और सचमुच की महिमा की ओर अग्रसर करता है।
नोट: नीचे उद्धृत पूर्व-प्रचलित टिप्पणीकारों के शब्द केवल संकल्पना के लिए हैं और मूल पाठ्यांश से प्रेरित हैं: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सामान्य संकेत।