Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 कुरिन्थियों 4:1 1 कुरिन्थियों 4:2 1 कुरिन्थियों 4:3 1 कुरिन्थियों 4:4 1 कुरिन्थियों 4:5 1 कुरिन्थियों 4:6 1 कुरिन्थियों 4:7 1 कुरिन्थियों 4:8 1 कुरिन्थियों 4:9 1 कुरिन्थियों 4:10 1 कुरिन्थियों 4:11 1 कुरिन्थियों 4:12 1 कुरिन्थियों 4:13 1 कुरिन्थियों 4:14 1 कुरिन्थियों 4:15 1 कुरिन्थियों 4:16 1 कुरिन्थियों 4:17 1 कुरिन्थियों 4:18 1 कुरिन्थियों 4:19 1 कुरिन्थियों 4:20 1 कुरिन्थियों 4:21



1 कुरिन्थियों 4:14 — तत्काल परिचय और संदर्भ
यह पद 1 कुरिन्थियों पत्र में पौलुस के पिता-प्रेम और प्रोत्साहन के आलोक में आया है। कुरिन्थ के एक चर्च में विभेदित विचार-धाराओं के बीच पौलुस अपनी चेतावनी और प्रेमपूर्ण सुधार का संदेश दे रहे हैं। वे explicitly कहते हैं कि वे लज्जित करने के लिए लिख नहीं रहे, बल्कि वे अपने प्रिय बालक के समान पाठकों को सचेत करने, मार्गदर्शित करने और उनका जीवन-tour मार्गदर्शन करना चाहते हैं।
पवित्र लेखन से पाठ का मुख्य संदेश
यह पाठ बताता है कि प्रेरितों का उद्देश्य केवल दंडित करना नहीं, बल्कि सच्चाई से सतर्क करना और विश्वासी यात्रा में स्थिरता बनाये रखना है। जब लेखक अपनी भूमिका को “प्रिय बालक” कहकर सम्बोधित करते हैं, तब वह आत्मिक संरक्षक की भूमिका प्रस्तुत करते हैं, जो पाठकों के लिए एक पिता-सा प्यार और जिम्मेदारी दिखाता है।
पद के शब्दार्थ और भावार्थ स्पष्ट करना
“तुम्हें चिताता हूँ” का अंश यहाँ एक पिता की नोंक-झोंक और प्रेमपूर्ण परामर्श की भावना है—यह कोई अपमान नहीं, बल्कि एक दुख-दर्शी परामर्श है ताकि पाठक चूक न जायें। “तुम्हें लज्जित करने के लिये ये बातें नहीं लिखता” से स्पष्ट होता है कि लेखक यह नहीं चाहता कि उनके शिष्यों के भीतर आत्म-ग्लानि का भाव बने, बल्कि वे सच बताने के द्वारा आभा को पुनः प्राप्त करना चाहते हैं।
Cross-निर्देशन और सम्बन्धित पवित्र ग्रंथ
ये संदर्भ दर्शाते हैं कि पवित्र लेखन किस प्रकार शिष्य-निर्देशन और प्रेम के बीच संतुलन बनाता है और विश्वासी समुदाय को प्रोत्साहित करता है।
पुनरावृत्ति और पॉलुस के गुण
पौलुस का यह शब्द स्वयं के प्रेरित पद-गुण को नहीं दिखाते, बल्कि वे पाठकों के कल्याण के लिए अपनी भूमिका को एक पिता की तरह मानते हैं। उनका उद्देश्य शिष्यों को लज्जित करना नहीं, बल्कि सचेत करना है ताकि वे मार्ग-भ्रष्ट न हों और ईश्वर के कंठ-संगत आचरण को बनाए रखें।
आज के लिए अनुप्रयोग
संयुक्त विश्लेषण
यह पाठ प्रेरित-शिक्षा की एक चिर-परिचित धारा को पुष्ट करता है: वचन कठोर हो सकता है, पर उसका अंत प्रेम और उद्धार की ओर जाता है। Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के टिप्पणी-मानों में से केन्द्रीय विचार यह है कि सच्चाई का प्रयोजन भय नहीं, बल्कि पुनःस्थापना और विश्वास की मजबूती है। क्लासिक टिप्पणियों में से एक प्रभाव यह है कि संदेह-जनित आत्म-आलोचना से नहीं, बल्कि प्रेम-आधारित प्रोत्साहन से परिवर्तन संभव है।
इस प्रकार, 1 कुरिन्थियों 4:14 हमें सीख देता है कि एक ईमानदार पितृत्व-प्रेम से प्रस्तुत प्रवचनों में कठोर शब्द भी शिष्य के लिए उद्धार के मार्ग को सुरक्षित करते हैं।