Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 कुरिन्थियों 4:1 1 कुरिन्थियों 4:2 1 कुरिन्थियों 4:3 1 कुरिन्थियों 4:4 1 कुरिन्थियों 4:5 1 कुरिन्थियों 4:6 1 कुरिन्थियों 4:7 1 कुरिन्थियों 4:8 1 कुरिन्थियों 4:9 1 कुरिन्थियों 4:10 1 कुरिन्थियों 4:11 1 कुरिन्थियों 4:12 1 कुरिन्थियों 4:13 1 कुरिन्थियों 4:14 1 कुरिन्थियों 4:15 1 कुरिन्थियों 4:16 1 कुरिन्थियों 4:17 1 कुरिन्थियों 4:18 1 कुरिन्थियों 4:19 1 कुरिन्थियों 4:20 1 कुरिन्थियों 4:21



1 कुरिन्थियों 4:18 — तत्कालीन स्थिति का अवलोकन
पद का संदेश है कि कुछ लोग, जिनके मन से मसीही जीवन की गहराई और वास्तविकता उतर चुकी प्रतीत होती है, बार-बार यह संकेत दे रहे हैं कि प्रभु आने वाले नहीं हैं या संदेशग्रहण में देरी हो रही है। पॉल इस व्यू को जड़ से चुनौती देते हैं: वे कहते हैं कि कुछ लोग मानो मेरे पास आने का अवसर सीमित है और वे फूल-झड़ वाले, भ्रमित विचारों में फँस गए हैं। यह उद्धरण क्रिश्चियन समुदाय में दिलचस्प धार्मिक धारणाओं, आत्म-ध्यान और प्रतीक्षा की विडंबनात्मक स्थिति की ओर संकेत करता है।
ईश्वरीयता और विश्वास पर पाठ का संकेत
जहां कुछ लोगों ने समय-सीमा को लेकर विस्मय और असंतोष दिखाया है, वही पॉल स्पष्ट करते हैं कि प्रभु के आने का सत्य और वर्तमान विश्वस्थितियाँ एक साथ चलते रहते हैं। विश्वास केवल बाहरी घटनाओं पर नहीं पनपता, बल्कि आस्थावान के हृदय की उन्नति और नम्रता में मिलती है। इस पंक्ति के पीछे एक बड़ा विचार है: ईश्वर की संतान की सुरक्षा, उनका विवेकपूर्ण जीवन, और विश्वास की स्थिरता उन आस्थाओं के बीच भी बनी रहती है जो समय-समय पर विक्षिप्त हो जाते हैं।
मुख्य शब्दों का स्पष्टीकरण
संबद्ध पवित्र संदर्भ
- प्रेरितों के पहले पत्र में, पॉल ने प्रतीक्षा और वास्तविक जीवन के आचरण पर जोर दिया है, ताकि विश्वास की गहराई बनी रहे।
- अन्य पवित्र ग्रंथों में भी यह विचार मिलता है कि परमेश्वर के मानवीय मार्गदर्शन की आवश्यकता है और आशा बनी रहने पर ही परमेश्वर के उद्धार के उद्देश्य पूरे होते हैं।
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से संक्षिप्त विचार
यह पंक्ति उन संदर्भों को खोलती है जो सामान्यतः कहते हैं कि परमेश्वर के साथ सच्ची प्रकार्य-वृत्ति विश्वास के केंद्र में बनी रहनी चाहिए, न कि मानव-आशाओं के रंग-रोगन पर।
Matthew Henry: उद्धरण-आधारित टिप्पणी से यह निष्कर्ष निकलता है कि सूचित करना है कि ईश्वर की चपलता, उस समय भी, हमारे भीतर आस्था की स्थिरता के लिए एक परीक्षा है।
Albert Barnes: यह विचार देता है कि प्रभु के आगमन की प्रतीक्षा में संदेह और असंतोष को हराना चाहिए क्योंकि यह विश्वास की स्थायित्व पर चोट करता है।
Adam Clarke: प्रेरित इस प्रकार की वाणी से यह बताने का प्रयास करते हैं कि भले ही कुछ लोग भ्रमित विचारों में हों, परंतु ईश्वर का धैर्य और उनकी योजना की पूर्ति अपरिवर्तित है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संदर्भ-आधार)
1) अन्य प्रेरिती ग्रंथों में आस्था की स्थिरता और प्रभु के आगमन के समय-निर्णय के बारे में स्पष्ट चेतावनी मिलती है।
2) पवित्र शास्त्र में आस्तिक के जीवन में धैर्य और नम्रता के महत्व का बार-बार उल्लेख है।
3) दूसरे नामी ग्रंथों के समान संकेतों से दिखता है कि भविष्य के समय के बारे में निष्कर्ष निकालते समय हृदय की शुद्धता आवश्यक है।
वर्तमान-दिन में अनुप्रयोग
आज के विश्वासियों के लिए यह वाक्य स्मरण कराता है कि भ्रमित विचारों और बाहरी ध्वनियों से प्रभावित हो कर अपने स्वयं के आत्मविश्वास को ना खोयें। प्रभु के आगमन की आशा हमारे नम्र और सत्य-आधारित जीवन से जुड़ी होनी चाहिए। दृढ़ प्रतिज्ञा रखें, सतह के उत्साह के बजाय आंतरिक परिवर्तन को प्राथमिकता दें, और समुदाय के भीतर एक दूसरे को प्रेरित करें ताकि विश्वास स्थिर रहे।
संक्षिप्त सार
जो कुछ लोग मेरी उपस्थिति के बारे में भ्रमित धारणाओं की ओर इशारा करते हैं, वे पॉल के संदेश के अनुसार वास्तविक आस्था में निहित होने की आवश्यकता दिखाते हैं—आख्यायित समय की परवाह किये बिना परमेश्वर की योजना पर भरोसा बनाए रखें।