1 कुरिन्थियों 4:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

क्योंकि परमेश्‍वर का राज्य बातों में नहीं, परन्तु सामर्थ्य में है।

1 कुरिन्थियों 4:20 पद-दर-पद बाइबल टीका

ख़ुद बताता है परमेश्वर का राज्य—संघर्ष नहीं, सामर्थ्य

अर्थ: परमेश्वर का राज्य यहाँ ताक़त और शब्दों के घनघोर उन्मत्त बयानों से नहीं, बल्कि उसकी शक्तिशाली क्रिया और प्रभाव से दिखायी देता है।

पृष्ठभूमि और पाठ का संदर्भ

1 कुरिन्थियों 4:20 में प्रेरित पौलुस क्रमशः कांग्रेसियों के बीच व्यावहारिक जीवन और आध्यात्मिक अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखने की बात कर रहे हैं। वह बतलाते हैं कि उद्धार और राज्य की वास्तविक सत्ता किस रूप में प्रकट होती है: सिर्फ दिखावे या शाब्दिक बहस में नहीं, बल्कि परमेश्वर की आध्यात्मिक क्रिया और परिवर्तनकारी सामर्थ्य में। पतरस के राज्य-विवेक से अलग, यहाँ लक्ष्य है समुदाय के बीच प्रेम, नैतिक परिवर्तन, और वास्तविकता की अनुभूति—जो परमेश्वर की शक्ति से संचालित होती है।

व्याख्यात्मक अवलोकन

- राज्य का वास्तविक प्रभाव: शब्दों की माहिरियत नहीं, बल्कि क्रिया-प्रधान परिवर्तन। प्रेरित कह रहे हैं कि परमेश्वर의 राज्य वह है जिसमें लोगों के भीतर नई जिंदगी, विश्वास की गवाही, और नैतिक परिवर्तन प्रकट होता है।

- समुदाय की पहचान: कुरिन्थ चर्च में विभ्रम और शंका देखी गई; पर परमेश्वर का शासन उनके जीवनों में काम करके क्रियात्मक प्रमाण देता है जो बाहरी युक्तियों से नहीं दिखता।

2-3 खास विचार

  • परमेश्वर की सत्ता कैसी दिखती है? वह शब्द में नहीं, बल्कि जीवन के व्यवहार, प्रेम, और नैतिकता के परिवर्तन में नज़र आती है।
  • आत्म-आलोचना की जगह गर्व-रहित सेवा: सामर्थ्य में राज्य का संकेत वह है जिसमें अपनापन और विनम्रता प्रमुख हो।

Related Passages (संक्षिप्त संदर्भ और संकेत)

- मत्ती 11:28-30: यीशु की विश्राम और हल्कापन की सत्ता शारीरिक शब्दों से अधिक गहरी आस्था में प्रकट होती है।

- रोमियों 1:16-17: विश्वास द्वारा प्रकाशित होती है, क्योंकि शक्ती नहीं, वरन् परमेश्वर का विवेक जीवन में घुलता है।

- यूहन्ना 6:63: जीवित शब्द की शक्ति आत्मा को जीवन देती है, शब्दों से अधिक प्रभावशाली।

एतिहासिक टिप्पणी (संक्षेप)

एंटिक टिप्पणीकारों के अनुसार, यह वाक्य सामर्थ्य की प्रकृति पर जोर देता है—ऐसा सामर्थ्य जो कानों-की-गवाही से नहीं, परन्तु परिवर्तन-प्राप्त जीवन से पहचाना जाता है।

कथन-सार

यह वाक्य याद दिलाता है कि परमेश्वर का राज्य सच्चे परिवर्तन और आस्थावान जीवन में प्रकट होता है, न कि केवल शब्द-भाषण और बाहरी प्रदर्शनों में।

अध्याय-श्रेणी: क्रियात्मक आत्म-परख

आप अपने व्यवहार में परमेश्वर के राज्य की शक्ति कैसे अनुभव करते हैं? क्या आप प्रेम, नम्रता, और सत्कर्मों के जरिए उसी सत्ता को अपना जीवन दे रहे हैं?

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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और मेरे वचन, और मेरे प्रचार में ज्ञान की लुभानेवाली बातें नहीं*; परन्तु आत्मा और सामर्थ्य का प्रमाण था,

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क्योंकि हमारी लड़ाई के हथियार शारीरिक नहीं, पर गढ़ों को ढा देने के लिये परमेश्‍वर के द्वारा सामर्थी हैं।

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क्योंकि हमारा सुसमाचार तुम्हारे पास न केवल वचन मात्र ही में वरन् सामर्थ्य* और पवित्र आत्मा, और बड़े निश्चय के साथ पहुँचा है; जैसा तुम जानते हो, कि हम तुम्हारे लिये तुम में कैसे बन गए थे।

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