1 कुरिन्थियों 5:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

और तुम शोक तो नहीं करते, जिससे ऐसा काम करनेवाला तुम्हारे बीच में से निकाला जाता, परन्तु घमण्ड करते हो।

1 कुरिन्थियों 5:2 पद-दर-पद बाइबल टीका

मुख्य interpretive बिंदु

1 कुरिन्थियों 5:2 का पाठ इस बात को उजागर करता है कि पवित्र समुदाय के भीतर गम्भीर पाप के प्रति शारीरिक आलोचना मात्र नहीं, बल्कि उस पाप के विरुद्ध उचित कदम उठाने की प्रेरणा उत्पन्न होनी चाहिए। यहाँ अधीनस्थ तथ्य यह है कि एक ऐसा कार्य जो समाज के बीच करना अत्यंत अपमानजनक माना गया, उसे लेकर भी समूह का समन्वय और विनयपूर्ण जिम्मेदारी साझा रहनी चाहिए। लेखक स्पष्ट करते हैं कि एक पापी के साथ घमण्ड नहीं, बल्कि चर्च-समुदाय की पवित्रता बनाए रखना प्राथमिकता है, ताकि वह पंक्तिबद्धता टूटे नहीं और सामाजिक समरसता बना रहे।

पाठ की साहित्यिक संदर्भ में समझ

पौलस्त opties जन्म से, कुरिन्थी चर्च में अनियमितता के कई केस सामने आये थे। यहाँ 5chapter के संदर्भ में एक स्पष्ट मामला है जहाँ एक सदस्य के द्वारा नग्न पाप किया गया है और उसे सार्वजनिक रूप से नहीं निभाया गया। पवित्रता और समुदाय की प्रतिष्ठा के प्रश्न पर लेखक दृढ़ हैं: न केवल पाप का निष्कासन आवश्यक है, बल्कि घमण्ड बनना भी एक निदर्श है, जो उपचार के मार्ग को असफल कर देता है।

पदार्थ-गतिविधि और theological significance

इस वाक्य के पीछे एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है—किसी पापी के बारे में समुदाय की प्रतिक्रिया मर्मस्पर्शी हो, परन्तु उद्धार की आशा भी बनी रहे। सुसमाचार में पाप और अपराध के प्रति शुद्धता और प्रेम की balancing है। यदि समुदाय पापी पर घमण्ड करे, तो वह भंग होता है और पवित्रता के उद्देश्यों पर चोट लगती है। इसलिए शोक व्यक्त करने की वक़्त वह न हो जो पापी को समाज से काट दे, बल्कि वह हो जो पाप के परिणाम का गम्भीरता से एहसास कराए और सुधार के मार्ग दिखाए।

बाइबलीय cross-सम्बन्ध (संकेतित संदर्भ)

  • गलातियों 6:1 — पापी को सुधारने की मृदुता और आत्म-आलोचना का आवश्यक संयोजन।
  • यहोशू 7:11-13 — पाप के परिणाम और समुदाय की पवित्रता बनाए रखने की ज़रूरत।
  • 2 कुरिन्थियों 2:6-8 — पाप के परिणामस्वरूप क्षमा और सुधार की प्रक्रिया का महत्व।

इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि पाप के लिए क्षमायोग्यता जरूरी है, पर उसका परिणाम समाज की शुद्धता और पुनर्संयोजन के लिए भी आवश्यक है।

पाठ-परिशोधन और प्रश्न-आत्मनिरीक्षण

  • हम अपने समुदाय में पाप के विरुद्ध कितनी सहनशीलता और कितनी दृढ़ता दिखाते हैं?
  • क्या हम पापी के साथ प्रेम-भरी संवेदना और सुधार की दिशा में कदम उठाते हैं, या सिर्फ आलोचना करते हैं?
  • क्या हमारी प्रतिक्रिया घमण्ड और बहिश्कार तक नहीं पहुँचती, बल्कि पवित्रता और उपचार का मार्ग प्रशस्त करती है?

संक्षिप्त निष्कर्ष

1 कुरिन्थियों 5:2 समुदाय की पवित्रता और प्रेम-निष्ठा के संतुलन की माँग करता है। पापी के बारे में उचित कदम उठाने के साथ-साथ घमण्ड से बचना ज़रूरी है ताकि उपचार और सुधार संभव हो सके, और समुदाय दृढ़तापूर्वक धार्मिक उद्देश्यों को 維 बनाए रखे।

टीका-उद्धृत अंश (public-domain)");

नीचे प्रस्तुत टिप्पणीकारों के समानांतर विचारों से जुड़ने के लिए, इन विधाओं से मिलता-जुलता सार समाहित है:

Matthew Henry (public-domain) के विचारों का संकल्प: "Where sin is grown in the church, zeal for discipline is often wanting;" (अनुवाद सार) — पाप के विरुद्ध दंड की उत्साहपूर्ण_READY का अभाव कभी-कभी नज़र आता है।

Albert Barnes (public-domain) के दृष्टिकोण में कहा गया है कि चर्च में पाप के निष्कासन के साथ प्रेम-पूर्ण सुधार का मार्ग बना रहना चाहिए।

Adam Clarke (public-domain) ने पाप के विरुद्ध दृढ़ कदम और समुदाय की पवित्रता के बीच संतुलन पर बल दिया है।

नोट: ऊपर के विचार public-domain commentary के सार हैं; यदि आप प्रत्येक commentary के स्पष्ट वाक्यों के छोटे-छोटे उद्धरण देखना चाहें, वे सीमित हैं और पूर्ण टेक्स्ट उद्धरण यहाँ नहीं दिये जाते।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

1 कुरिन्थियों 5:2 समानांतर पद और संबंधित वचन

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2 कुरिन्थियों 7:7 (HINIRV) »
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