Old Testament
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1 कुरिन्थियों 5:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
मैं तो शरीर के भाव से दूर था, परन्तु आत्मा के भाव से तुम्हारे साथ होकर, मानो उपस्थिति की दशा में ऐसे काम करनेवाले के विषय में न्याय कर चुका हूँ।
1 कुरिन्थियों 5:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 कुरिन्थियों 5:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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कुलुस्सियों 2:5 (HINIRV) »
क्योंकि मैं यदि शरीर के भाव से तुम से दूर हूँ, तो भी आत्मिक भाव से तुम्हारे निकट हूँ, और तुम्हारे विधि-अनुसार चरित्र और तुम्हारे विश्वास की जो मसीह में है दृढ़ता देखकर प्रसन्न होता हूँ।

1 थिस्सलुनीकियों 2:17 (HINIRV) »
हे भाइयों, जब हम थोड़ी देर के लिये मन में नहीं वरन् प्रगट में तुम से अलग हो गए थे, तो हमने बड़ी लालसा के साथ तुम्हारा मुँह देखने के लिये और भी अधिक यत्न किया।

2 कुरिन्थियों 10:1 (HINIRV) »
मैं वही पौलुस जो तुम्हारे सामने दीन हूँ, परन्तु पीठ पीछे तुम्हारी ओर साहस करता हूँ; तुम को मसीह की नम्रता, और कोमलता* के कारण समझाता हूँ।
पद्य-सार और पृष्ठभूमि
1 कुरिन्थी 5 अध्याय में पौलुस गिरोहवृत्ति में घटित एक कड़वी द्रष्टान्त को उद्धृत करते हैं—जब एक सदस्य के साथ विवाह-त्याग या आदि प्रकार के घृणित कर्म के बारे में नगर-समाज को सचेत किया गया था। यहाँ विशिष्ट बात यह है कि पवित्रता की आवश्यकता और समुदाय में दुष्कृत्यों के प्रति प्रतिक्रिया कैसे संतुलित होनी चाहिए, इस पर प्रकाश डाला गया है। इस पद पर पौलुस शरीर के बजाय आत्मा के साथ, मानो उपस्थिति में होते हुए, ऐसे कर्म के विषय में न्याय करने की बात कहते हैं, भले ही वह शारीरिक रूप से उपस्थित न हों। यह वाक्य ईश्वर के बराबर शुद्धता और समुदाय की पवित्रता के लिए जागरूकता का संकेत है।
Verse in Focus
मैं तो शरीर के भाव से दूर था, परन्तु आत्मा के भाव से तुम्हारे साथ होकर, मानो उपस्थिति की दशा में ऐसे काम करनेवाले के विषय में न्याय कर चुका हूँ।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
इस वचन में मुख्य संदेश है: पाप और अशुद्धता के विरुद्ध समाज में दृढ़, पर प्रेमपूर्ण जिम्मेदारी—जब समुदाय में ऐसी हदें लांघी जाती हैं जो ईश्वर की पवित्रता के विरुद्ध हैं, तब भी निष्ठुर नहीं होना चाहिए, लेकिन उपचार और सुधार के लिए स्पष्ट कार्रवाई आवश्यक है। पौलुस कह रहे हैं कि वे शारीरिक दूरी की स्थिति में भी, आत्मिक दृष्टि से उसी तरह व्यवहार कर रहे हैं जैसे वे उपस्थित होकर निर्णय ले रहे हों; इसका उद्देश्य संतोषपूर्वक न्याय, अनुशासन और समुदाय की पवित्रता बनाए रखना है।
कथा-सारंग: सम्बन्धित अनुभागों से संयोग
1 कुरिन्थियों 5 के समकक्ष विचार पवित्रता और आत्मिक अनुशासन के लिए हैं। अन्यत्र पवित्र अभ्यास और मिसालें भिन्न-भिन्न प्रकार के पापों के विरुद्ध समुदाय-नियमों के साथ जुड़ी मिलती हैं, जैसे प्रभु के शरीर के स्वास्थ्य के लिए खतरे को रोकना और भ्रातृत्व के बीच विश्वास-सम्बन्ध बनाए रखना।
महत्वपूर्ण पाठ और व्यावहारिक अनुप्रयोग
अनुगमन योग्य cross-references
- बंधुत्व के बीच अनुकूलन और अनुशासन के बारे में विचार (जेम्स 5:19-20) — सुधार के अवसर और परमेश्वर के उद्देश्य की याद दिलाते हैं।
- मसीह के शरीर के स्वास्थ्य के लिए स्पष्टता (2 कुरिन्थी 2:6-8) — दोषी से परिवार के साथ सहकार्य की दिशा में उद्धारण देता है, ताकि वह वापसी करे और पुनः समुदाय में स्थिर हो।
- याकूब 5:19-20 – सत्य वचन के प्रभाव और पाप के विरुद्ध कदम उठाने की महत्ता पर प्रकाश डालता है।
उपयुक्त व्यावहारिक अनुप्रयोग
- यदि किसी पवित्रता के उल्लंघन के संकेत सत्यापित हों, तो चुप्पी से नहीं, बल्कि स्पष्ट, नम्र और संस्था-केन्द्रित भाषा में कदम उठाने चाहिए।
- सुधार के अवसर पर भरोसा दें, ताकि वह व्यक्ति परमेश्वर के मार्ग पर लौट सके।
संक्षेप
1 कुरिन्थियों 5 के इस वचन में यह स्पष्ट होता है कि समुदाय की पवित्रता और प्रेम-सम्बन्ध दोनों एक साथ चलेंगे। शरीर के भाव से दूर रहते हुए भी आत्मा के साथ न्याय करने की प्रेरणा दर्शाती है कि वास्तविक प्रेम वही है जो पाप के विरुद्ध साहस और उपचार दोनों लाता है, ताकि समुदाय आलोकित रहे और प्रत्येक व्यक्ति परिवर्तन के रास्ते पर अग्रसर हो सके।
उद्धृत निष्कर्षों में Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के सार्वजनिक-domain टिप्पणीकारों के विचारों से प्रेरणा मिली है; उनके संक्षिप्त कथन जब उचित हुए हैं, वे विशिष्ट शब्दों के रूप में उद्धृत किए गए हैं।