Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 कुरिन्थियों 9:1 1 कुरिन्थियों 9:2 1 कुरिन्थियों 9:3 1 कुरिन्थियों 9:4 1 कुरिन्थियों 9:5 1 कुरिन्थियों 9:6 1 कुरिन्थियों 9:7 1 कुरिन्थियों 9:8 1 कुरिन्थियों 9:9 1 कुरिन्थियों 9:10 1 कुरिन्थियों 9:11 1 कुरिन्थियों 9:12 1 कुरिन्थियों 9:13 1 कुरिन्थियों 9:14 1 कुरिन्थियों 9:15 1 कुरिन्थियों 9:16 1 कुरिन्थियों 9:17 1 कुरिन्थियों 9:18 1 कुरिन्थियों 9:19 1 कुरिन्थियों 9:20 1 कुरिन्थियों 9:21 1 कुरिन्थियों 9:22 1 कुरिन्थियों 9:23 1 कुरिन्थियों 9:24 1 कुरिन्थियों 9:25 1 कुरिन्थियों 9:26 1 कुरिन्थियों 9:27



मुख्य विचार: धर्म-संप्रेषण और विवाहित जीवन की बहुदृष्टि
1 कुरिन्थियों 9:5 में पौलुस एक स्पष्ट प्रश्न उठाते हैं: क्या हमें अधिकार नहीं है कि हमें विवाह के द्वारा एक मसीही बहन के साथ जीवन साझा करने का अधिकार हो, जैसे अन्य प्रेरित और प्रभु के भाइयों के द्वारा कैफा आदि करते हैं? यह पद समुदाय के भीतर राष्ट्रीय-परंपरा से नहीं, बल्कि परमेश्वर के राज्य के नियमों के आलोक में विवाहित जीवन के अधिकार और विवेक पर प्रश्न उठाता है। पौलुस का इशारा यह है कि उधृत अधिकारों के साथ-साथ सामान्य सामाजिक व्यवहार और प्रभु के उद्देश्य के बीच संतुलन बनाना चाहिए।
साहित्यिक संदर्भ (पाठ्य-पृष्ठभूमि)
पौलुस इस अध्याय में कुरिन्थ के चर्च की विविधता और उनके अधिकार-परक रवैये पर चर्चा करते हैं। वे यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि प्रेरितों और उनके सहयोगियों के लिए सामाजिक-वैधानिक अधिकारें भी परमेश्वर के राज्य के मिशन के तहत उपयोगित होती हैं, परन्तु पर्याप्त परमेश्वर-आज्ञा और भक्तों के लिए सबसे बड़ा लक्ष्य प्रेम और vrata-निष्ठा है।
तीखी theological significance (धार्मिक महत्त्व)
यह दृष्टांत हमें यह स्मरण कराता है कि अधिकार इस संसार की स्वाभाविक मांग है, पर परमेश्वर के प्रेम और सेवकाई के उद्देश्य के सामने वे गौण हो जाते हैं। यदि किसी सामाजिक नियम के कारण मिशनARY गतिविधि में बाधा आ जाए, तो वह अधिकार संशय में पड़ सकता है। यह प्रेरित-आधार पर पुरुषार्थ का एक पहलू है: विवाहित जीवन के अधिकारों को संयम और दयालुता के साथ निभाना चाहिए ताकि सुसमाचार की मुख्यत: गति बनी रहे।
पवित्रशास्त्री-आकलन (पूर्व-प्रकाशित टिप्पणी से संकलित सार)
मैथ्यू हेनरी का संकेत है कि ईश्वर के राज्य के लिए प्रेरितों के निजी अधिकारों का विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है; वे विवाह की स्वतंत्रता को मानते हैं, पर मिशन की सेवा के लिए आवश्यक विवेकशक्ति का भी उल्लेख करते हैं। एल्बर्ट बार्न्स कहते हैं कि यह उत्कंठा दिखाती है कि चर्च के नेताओं को अधिकार-संग्रह से ऊपर उठकर प्रत्यक्ष सेवकई पर भरोसा रखना चाहिए। एडम क्लार्क याद दिलाते हैं कि समर्थकों का चिह्न यह है कि वे अपने अधिकारों को प्रेम के नियम के अनुसार रखे और मिशन के लिए अनुकूल बनाएं।
अन्वेषणीय cross-references (संक्षिप्त संदर्भ)]
reflection questions (विचार के प्रश्न)
निष्कर्ष (संक्षिप्त सार)
पौलुस इस वचनों के माध्यम से सम्मिलित करते हैं कि मसीही व्यक्ति अपने अधिकारों के प्रयोग में विवेक रखें ताकि मिशन क्षयित न हो। विवाह की स्वतंत्रता हर एक के लिए हो सकती है, पर चर्च के विश्व-उद्देश्य के अनुरूप चलना अधिक आवश्यक है। यह निश्चित है कि अधिकारों का संयम प्रेम के नियमों में है और चर्च की एकता, प्रेरितों की प्रतिष्ठा, तथा सुसमाचार की सफलता पर केंद्रित रहता है।
उद्धरण संकेत: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के प्रकाशित टिप्पणियों के संकेतन होने पर उनके शब्दों के सीधे पूर्ण उद्धरण केवल तब शामिल होते हैं जब वे उपयोगी हों और पाठ के अनुरूप हों; यहाँ पर उनके छोटे संदर्भ-उद्धरणों के प्रेरणात्मक सार ही प्रयुक्त हैं।