Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 1:1 यूहन्ना 1:2 यूहन्ना 1:3 यूहन्ना 1:4 यूहन्ना 1:5 यूहन्ना 1:6 यूहन्ना 1:7 यूहन्ना 1:8 यूहन्ना 1:9 यूहन्ना 1:10 यूहन्ना 1:11 यूहन्ना 1:12 यूहन्ना 1:13 यूहन्ना 1:14 यूहन्ना 1:15 यूहन्ना 1:16 यूहन्ना 1:17 यूहन्ना 1:18 यूहन्ना 1:19 यूहन्ना 1:20 यूहन्ना 1:21 यूहन्ना 1:22 यूहन्ना 1:23 यूहन्ना 1:24 यूहन्ना 1:25 यूहन्ना 1:26 यूहन्ना 1:27 यूहन्ना 1:28 यूहन्ना 1:29 यूहन्ना 1:30 यूहन्ना 1:31 यूहन्ना 1:32 यूहन्ना 1:33 यूहन्ना 1:34 यूहन्ना 1:35 यूहन्ना 1:36 यूहन्ना 1:37 यूहन्ना 1:38 यूहन्ना 1:39 यूहन्ना 1:40 यूहन्ना 1:41 यूहन्ना 1:42 यूहन्ना 1:43 यूहन्ना 1:44 यूहन्ना 1:45 यूहन्ना 1:46 यूहन्ना 1:47 यूहन्ना 1:48 यूहन्ना 1:49 यूहन्ना 1:50 यूहन्ना 1:51



संदर्भ एवं संक्षिप्त व्याख्या — यूहन्ना 1:42
यह सन्देश यीशु के प्रारंभिक सेवाकाल का है, जब एक शिष्य — पतरस के भाई — पतरस (शमौन) को लेकर यीशु के पास आता है। यीशु की दृष्टि और नामकरण का यह क्षण नए नेतृत्व और पहचान की घोषणा है। यहाँ "कैफा" (अरामी शब्द) का अर्थ है "पत्थर" या "पतरस" (ग्रीक पेत्रोस), जिससे शिष्य के भविष्य में बने विशेष स्थान की ओर संकेत मिलता है।
केंद्रीयार्थ (Central meaning)
यह वचन दर्शाता है कि यीशु लोगों के भीतर की वास्तविक पहचान देख सकते हैं और वह अपने सेवकों के लिए नया पद या नया अर्थ घोषित कर देते हैं। शमौन का पतरस कहलाना केवल नाम बदलना नहीं, बल्कि एक नई जिम्मेदारी और भविष्य की भूमिका की घोषणा है।
मुख्य विषय
संबंधित ग्रन्थ और स्वल्प व्याख्या
यहाँ कुछ प्रासंगिक संदर्भ हैं जो समझ को विस्तृत करते हैं:
व्यावहारिक विचार
हमारे लिए यह पद याद दिलाता है कि ईश्वर हमारी असली प्रकृति देखता है और कभी-कभी वह हमें नयी पहचान और जिम्मेदारी देता है। यह निम्न रूप से लागू होता है:
पुरानी टीका से उपयोगी उद्धरण
मत्ती हेनरी का संक्षिप्त विचार सहायक है: "यह नामकरण शमौन को एक नया कर्मभार और एक नया अर्थ देता है।" (सटीक उद्धरण रूप में छोटा अंश शामिल किया गया है।)
अल्बर्ट बार्न्स का एक टिप्पणीगत संक्षेप कहता है कि यीशु की दृष्टि किसी भी बाह्य परिचय से परे जाकर व्यक्ति की आंतरिक पहचान उजागर करती है।
संक्षिप्त समापन
यूहन्ना 1:42 हमें सिखाता है कि यीशु न केवल लोगों को बुलाते हैं, बल्कि उन्हें नई पहचान और भूमिका प्रदान करते हैं। यह क्षण व्यक्तिगत रूपांतरण और सामुदायिक नेतृत्व के आरम्भ का प्रतीक है—हमें भी अपनी पहचान को ईश्वर की दृष्टि से देखने और उसके अनुरूप जीवन जीने के लिए प्रेरित करता है।