Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 1:1 यूहन्ना 1:2 यूहन्ना 1:3 यूहन्ना 1:4 यूहन्ना 1:5 यूहन्ना 1:6 यूहन्ना 1:7 यूहन्ना 1:8 यूहन्ना 1:9 यूहन्ना 1:10 यूहन्ना 1:11 यूहन्ना 1:12 यूहन्ना 1:13 यूहन्ना 1:14 यूहन्ना 1:15 यूहन्ना 1:16 यूहन्ना 1:17 यूहन्ना 1:18 यूहन्ना 1:19 यूहन्ना 1:20 यूहन्ना 1:21 यूहन्ना 1:22 यूहन्ना 1:23 यूहन्ना 1:24 यूहन्ना 1:25 यूहन्ना 1:26 यूहन्ना 1:27 यूहन्ना 1:28 यूहन्ना 1:29 यूहन्ना 1:30 यूहन्ना 1:31 यूहन्ना 1:32 यूहन्ना 1:33 यूहन्ना 1:34 यूहन्ना 1:35 यूहन्ना 1:36 यूहन्ना 1:37 यूहन्ना 1:38 यूहन्ना 1:39 यूहन्ना 1:40 यूहन्ना 1:41 यूहन्ना 1:42 यूहन्ना 1:43 यूहन्ना 1:44 यूहन्ना 1:45 यूहन्ना 1:46 यूहन्ना 1:47 यूहन्ना 1:48 यूहन्ना 1:49 यूहन्ना 1:50 यूहन्ना 1:51



यूहन्ना 1:40 पर टिप्पणी — अन्द्रियास का चयन और उद्देश्य का आरंभ
यह वचन दर्शाता है कि ईसा मसीह के पहला प्रचार-चयन कैसे घटित होता है। यूहन्ना के प्रेरित पवित्र सहकर्मियों में से दो लोग, जिन्हें यूहन्ना ने पहचाना, यीशु के पीछे हो लिए—उनमें से एक था अन्द्रियास, शमौन पतरस का भाई। यह छोटा विवरण दिखाता है कि दयालु योजना के अनुरूप लोग कैसे बुलाए जाते हैं और कैसे वे प्रभु के साथ अपने कदम मिलाते हैं।
पार्श्वभूमि और मूल पाठ का संदर्भ
यूहन्ना के शुभारम्भ खण्ड में यह घटना ज्यों की त्यों है कि दो लोगों के निजी निर्णय से यीशु के सार्वजनिक मंत्रालय का एक नया चरण शुरू होता है। प्रेरक बात यह है कि अन्द्रियास, जो पहले से यूहन्ना के चेलों में से एक था, यीशु को देखकर उनके संदेश के अनुरोध पर आगे बढ़ता है और तुरंत उसने अपने भाई पतरस को बुलाने की संकल्पना समर्थित की। यह एक सामंजस्यपूर्ण आरम्भ है—प्रत्यक्ष पेशकश, त्वरित श्रद्धा और फिर परिवार के सदस्य के प्रति उत्तरदायित्व।
मुख्य संदेश और थेमेटिक गहराई
- बुलावा और स्वीकृति: उद्धारकर्ता के व्यक्तित्व का उद्घाटन होते ही अन्द्रियास ने यीशु को पहचाना और उनके पीछे चलना चुना। यह स्पष्ट करता है कि ज्ञान और विश्वास का सही परिणाम हमारे कदमों का परिवर्तन है।
- परिवार और समुदाय का आरम्भ: अन्द्रियास पवित्र समाज की पहली संरचना बनते हैं—अपने भाई पतरस को भी बुलाते हैं। यह दर्शाता है कि संकल्पनाओं के साथ साझा विश्वास परिवार रूप ले सकता है।
- यौगिक योजना का भाग बनना: न केवल व्यक्तिगत विश्वास, बल्कि समुदायिक मार्गदर्शन के लिए चुना जाना—यह गवाही देता है कि उद्धार की योजना सामाजिक रूप से भी प्रसारित होती है।
धर्मशास्त्रीय सहारा (पूर्व विद्वानों के संकेत)
यहाँ संख्यात्मक दृश्य बताता है कि कैसे नई प्रेषणा एक-दूसरे के साथ जुड़ती है। अन्य टिप्पणियों में यह माना गया है कि अन्द्रियास और पतरस दोनों को Jesus ने उसी पल बुलाया था जब यूहन्ना ने यीशु को “ईश्वर का मेहमान” कहा। इस क्रम में प्रेरित-चयन की सहजता और विश्वास की शीघ्रता बारम्बार उभरती है।
क्रॉस-रेफरेंसेज (संकेतित विचार)
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि बुलावा एक निरंतर प्रवाह है जिसमें लोग नयी दिशा ग्रहण करते हैं और अपने घर-परिवार तक इसे पहुँचाते हैं।
देवotional अभिप्रेरणा
हम भी अन्द्रियास जैसे छोटे-छोटे निर्णयों से प्रभु के साथ अपने कदम मिलाते हैं। कभी-कभी जीवन की सामान्य गतिविधियाँ—घरों के बीच, भाइयों के बीच—यीशु के अनुयाय बनने की पहली पंक्ति बन सकती हैं। अपने आंतरिक बुलावे को पहचानना और उसे तुरंत गति देना, विश्वास की सहज और सक्रिय कार्रवाई का उदाहरण है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यूहन्ना 1:40 यह स्मरण कराता है कि बुलावा व्यक्तिगत है, पर उसका प्रभाव परिवार और समुदाय तक फैलता है। अन्द्रियास के चयन के साथ यीशु का सार्वजनिक प्रभाव स्थिर पनपता है, और यह उद्घाटन बताता है कि उद्धार का दल जैसा-जैसा बढ़ता है, वैसा ही यहूदियों के समुदाय में आशा और परिवर्तन की चिंगारी बनती है।
कुटुम्बित क्रॉस-रेफरेंस के साथ तात्पर्य
यूहन्ना 1:40 बताता है कि शिष्यत्व का आरम्भ एक सरल, सत्य-आधारित निर्णय है—चलो, हम साथ चलते हैं। यह विचार दाऊद के समय के विश्वासियों के साथ-साथ सार्वजनिक सेवा के लिए बुलाहट की दिशा भी देता है।
उद्धरण नोट: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke से इस पाठ के विश्लेषण के कुछ उल्लेखनीय विचार ऐसे हैं जो इस commentary के भीतर समाहित हैं।