Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 1:1 यूहन्ना 1:2 यूहन्ना 1:3 यूहन्ना 1:4 यूहन्ना 1:5 यूहन्ना 1:6 यूहन्ना 1:7 यूहन्ना 1:8 यूहन्ना 1:9 यूहन्ना 1:10 यूहन्ना 1:11 यूहन्ना 1:12 यूहन्ना 1:13 यूहन्ना 1:14 यूहन्ना 1:15 यूहन्ना 1:16 यूहन्ना 1:17 यूहन्ना 1:18 यूहन्ना 1:19 यूहन्ना 1:20 यूहन्ना 1:21 यूहन्ना 1:22 यूहन्ना 1:23 यूहन्ना 1:24 यूहन्ना 1:25 यूहन्ना 1:26 यूहन्ना 1:27 यूहन्ना 1:28 यूहन्ना 1:29 यूहन्ना 1:30 यूहन्ना 1:31 यूहन्ना 1:32 यूहन्ना 1:33 यूहन्ना 1:34 यूहन्ना 1:35 यूहन्ना 1:36 यूहन्ना 1:37 यूहन्ना 1:38 यूहन्ना 1:39 यूहन्ना 1:40 यूहन्ना 1:41 यूहन्ना 1:42 यूहन्ना 1:43 यूहन्ना 1:44 यूहन्ना 1:45 यूहन्ना 1:46 यूहन्ना 1:47 यूहन्ना 1:48 यूहन्ना 1:49 यूहन्ना 1:50 यूहन्ना 1:51



यूहन्ना 1:21 पर टिप्पणी: एलिय्याह या भविष्यद्वक्ता कौन?
यह वांछित पाठ यूहन्ना के पहले अध्याय में एक छोटा, पर गहरा पल है जहाँ यहूदी अधिकारियों ने ईसा मसीह से नहीं, बल्कि उनके परिचय के पीछे की प्राथमिक सच्चाई को पूछना शुरू कर दिया था। यहाँ प्रस्तुत सवाल बताते हैं कि मसीह के साथ परिचय और पहचान की मांग मानव मन के भीतर क्यों उठती है—क्या वह एलिय्याह है, क्या वह भविष्यद्वक्ता है, या कुछ और? यीशु ने स्पष्ट संकेत दिया कि उनका उद्देश्य इन पारंपरिक पदों से ऊपर है और वे प्रभु के उद्देश्य के अनुसार एक अलग भूमिका निभाते हैं।
पाठ का संक्षिप्त पठन
पाठ कहता है: वहाँ उपस्थित लोग उससे पूछते हैं कि क्या वह एलिय्याह है या भविष्यद्वक्ता है, और यीशु शरीरिक रूप से इन दोनों बातों से इनकार करते हैं। उनका तात्पर्य यह नहीं कि एलिय्याह या वैध भविष्यवक्ता प्रकट नहीं होते, बल्कि वे कहते हैं कि वह स्वयं उन्हें नहीं बताए जाते कि वह किसी एक पूर्व निर्धारित पद पर है; उनका क्रिया-कलाप और पुष्टि परमेश्वर द्वारा निर्धारित है।
प्रमुख आध्यात्मिक पाठ
इस verse के भीतर तीन प्रमुख विचार उभरते हैं:
अन्य पवित्र ग्रंथों से संगति (cross-reference)
युवक अध्यायों में से मिलती-जुलती चिंतन-रेखाएं देखें:
यहाँ मिसाल के तौर पर उद्धरण के रूप में, Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से सशक्त सार-सार विचार उपलब्ध हैं, परन्तु पाठ के मूल संदेश को बिना दोहराये निष्कर्षित किया गया है।
मौलिक पाठ से सीखा गया निष्कर्ष
पहचान, चाहे वह एलिय्याह हो या भविष्यद्वक्ता, बाहरी वर्गीकरण का परिणाम नहीं देता। जो कर्म, ध्येय और उद्धार-कार्य से दिखाई देता है वह अधिकार रखता है। यीशु स्पष्ट करते हैं कि उनके मिशन के केंद्र में परमेश्वर की योजना है, और वे उसी योजना के अनुसार ईश्वर की तरफ़ से भेजे गए हैं।
जीवन पर लागू निर्देश
संक्षिप्त सार
यूहन्ना 1:21 में अधिकारियों की पहचान की जिज्ञासा यीशु के मिशन की गहराई को उद्घाटित करती है—हाँ, लोग एलिय्याह या भविष्यद्वक्ता चाहते हैं, पर यीशु अपने दायित्व को दिखाते हैं कि ईश्वर की उद्धार-योजना में उनका स्थान क्या है। इसके माध्यम से मानव जाति को यह संदेश मिलता है कि खरे प्रमाण और आत्म-समर्पण से ही पहचान मिलती है, न कि भौतिक पदों या नामों से।