Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 1:1 यूहन्ना 1:2 यूहन्ना 1:3 यूहन्ना 1:4 यूहन्ना 1:5 यूहन्ना 1:6 यूहन्ना 1:7 यूहन्ना 1:8 यूहन्ना 1:9 यूहन्ना 1:10 यूहन्ना 1:11 यूहन्ना 1:12 यूहन्ना 1:13 यूहन्ना 1:14 यूहन्ना 1:15 यूहन्ना 1:16 यूहन्ना 1:17 यूहन्ना 1:18 यूहन्ना 1:19 यूहन्ना 1:20 यूहन्ना 1:21 यूहन्ना 1:22 यूहन्ना 1:23 यूहन्ना 1:24 यूहन्ना 1:25 यूहन्ना 1:26 यूहन्ना 1:27 यूहन्ना 1:28 यूहन्ना 1:29 यूहन्ना 1:30 यूहन्ना 1:31 यूहन्ना 1:32 यूहन्ना 1:33 यूहन्ना 1:34 यूहन्ना 1:35 यूहन्ना 1:36 यूहन्ना 1:37 यूहन्ना 1:38 यूहन्ना 1:39 यूहन्ना 1:40 यूहन्ना 1:41 यूहन्ना 1:42 यूहन्ना 1:43 यूहन्ना 1:44 यूहन्ना 1:45 यूहन्ना 1:46 यूहन्ना 1:47 यूहन्ना 1:48 यूहन्ना 1:49 यूहन्ना 1:50 यूहन्ना 1:51



यूहन्ना 1:26 का पाठ — संदर्भ और अर्थ
यूहन्ना 1:26 में यूहन्ना बपतिस्माकी ने लोगों से कहा कि वे जल से बपतिस्मा देता है, पर उनके बीच एक अवश्य आ रहा है जो उनके सामने है, जिसे वे नहीं जानते। यह उद्धारकर्ता के आगमन के संकेत के साथ जुड़ा है कि परमेश्वर के राज्य के लिए तैयारी करनी है, परंतु यह पहचानने की बात है कि वह कौन है। यूहन्ना का उद्देश्य यह दर्शाना है कि उनकी घोषणा एक पूर्व-घोषणा है, जबकि मसीह का परिचय अभी-अभी प्रकट नहीं हुआ है; लोगों के लिए यह एक चेतावनी और आश्वासन दोनों है कि परमेश्वर का राज एक नये ढंग से क्रियाशील होगा।
मुख्य विचार
इस वचन का केंद्रीय अर्थ यह है कि बपतिस्मा प्रभावी नहीं जब तक वह वास्तविक आत्मिक परिवर्तन के साथ न हो; यीशु स्वयं आते हैं, और वह उनका परिचय नहीं देता कि वे कौन हैं, यह पूर्व-जानकारी से संकेत देता है कि परमेश्वर की योजना साथ-साथ चलती है और मनुष्य की चेतना की नवीनता से खेलती है। यूहन्ना यह स्पष्ट कर रहा है कि वह केवल प्रतीक-कार्य कर रहा है; परन्तु जिस प्रभु के आने की तैयारी वह कर रहा है, वह स्वयं प्रकट होकर लोगों के साथ एक नया सम्बन्ध बनाते हैं।
दो प्रमुख विषय
संबद्ध पाठ (cross-references)
- मत्ती 3:11: बपतिस्मा के प्रतीक के साथ सत्य धर्मी का प्रभाव बताता है कि मसीह के आगमन से वास्तविक परिवर्तन कैसे आता है।
- यूहन्ना 1:29-31: मसीह के आगमन के समय विश्वासियों के लिए प्रत्यक्ष गवाही और पहचान का बढ़ना।
- मत्त 11:3-5: मसीह के प्रतीकात्मक कार्यों के पीछे वास्तविक उद्धार की पहचान का खुलना।
व्यावहारिक विचार
हम कैसे उत्तर दें: जो लोग आत्मिक दृष्टि खोल कर देखते हैं वे जानते हैं कि परमेश्वर का कार्य हमारी सूझ-बूझ से परे है। यदि आप वर्तमान में केवल धार्मिक प्रतीकों में फंसे हों, तो यह समय है कि आप यीशु के साथ एक सच्चे रिश्ते की खोज करें—ताकि जल से बपतिस्मा का प्रतीक वास्तविक जीवन में परिणत हो सके।
छोटी निचोड़
यूहन्ना 1:26 में बपतिस्मा देने वाला एक प्रतीक-कार्य है, परन्तु जिनके बीच में मसीह खड़े हैं, वे वही हैं जिनके ऊपर परमेश्वर की योजना स्पष्ट रूप से चलती है। सही पहचान और भय-युक्त विश्वास हमें एक नये जीवन की ओर ले जाते हैं।
निष्कर्ष
इस verse के माध्यम से प्रेरक संदेश यह है कि परमेश्वर का राज्य धीरे-धीरे प्रकट होता है, और हमारी आत्मा की दृष्टि वही दिशा पाती है जो मसीह के आगमन और उनके प्रभाव को पहचान ले। भगवान की योजना में हमारा भागीदारी तभी संभव है जब 우리는 खुले दिल से यीशु को पहचानें और उनके साथ नये जीवन की शुरुआत करें।
महत्वपूर्ण उद्धरण (A. Barnes/Adam Clarke/M. Henry) के शाब्दिक अंश: अगर उपलब्ध हों, तो प्रकाशन के लिए नीचे दिए गए नामों के भीतर संक्षेप उद्धरण केवल वही होंगे जिन्हें पाठ-ग्रन्थ से उद्धृत किया गया है।