Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
यूहन्ना 1:1 यूहन्ना 1:2 यूहन्ना 1:3 यूहन्ना 1:4 यूहन्ना 1:5 यूहन्ना 1:6 यूहन्ना 1:7 यूहन्ना 1:8 यूहन्ना 1:9 यूहन्ना 1:10 यूहन्ना 1:11 यूहन्ना 1:12 यूहन्ना 1:13 यूहन्ना 1:14 यूहन्ना 1:15 यूहन्ना 1:16 यूहन्ना 1:17 यूहन्ना 1:18 यूहन्ना 1:19 यूहन्ना 1:20 यूहन्ना 1:21 यूहन्ना 1:22 यूहन्ना 1:23 यूहन्ना 1:24 यूहन्ना 1:25 यूहन्ना 1:26 यूहन्ना 1:27 यूहन्ना 1:28 यूहन्ना 1:29 यूहन्ना 1:30 यूहन्ना 1:31 यूहन्ना 1:32 यूहन्ना 1:33 यूहन्ना 1:34 यूहन्ना 1:35 यूहन्ना 1:36 यूहन्ना 1:37 यूहन्ना 1:38 यूहन्ना 1:39 यूहन्ना 1:40 यूहन्ना 1:41 यूहन्ना 1:42 यूहन्ना 1:43 यूहन्ना 1:44 यूहन्ना 1:45 यूहन्ना 1:46 यूहन्ना 1:47 यूहन्ना 1:48 यूहन्ना 1:49 यूहन्ना 1:50 यूहन्ना 1:51



मुख्य व्याख्यात्मक बिंदु
यूहन्ना 1:15 में यूहन्ना दूत बताता है कि ईसा मसीह से पहलेला जन्म नहीं हुआ; वह जो मुझसे बाद आ रहा है, वह मुझसे बढ़कर है, क्योंकि वह मुझसे पहले था। यह पाठ स्पष्ट करता है कि यूहन्ना थे जन्म से प्रेरित प्रेरक नहीं, बल्कि मसीह के अवतरण से पहले ही उनकी भूमिका और ईमानदार गवाही थी। यह उद्धोषन मसीह के दिव्य प्राकृत अस्तित्व और उनकी उच्च स्थिति को उजागर करता है।
साहित्यिक संदर्भ
यह वाक्य यूहन्ना के गवाही के संदर्भ में है, जो यीशु के सामने आता है और उसका परिचय देता है। नीतिगत रूप से, यूहन्ना का लक्ष्य दो बातें स्पष्ट करना है: (1) मसीह का पहला अस्तित्व और महिमा; (2) यूहन्ना स्वयं एक दूत के रूप में यहूदियों को यीशु के महिमाओं के लिए प्रेरित करना। यह कथन जॉन के गोपनीय अनुभवों और प्रेरितों के साथ उसके संबंध को भी दर्शाता है—कि वह उसके पीछे न होकर उसके नीचे है, और मसीह से पहले था।
आध्यात्मिक महत्व
यह वाक्य परमेश्वर के योजनाबद्ध समयरेखा और प्रभु यीशु की दिव्य श्रेष्ठता पर जोर देता है। यह बतलाता है कि मसीह अतीत में भी अस्तित्वमान थे और मानव इतिहास के आरम्भ से ही ईश्वर की योजना में भूमिका निभाते आए हैं। विश्वासियों के लिए इसका आश्वासन है कि मसीह हमारे पूर्वगामी के समान नहीं, बल्कि हमारे उद्धारकर्ता हैं, जिनकी महिमा और स्थिति सर्वोपरि है।
पवित्र लेखन के साथ संबंध
- यूहन्ना 1:1-3 में ईश्वर के वचन का दिव्य प्राकृत अस्तित्व; - मीका 5:2 के संदर्भ में वे के साथ जन्म लेने की भविष्यवाणी; - कोलुसियों 1:15-17 में मसीह की सृष्टि के ऊपर और उसके प्रत्यक्ष प्रभुत्व का उल्लेख।
संक्षेप में, यह कथन मसीह के महिमामय अस्तित्व को स्थापित करता है और यूहन्ना के गवाही की सच्चाई को पुष्ट करता है कि यीशु मसीह वह है जिसे स्वयं निर्गत हुआ था।
पुनर्विचार के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
यूहन्ना 1:15 के द्वारा हमें यह स्मरण कराया जाता है कि मसीह पहले मौजूद थे और अब हमारे साथ हैं—उनके बारे में हमारी गवाही मसीह की महानता के वर्णन के बिना अधूरी नहीं हो सकती। यूहन्ना की भूमिका एक दूत के रूप में स्पष्ट है: उसे मसीह से बढ़कर कुछ भी नहीं कहा जा सकता, क्योंकि वह प्रभु के समान नहीं, बल्कि प्रभु के मिशन के लिए मार्गदर्शक है।
Cross-reference संक्षेप
1) योहन्ना 1:1-3 — वचन का दिव्य अस्तित्व और सृजन; 2) कोलुसियों 1:15-17 — मसीह की सृजनात्मक और अति-स्थिति; 3) मीका 5:2 — विशुद्घ जन्मस्थल की पूर्व-पत्रिका।
व्याख्या मेंThese cross-references यह दिखाते हैं कि यीशु का अस्तित्व, महिमा और निर्णायक भूमिका पुरातन परमेश्वर के योजनाबद्ध कार्य से जुड़ा हुआ है।
नोट: नीचे दिए गए शब्दाधार और उद्धरण, यदि उपलब्ध हों, तो मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स या एडम क्लार्क के खुले पाठ के भीतर मिलते हैं।