Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 15:1 1 राजाओं 15:2 1 राजाओं 15:3 1 राजाओं 15:4 1 राजाओं 15:5 1 राजाओं 15:6 1 राजाओं 15:7 1 राजाओं 15:8 1 राजाओं 15:9 1 राजाओं 15:10 1 राजाओं 15:11 1 राजाओं 15:12 1 राजाओं 15:13 1 राजाओं 15:14 1 राजाओं 15:15 1 राजाओं 15:16 1 राजाओं 15:17 1 राजाओं 15:18 1 राजाओं 15:19 1 राजाओं 15:20 1 राजाओं 15:21 1 राजाओं 15:22 1 राजाओं 15:23 1 राजाओं 15:24 1 राजाओं 15:25 1 राजाओं 15:26 1 राजाओं 15:27 1 राजाओं 15:28 1 राजाओं 15:29 1 राजाओं 15:30 1 राजाओं 15:31 1 राजाओं 15:32 1 राजाओं 15:33 1 राजाओं 15:34



1 राजाों 15:24 पर आधारित टिप्पणी (HINIRV)
पद का संकलन और संदर्भ में यह पंक्ति राजा आसा की मृत्यु के समय के क्षणों को दर्शाती है। आसा ने अपनी देह laid to rest among उनके पुरखाओं के साथ दाऊद के नगर में मिट्टी दी गई—यानी उसे पुरखों के कब्रगाह के निकट स्थान दिया गया—और उसके पुत्र यहोशापात ने उसके बाद राज्य संभाला। यह दृश्य एक हस्तांतरण के रूप में समझाते है: एक राजा के निधन के बाद राजगति की निरंतरता और विरासत का अदला-बदली।
मुख्य विचार
इस पद से तीन प्रमुख विचार उभरते हैं: भविष्य की आशा बनाम व्यक्तिगत निधन, परिवारिक सत्ता का स्थानांतरण, और परमेश्वर की योजना में राष्ट्र की निरंतरता। आसा का जीवन एक सिद्धांत देता है कि परमेश्वर के लिए निष्ठा रखने वाले राजाओं की समय–समाप्ति भी एक मानवीय सत्य है, पर उनकी चाल से परमेश्वर की योजना क्रमबद्ध चलती है।
मुख্য विषय
अनुक्रमण/संदर्भित पाठ
– 1 राजा 14–15 के समष्टि संदर्भ में आसा की शांति और अंत का चित्रण मिलता है; यहोशापात के शासन का उद्घाटन इसी संदेश के साथ जुड़ता है।
– अभिलक्षण: परमेश्वर के साथ विश्वास और उसके चक्र में शासनकर्ताओं की भूमिका का पुनः स्मरण।
क्रॉस-रेफरेंसेस एवं संक्षिप्त स्पष्टीकरण
व्यावहारिक चिंतन
हमारे जीवन–दौड़ में भी विरासत और स्मृति कितनी प्रमुख हैं? नेतृत्व के परिवर्तन के समय धीरज और आस्था बनाए रखना चाहिए ताकि परिवार और समुदाय स्पष्ट मार्ग पर चलते रहें। यह भी याद रखें कि व्यक्तिगत अंत जीवन के पूर्णता का संकेत है, पर परमेश्वर की योजना राष्ट्र की निरंतरता को बनाए रखती है।
संक्षिप्त समरी
आसा की मृत्यु और यहोशापात के प्रवेश से यह स्पष्ट होता है कि राजधर्म और पारिवारिक विरासत इतिहास के चक्र को आगे बढ़ाते हैं। दाऊद के नगर की मिट्टी से जुड़े संस्कार यह दर्शाते हैं कि वर्षो–पुरानी परंपराएं और पिता–पुत्र के संबंध राष्ट्र की एकता की धुरी हैं।
नोट: इस पंक्ति में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सीधे संकलित उद्धरण नहीं हैं; अतः लिप्यंतरण में उनके विचारों के संक्षिप्त सार को स्थानीय रूप से समाहित किया गया है।