Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 15:1 1 राजाओं 15:2 1 राजाओं 15:3 1 राजाओं 15:4 1 राजाओं 15:5 1 राजाओं 15:6 1 राजाओं 15:7 1 राजाओं 15:8 1 राजाओं 15:9 1 राजाओं 15:10 1 राजाओं 15:11 1 राजाओं 15:12 1 राजाओं 15:13 1 राजाओं 15:14 1 राजाओं 15:15 1 राजाओं 15:16 1 राजाओं 15:17 1 राजाओं 15:18 1 राजाओं 15:19 1 राजाओं 15:20 1 राजाओं 15:21 1 राजाओं 15:22 1 राजाओं 15:23 1 राजाओं 15:24 1 राजाओं 15:25 1 राजाओं 15:26 1 राजाओं 15:27 1 राजाओं 15:28 1 राजाओं 15:29 1 राजाओं 15:30 1 राजाओं 15:31 1 राजाओं 15:32 1 राजाओं 15:33 1 राजाओं 15:34



वाक्य का सीधा अर्थ
यह वाक्य बताता है कि यारोबाम ने अपने पापों के कारण इस्राएल के लिए परमेश्वर यहोवा को क्रोधित किया और उसी से परिणत होकर राज्य के साथ साथ समाजगत उलटफेर आया।
पृष्ठभूमि संक्षेप
1 राजा 12-14 के पाठ में यारोबाम का उदय, उसका विभाजन-राज बनना और उसके आगे के पाप का क्रम आता है। यारोबाम ने यहूदाह में राज करने के बजाय इस्राएल के उत्तर के हिस्से पर शासन किया, परन्तु उसकी नीतियाँ और आराधनाओं ने ईश्वर के हृदय को दुखाया। यह्रि यह क्रूरतापूर्ण पाप यहोवा के विरुद्ध था और इस्राएल को बहुमुखी नुकसान पहुँचा।
व्याख्या के मुख्य बिंदु
संदर्भगत विचार
हीनिर्व (HINIRV) अनुमानित अनुवाद के अनुसार यह पंक्ति बताती है कि यारोबाम ने अपने पापों के कारण इस्राएल के परमेश्वर को क्रोधित किया।
छोटी थीम-सूची
अनुसंधान योग्य क्रॉस-रेफरेंसेस
1) प्रेरित-उद्धार और विरक्ति के संदर्भ: यहोवा की आज्ञाओं के उल्लंघन पर दंड का सिद्धांत समझाता है। यह दर्शाता है कि परमेश्वर न केवल दंड देता है बल्कि पथ सुधार के अवसर भी देता है।
2) राजाओं में पुत्र-उत्पत्ति और सामाजिक श्रद्धा: राजा-प्रवृत्ति के कारण समाज के धार्मिक ढाँचे पर प्रभाव पड़ता है; पूजा-स्थलों में बदलाव राज्य के आंतरिक विश्वास की दिशा तय करते हैं।
3) शांति और विघटन के बीच संतुलन: ईश्वर की चीत्कार से यह स्पष्ट होता है कि सामाजिक व्यवस्था कितनी संवेदनशील होती है और पाप के कारण उसे कितनी बड़ी चोट पहुँचती है।
संक्षिप्त prakritik takeaway
यारोबाम का पाप केवल व्यक्तिगत नहीं रहा; यह इस्राएल की धार्मिक-आचार-नीति को चोट पहुँचाने वाला था। नीचे से ऊपर तक, सभी भागों को सचेत करना और उद्धार के लिए मार्ग देना परमेश्वर की इच्छा है। अपने जीवन में भी नीतिगत तथा धार्मिक निर्णयों में ईश्वर के निर्देश को प्राथमिकता दें; राजनीतिक या सामाजिक लाभ के बावजूद परमेश्वर के साथ सत्यनाथ रहने से ही समुदाय संरक्षित रहता है।
डायरेक्शनल नोट: इस पाठ से प्रेरित एक सतर्क प्रश्न-चिन्ह बनाएं—हम अपने जीवन में किन-किन नीतियों में ईश्वर की आज्ञा के विरुद्ध कदम उठाते हैं, और कौन सी बातें हमें उद्धार के मार्ग पर वापस ले आती हैं?