Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 15:1 1 राजाओं 15:2 1 राजाओं 15:3 1 राजाओं 15:4 1 राजाओं 15:5 1 राजाओं 15:6 1 राजाओं 15:7 1 राजाओं 15:8 1 राजाओं 15:9 1 राजाओं 15:10 1 राजाओं 15:11 1 राजाओं 15:12 1 राजाओं 15:13 1 राजाओं 15:14 1 राजाओं 15:15 1 राजाओं 15:16 1 राजाओं 15:17 1 राजाओं 15:18 1 राजाओं 15:19 1 राजाओं 15:20 1 राजाओं 15:21 1 राजाओं 15:22 1 राजाओं 15:23 1 राजाओं 15:24 1 राजाओं 15:25 1 राजाओं 15:26 1 राजाओं 15:27 1 राजाओं 15:28 1 राजाओं 15:29 1 राजाओं 15:30 1 राजाओं 15:31 1 राजाओं 15:32 1 राजाओं 15:33 1 राजाओं 15:34

संदर्भ और संक्षिप्त व्याख्या
1 राजाओं 15:33 में बताया गया है कि जब यहूदा के राजा आसा के शासन का तीसरा वर्ष था, तब अहिय्याह के पुत्र बाशा ने तिर्सा से समस्त इस्राएल पर राज्य शुरू किया और चौबीस वर्ष तक शासन किया। यह पदुका-रेखा उत्तर और दक्षिण राज्य के समकालीन राजाओं के सम्वन्ध तथा साम्राज्य के राजनीतिक उतार-चढ़ाव का एक संकेत है। यह श्लोक साम्राज्यों की समकालीनता और भविष्य की घटनाओं की पृष्ठभूमि घोषित करता है।
मुख्य अर्थ
श्लोक का मुख्य उद्देश्य ऐतिहासिक समय-निर्धारण करना और यह बताना है कि बाशा कब और कहाँ से राज-कार्य आरम्भ कर रहा था। "अहिय्याह का पुत्र" वाक्य बाशा की वंशानुक्रम या पहचान बताता है, और "तिर्सा में" स्थानगत राजधानी का संकेत है, जो उत्तरी राज्य इस्राएल की राजधानी थी। चौबीस वर्ष का राज्यावधि बाशा की राजनीतिक स्थिरता और प्रभाव का प्रमाण है।
प्रमुख विषय
संबंधित शास्त्रीय संदर्भ
यह पंक्ति अन्य स्थानों से जुड़ती है जहाँ उत्तरी और दक्षिणी राजाओं का समानांतर वर्णन मिलता है:
व्यावहारिक चिंतन
यह श्लोक हमें सिखाता है कि इतिहास में समय और स्थान के छोटे-छोटे विवरण भी भविष्य की घटनाओं की समझ के लिए आवश्यक हैं। व्यक्तिगत और सामुदायिक जीवन में भी हमें घटनाओं के क्रम और संदर्भ को समझकर निर्णय लेने चाहिए। साथ ही यह याद दिलाता है कि शासन की स्थिरता और प्रभाव स्थायी नहीं होते; जिम्मेदारी और सतर्कता आवश्यक है।
स्रोत विचार और संक्षेप
जनरल टिप्पणीकारों का रुख सामान्यतः ऐतिहासिक-व्याख्यात्मक रहा है। मैथ्यू हेनरी लिखते हैं कि ऐसी पंक्तियाँ "इतिहास के प्रमाण-पत्र" का काम करती हैं (संक्षिप्त उद्धरण)। अल्बर्ट बार्न्स इस तरह के समय-निर्धारण को वर्णनात्मक तथ्य बताकर पाठ को सुसंगत रहने में सहायक मानते हैं। एडम क्लार्क का ध्यान अनुक्रम और पारिवारिक पहचान पर रहता है।
समाप्ति में, 1 राजाओं 15:33 इतिहास के उस बिंदु को चिन्हित करता है जब बाशा ने उत्तरी इस्राएल पर शासन आरम्भ किया—एक ऐतिहासिक सूचनापरक वाक्य जो आगे की घटनाओं के लिए पृष्ठभूमि प्रदान करता है और यह याद दिलाता है कि राजा, स्थान और अवधि—ये तीनों मिलकर किसी शासन के चरित्र और प्रभाव को समझने के लिए आवश्यक हैं।