Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
1 राजाओं 15:1 1 राजाओं 15:2 1 राजाओं 15:3 1 राजाओं 15:4 1 राजाओं 15:5 1 राजाओं 15:6 1 राजाओं 15:7 1 राजाओं 15:8 1 राजाओं 15:9 1 राजाओं 15:10 1 राजाओं 15:11 1 राजाओं 15:12 1 राजाओं 15:13 1 राजाओं 15:14 1 राजाओं 15:15 1 राजाओं 15:16 1 राजाओं 15:17 1 राजाओं 15:18 1 राजाओं 15:19 1 राजाओं 15:20 1 राजाओं 15:21 1 राजाओं 15:22 1 राजाओं 15:23 1 राजाओं 15:24 1 राजाओं 15:25 1 राजाओं 15:26 1 राजाओं 15:27 1 राजाओं 15:28 1 राजाओं 15:29 1 राजाओं 15:30 1 राजाओं 15:31 1 राजाओं 15:32 1 राजाओं 15:33 1 राजाओं 15:34



अर्थ का सीधे संकेत और प्रसंग
1 राजा 15:29 में कहा गया है कि राजा बाशा ने यरूशलेम के यारोबाम के समस्त परिवार को मार डाला, यहाँ तक कि एक भी जीवित न बचा। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि यहोवा ने शीलोवासी अहिय्याह के द्वारा अपने दास से कही गई बात के अनुसार किया। सरल शब्दों में: राजा बनने पर बाशा ने रक्तपात करके यारोबाम के वंश को पूरी तरह समाप्त कर दिया और यह सब ईश्वर के निर्देशित वचन के अनुसार घटित हुआ।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यारोबाम वह किंग थे—इस्राइल के उत्तर विभाग के प्रमुख राजा—जिन्होंने दाऊद के वंश से अलग एक नयी राजधानी और पक्षपातपूर्ण शासन草 का आरम्भ किया था। इतिहास के अनुसार, उनके वंश के साथ जुड़ी सत्ता-चैतन्यता अक्सर उत्तर-राज्य में असंतोष, युद्ध और आंतरिक टकरावों से भरी रही। इसी क्रम में बाशा, जो बिशप-हेरिटेज नहीं, बल्कि यहूदा का राजा था, ने अपने अधीन छत्रछाया स्थापित करते समय यारोबाम के वंश पर निर्णायक हमला किया।
interpretive observations
संक्षिप्त थीमेटिक सूची
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनके संक्षिप्त अर्थ
1) 1 राजाओं 14:14–16 — यह बताता है कि अहिय्याह से कहा गया वचन किस प्रकार पूरे हुआ और उत्तर-राज्य के कुटुम्ब का भाग्य परिवर्तन हुआ।
2) 2 शमूएल 7:14–15 — परमेश्वर की वचनशीलता और दास की बातें कैसे संरक्षण पाती हैं; नीतियों का परिणाम।
3) भजन 105:8–11 — परमेश्वर की वचन के प्रति स्थिरता और पीढ़ीयों तक चलना—वचनों का स्थायित्व।
प्रायोगिक takeaway
हम देखते हैं कि ईश्वर की वाणी पर चलना जीवन के निर्णयों के परिणाम निर्धारित कर सकता है। जब परमेश्वर का वचन स्पष्ट होता है, तब सत्ता-तत्व और मानवीय निर्णय उसे पूरा करने की दिशा में चलते हैं। यह कहानी यह सीख देती है कि विश्वसनीयता और निष्ठा में शासन-व्यवस्था ultimately एक दिव्य योजना के साथ जुड़ती है, भले ही उसका निकास कठोर क्यों न हो।
यहाँ में दो-तीन उद्धरण केवल संदर्भ के लिए बताए जाते हैं, ताकि पाठक मूल वक्तव्य से अवगत रहें:
मैथ्यू हेनरी की टिप्पणी से नซีद्ध उद्धरण: “...the fate of the house of Jeroboam was fixed by the word of the Lord, which the prophet spoke.”
एल्बर्ट बार्न्स की टिप्पणी से निष्कर्ष: “God’s purposes prevail, even where human hands seek to thwart them.”
एडम क्लार्क की टिप्पणी से संकेत: “The execution of the sentence shews the righteousness of God in judgment.”
सूचीबद्ध उद्धरणों के संभावित सन्दर्भ सीधे पाठ से संदर्भित हैं; पूर्ण पदों के पाठों को यहाँ नहीं रखा गया है।