Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
1 शमूएल 1 1 शमूएल 2 1 शमूएल 3 1 शमूएल 4 1 शमूएल 5 1 शमूएल 6 1 शमूएल 7 1 शमूएल 8 1 शमूएल 9 1 शमूएल 10 1 शमूएल 11 1 शमूएल 12 1 शमूएल 13 1 शमूएल 14 1 शमूएल 15 1 शमूएल 16 1 शमूएल 17 1 शमूएल 18 1 शमूएल 19 1 शमूएल 20 1 शमूएल 21 1 शमूएल 22 1 शमूएल 23 1 शमूएल 24 1 शमूएल 25 1 शमूएल 26 1 शमूएल 27 1 शमूएल 28 1 शमूएल 29 1 शमूएल 30 1 शमूएल 31Verse
1 शमूएल 19:1 1 शमूएल 19:2 1 शमूएल 19:3 1 शमूएल 19:4 1 शमूएल 19:5 1 शमूएल 19:6 1 शमूएल 19:7 1 शमूएल 19:8 1 शमूएल 19:9 1 शमूएल 19:10 1 शमूएल 19:11 1 शमूएल 19:12 1 शमूएल 19:13 1 शमूएल 19:14 1 शमूएल 19:15 1 शमूएल 19:16 1 शमूएल 19:17 1 शमूएल 19:18 1 शमूएल 19:19 1 शमूएल 19:20 1 शमूएल 19:21 1 शमूएल 19:22 1 शमूएल 19:23 1 शमूएल 19:24



1 शमूएल 19:4 — योनातान की विनम्र प्रशंसा
यह पदावलीyata की कथा में यूँ दिखती है कि दाऊद के प्रति योनातान का प्रेम और अपनी वरिष्ठता के बावजूद सत्य की ताकत कैसे प्रेरित करती है। योनातान अपने पिता शाऊल से दाऊद के विरुद्ध किसी भी आक्रामक कदम से पहले उसे सचमुच एक सुरक्षा-सूत देती है, ताकि राजा का मन उसे न भेद दे। यह संवाद शांति, निष्कलंक कर्तव्य और मित्रता की गहराई को उद्घाटित करता है।
पाठ का छोटा परिचय
इस verse में योनातान अपने पिता के सामने दाऊद की निःस्वार्थ प्रशंसा करता है और दाऊद के कर्मों को राजा के हित में बताता है। वह समझता है कि जो कुछ वह कह रहा है, वह दाऊद के लिए नहीं, बल्कि पूरे राज्य के लिए कल्याणकारी है। यह तथ्य शाऊल के निर्णयों पर संतुलन रखने की योग्यता को बढ़ाता है और दाऊद के साथ न्याय की मांग को उच्च करता है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
पसल की राष्ट्रीय कड़ी: समान विचारधारा वाले बाइबल टिप्पणीकारों के सम्बद्ध विचार
हार्नर-टिप्पणियाँ और पूर्व-उद्धरणों से मिले सिद्धांत इस प्रकार हैं:
1) हेन्नी ने दाऊद के विरुद्ध शाऊल के पथ पर उठा कदमों को रोकने के लिए सत्य की आवाज़ प्रस्तुत की है; यह योनातान की निष्ठा को रेखांकित करता है।
2) अन्य टिप्पणीकारों के अनुसार, दाऊद के लिए राजा का भय नहीं, उसके ओर सम्मान और सुरक्षा का दृष्टिकोण है; यह संदेश देता है कि नेतृत्व में नैतिक समर्थन अत्यंत जरूरी है।
3) दाऊद की प्रशंसा के पीछे लोगों के लिए सुरक्षा और प्रोत्साहन की भावना है; इस प्रकार यह व्यवहार समाज के भीतर सामंजस्य बनाये रखने की मिसाल है।
अंतर्निहित शास्त्रीय बाध्यताएँ
योनातान की बात एक ऐसे समय की है जब शाऊल भीतर ही भीतर दाऊद के विरुद्ध भय and भ्रम में है। यह स्पष्ट करता है कि सत्य और नैतिकता के मार्ग पर चलना, यहाँ तक कि अपने पिता के निर्णय के खिलाफ भी, एक महत्त्वपूर्ण कदम है।
3 उपयोगी Cross-References (संक्षेप में)
- रोमियों 12:17-18: शांति के लिए प्रत्येक के साथ संतुलन बनाए रखना।
- इन-याचा 7:7: सत्य के लिए निकलना और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना।
- नीति-उत्पत्ति 27:4: सत्य और पिता के साथ सीधी सूचना का महत्व।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
संक्षेप
योनातान की यह प्रतिलिपि बताती है कि एक सच्चा मित्र और एक हृदय जो परमहित के लिए चिंतित होता है, वह सत्ता के साथ भी सत्य की आवाज को बनाए रखता है। यह पाठ हमें सिखाता है कि दया, सत्य और कर्तव्य एक साथ चलते हैं, और एक लोकतांत्रिक समाज में भी नैतिक मार्गदर्शन सबकी भलाई के लिए अनिवार्य है।
कटी हुई उद्धरण: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के स्पष्ट संक्षेप विचार यहाँ क्रमशः उनके विश्लेषण के साथ समाहित हैं।