2 इतिहास 6:38 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

इसलिए यदि वे अपनी बँधुआई के देश में जहाँ वे उन्हें बन्दी बनाकर ले गए हों अपने पूरे मन और सारे जीव से तेरी ओर फिरें, और अपने इस देश की ओर जो तूने उनके पुरखाओं को दिया था, और इस नगर की ओर जिसे तूने चुना है, और इस भवन की ओर जिसे मैंने तेरे नाम का बनाया है, मुँह किए हुए तुझसे प्रार्थना करें,

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2 इतिहास 6:38 पद-दर-पद बाइबल टीका

2 इतिहास ग्रंथ 6:38 पर टिप्पणी (हिन्दी)

यह पद दाऊद के उत्तराधिकारी के लिए एक विस्तृत दृष्टांत है जो परमेश्वर के भवन, स्थान और प्रार्थना की गहराई को जोड़ता है। परमेश्वर ने शिलाओं और मंदिर के भवन के कारण विश्वस्तरीय आशीषों की योजना रखी, परन्तु उसके पीछे एक सच्चाई है: जो प्रार्थना किसी कठिन समय में भी विश्वास के साथ ऊँची होती है, वही परमेश्वर को स्वीकार्य होती है। नीचे हम इस पद को अध्याय के अंतर्गत समझते हैं, उसके सन्निकट पाठ से निकली शिक्षाओं को देखते हैं,और आधुनिक जीवन में उनके अनुप्रयोग पर प्रकाश डालते हैं।

पद का पाठ के साथ एक विचारशील परिचय

इस छंद में यदि लोग अपने दासत्व के देश से लौटकर अपने समष्टि मन के साथ, अपने पूर्वजों को दिया गया देश, उन स्थानों तथा और इस भवन की ओर जो मैंने तेरे नाम के लिये बनाया है, मुँह कर के प्रार्थना करें—तो आखिर परमेश्वर उनकी दुआ सुनेगा। यह संदेश मंदिर के क्रियाशीलता और प्रार्थना के केंद्र की प्रेरणा देता है कि श्रद्धा नहीं केवल स्थान पर, बल्कि दिल की दिशा में है।

मुख्य शिक्षण

  • समर्पण की पूर्णता: मन, प्राण, और इच्छाशक्ति एक साथ परमेश्वर की ओर मोड़ने पर दया और उत्तर दोनों मिलते हैं। यह एक समग्रता की माँग है—आत्मा, जीवन और समुदाय—तीनों का एक ही उद्देश्य: परमेश्वर की महिमा।
  • क्षमा-अपेक्षा और आशीषों का क्रम: राज्य-यात्रा में व्यक्तियाँ बार-बार अपने पाप-गिरेहों से उबारने के लिये लौटते हैं; तब परमेश्वर उनकी पुकार सुनता है और पवित्र स्थानों की सामर्थ्य दिखती है।

अनुसंगिक पाठ से तुलना

– Descriptionally, इतिहास 7:14 में यदि My people जो नाम मुझ से लिया गया है, आत्म-नैतिकता में लौटें, तब मैं आकाश से रोकूँगा और उनकी धरती को चंगा कर दूँगा।

–> 1 राजा 8:46-49 में राजा का प्रार्थना-आह्वान और परमेश्वर की कृपा: यदि कोई राष्ट्र पाप करे तो भी दिल से प्रार्थना हो, तो वह दया करने वाला है।

–> दानियल 9:17-19 में दानियल की नम्रता और मंदिर के लिए प्रार्थना का मूल भाव: प्रार्थना और उपस्थिति एक साथ आनी चाहिए।

सीधे व्यवहारपयोगी अनुप्रयोग

  1. परिवर्तन का स्थान नहीं, परन्तु हृदय की दिशा: चाहे मंदिर हो या जीवन के प्रमुख निर्णय, मन से प्रत्यक्षत: परमेश्वर की ओर मुड़ना आवश्यक है।
  2. समुदाय की मिलकर प्रार्थना: राष्ट्र-स्तर से लेकर व्यक्तिगत जीवन तक, समुदाय का एक साथ पुकारना प्रभावी हो सकता है क्योंकि यह एक सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
  3. प्रार्थना का सच्चा रस: यदि हम अपने पुराने उत्तरदायित्वों और बन्धनों को पहचानकर लौटें, तो परमेश्वर कृपा से छूट और नई आशा देते हैं।

क्रॉस-रेफ़रेंसेज और उनका संक्षिप्त स्पष्टीकरण

• मलिका-धारा 7:14 के अनुसार चेतावनी और आशीर्वाद का मिश्रण उठता है—हृदय परिवर्तन और पवित्र स्थान के प्रति आस्था एक साथ आवश्यक है। संक्षेप—दिल की दिशा मंदिर-निर्मित स्थान से आगे बढ़कर जीवन के हर क्षेत्र में प्रार्थना को प्रभावी बनाती है।

• दानियल 9:17-19 में नम्रता और विनय के साथ प्राथना की शक्ति पर प्रकाश। संक्षेप—कमजोरी के बीच भी दया माँगना और परमेश्वर की महिमा के लिए पुकारना असर डालता है।

संक्षेप निष्कर्ष

2 इतिहास 6:38 यह दिखाता है कि मंदिर और प्रार्थना के बीच का सच्चा रिश्ता मानव-हृदय की पुकार के साथ जीवंत रहता है। उद्देश्य एक है: परमेश्वर की महिमा। जब हम अपने देश, अपने परिवार, और अपने क्षितिज के भीतर ईमानदारी से लौटकर अपने जीवन को उसकी आज्ञाओं के अनुरूप बनाते हैं, तब परमेश्वर की कृपा और संरक्षण हमारे साथ रहता है।

कथन-साझा उद्धरण (公-domain):

Matthew Henry और Albert Barnes के समानार्थी विचार: “दिल से प्रार्थना” की महत्ता, “तब ही दृष्टि स्पष्ट होगी कि कहाँ से आशीष आता है”—ये विचार इस पद के मूल में बैठे हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 इतिहास 6:38 समानांतर पद और संबंधित वचन

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व्यवस्थाविवरण 30:2 (HINIRV) »
और अपनी सन्तान सहित अपने सारे मन और सारे प्राण से अपने परमेश्‍वर यहोवा की ओर फिरकर उसके पास लौट आए, और इन सब आज्ञाओं के अनुसार जो मैं आज तुझे सुनाता हूँ उसकी बातें माने;

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2 इतिहास 33:11 (HINIRV) »
तब यहोवा ने उन पर अश्शूर के सेनापतियों से चढ़ाई कराई, और वे मनश्शे को नकेल डालकर, और पीतल की बेड़ियों से जकड़कर, उसे बाबेल को ले गए*।

2 इतिहास 6:34 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
2 इतिहास 6:34 (HINIRV) »
“जब तेरी प्रजा के लोग जहाँ कहीं तू उन्हें भेजे वहाँ अपने शत्रुओं से लड़ाई करने को निकल जाएँ, और इस नगर की ओर जिसे तूने चुना है, और इस भवन की ओर जिसे मैंने तेरे नाम का बनाया है, मुँह किए हुए तुझसे प्रार्थना करें,

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