Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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2 इतिहास 6:1 2 इतिहास 6:2 2 इतिहास 6:3 2 इतिहास 6:4 2 इतिहास 6:5 2 इतिहास 6:6 2 इतिहास 6:7 2 इतिहास 6:8 2 इतिहास 6:9 2 इतिहास 6:10 2 इतिहास 6:11 2 इतिहास 6:12 2 इतिहास 6:13 2 इतिहास 6:14 2 इतिहास 6:15 2 इतिहास 6:16 2 इतिहास 6:17 2 इतिहास 6:18 2 इतिहास 6:19 2 इतिहास 6:20 2 इतिहास 6:21 2 इतिहास 6:22 2 इतिहास 6:23 2 इतिहास 6:24 2 इतिहास 6:25 2 इतिहास 6:26 2 इतिहास 6:27 2 इतिहास 6:28 2 इतिहास 6:29 2 इतिहास 6:30 2 इतिहास 6:31 2 इतिहास 6:32 2 इतिहास 6:33 2 इतिहास 6:34 2 इतिहास 6:35 2 इतिहास 6:36 2 इतिहास 6:37 2 इतिहास 6:38 2 इतिहास 6:39 2 इतिहास 6:40 2 इतिहास 6:41 2 इतिहास 6:42



अर्थ का सीधा संक्षेप
2 इतिहास 6:9 में दर्शाया गया वचन संतुष्ट करता है कि परमेश्वर का भव्य भवन बनाने का कर्तव्य दाऊद के नाती शालूम या उसका पुत्र की अगली पीढ़ी को प्राप्त है; ऐसे में परमेश्वर ने अपने नाम के स्थान के लिए राजकुमार की भूमिका को निर्धारित किया है, ताकि परमेश्वर का जहां नाम स्थापित हो, वही भवन खड़ा हो।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह अवलोकन इतिहास के सिंहावलोकन से जुड़ा है जब दाऊद ने ईश्वरीय स्मारक और मंदिर-योजना का विचार किया। परमेश्वर ने दाऊद को योजना में सहयोग दिया, पर निर्माण का वास्तविक कार्य उसके पुत्र के हाथों किया जाएगा। यह विस्तार शिल्पकार्य नहीं, बल्कि परमेश्वर की आज्ञापालन और परमेश्वर-के नाम के केंद्रित महत्त्व पर केंद्रित है।
व्याख्यात्मक Beobachtungen (चिन्तन-बिंदु)
मुख्य विषय सूची
अन्वेषणीय क्रॉस-रेफरेंसेस
यहोवा के नाम के स्थान की महत्ता के साथ बिती अन्य जगहें - एक स्पष्ट संकेत देती हैं कि हर मंदिर-निर्माण से पहले परमेश्वर का नाम और उसकी प्रतिष्ठा सर्वोपरि है. उदाहरण के लिए, एक स्थान के बारे में पुरानी व्यवस्था की याद दिलाती है कि परमेश्वर अपने लोगों के साथ एक विशिष्ट स्थान पर निवास करना चाहता है। दूसरे संदर्भों में यह देखा जा सकता है कि पुत्र-उत्तराधिकारी के माध्यम से परमेश्वर की योजनाओं का निर्वाह होता है, जो आस्था के वाहक होते हैं।
पूर्व-दी जाने वाली टिप्पणियाँ from प्रामाणिक पुरातन टिप्पणीकार
मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के संकेतों का संक्षिप्त अनुभव इस प्रकार है: डेविड के विचार से मंदिर की योजना एक दृश्य संकेत है कि परमेश्वर-उपनयोजन का काम भीतर से बढ़कर बाहरी-योजना में आ सकता है, परंतु उसकी वास्तविक निर्माणकृति पुत्र तक ही आती है; यह पारिवारिक-व्यवस्था और परमेश्वर के नाम के महत्त्व पर बल देता है। कुछ प्रमाणित उद्धरण (संक्षेप) नीचे सीधे नहीं हैं, पर इन तीनों commentary-उद्धरणों के अनुसार यह वचन पिता से पुत्र तक की श्रृंखला में परमेश्वर की व्यवस्था की प्रमाणिकता दर्शाता है।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
हम सीखे: परमेश्वर की योजनाओं में क्रम और संतान-सम्भवा महत्त्वपूर्ण है; आज हम भी अपने कार्यों को परमेश्वर के नाम के सम्मान में संरेखित करें, ताकि जो भी निर्माण या योजना करें वह सत्य-विश्वास और स्थायित्व से परिपूर्ण रहे।