Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
2 इतिहास 1 2 इतिहास 2 2 इतिहास 3 2 इतिहास 4 2 इतिहास 5 2 इतिहास 6 2 इतिहास 7 2 इतिहास 8 2 इतिहास 9 2 इतिहास 10 2 इतिहास 11 2 इतिहास 12 2 इतिहास 13 2 इतिहास 14 2 इतिहास 15 2 इतिहास 16 2 इतिहास 17 2 इतिहास 18 2 इतिहास 19 2 इतिहास 20 2 इतिहास 21 2 इतिहास 22 2 इतिहास 23 2 इतिहास 24 2 इतिहास 25 2 इतिहास 26 2 इतिहास 27 2 इतिहास 28 2 इतिहास 29 2 इतिहास 30 2 इतिहास 31 2 इतिहास 32 2 इतिहास 33 2 इतिहास 34 2 इतिहास 35 2 इतिहास 36Verse
2 इतिहास 6:1 2 इतिहास 6:2 2 इतिहास 6:3 2 इतिहास 6:4 2 इतिहास 6:5 2 इतिहास 6:6 2 इतिहास 6:7 2 इतिहास 6:8 2 इतिहास 6:9 2 इतिहास 6:10 2 इतिहास 6:11 2 इतिहास 6:12 2 इतिहास 6:13 2 इतिहास 6:14 2 इतिहास 6:15 2 इतिहास 6:16 2 इतिहास 6:17 2 इतिहास 6:18 2 इतिहास 6:19 2 इतिहास 6:20 2 इतिहास 6:21 2 इतिहास 6:22 2 इतिहास 6:23 2 इतिहास 6:24 2 इतिहास 6:25 2 इतिहास 6:26 2 इतिहास 6:27 2 इतिहास 6:28 2 इतिहास 6:29 2 इतिहास 6:30 2 इतिहास 6:31 2 इतिहास 6:32 2 इतिहास 6:33 2 इतिहास 6:34 2 इतिहास 6:35 2 इतिहास 6:36 2 इतिहास 6:37 2 इतिहास 6:38 2 इतिहास 6:39 2 इतिहास 6:40 2 इतिहास 6:41 2 इतिहास 6:42



2 इतिहास 6:40 - एक विनयपूर्वक निवेदन का पाठ
इस पद में राजा दाऊद ने परमेश्वर के सम्मुख एक आत्मीय प्रार्थना प्रस्तुत की है, जो मंदिर की भेंट-पूजा और संसार से जुड़ी अनेक ज़िम्मेदारियों के बीच भी प्रार्थना की एक स्थिर, विश्वस्त राह बना देती है। यह वचन स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि परमेश्वर अपने नाम के घर में आँखे खोलकर देखते हैं, ताकि भक्तों की प्रार्थना सुन सके।
सूचना-सार - अध्याय के साथ सम्बंध
यह पाठ 2 इतिहास का वह भाग है जहाँ हम देखते हैं कि दाऊद ने मंदिर के स्थापना-यज्ञ के साथ एक ऐसी प्रार्थना को लिखा जिसे बिदकते हुए भी परमेश्वर के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। दाऊद के इन शब्दों में एक विनम्रता और भरोसा है कि परमेश्वर जोड़े हुए स्थान—जहाँ पर उसकी उपस्थिति के संकेत रहते हैं—वहाँ से ही यह प्रार्थना सुनी जाएगी।
मुख्य आध्यात्मिक शिक्षण
अन्य बाइबल पाठ के साथ तुलना
• 1 राजियों 8:28-29 में शास्त्र-भवन के लिए दाऊद के समरूपी भाव सामने आते हैं—भवन के भीतर और बाहर प्रार्थना के साथ परमेश्वर की उपस्थिति को मानना। उदाहरण के तौर पर, मसीह के मंदिर के रूप में हर विश्वासी का शरीर भी प्रार्थना की कड़ी के साथ परमेश्वर के घर के समान माना गया।
• भजन 66:18 में लिखा है कि यदि हमारे हृदय में पाप है तो हमारी प्रार्थना मुश्किल से सुनी जाती है; इसलिए पवित्र जीवन-संयम प्रार्थना की कुंजी है।
• मरकुस 11:17 में यीशु ने मंदिर को घर-प्रार्थना का स्थान बुलाया; यह स्मरण हमें बताता है कि प्रार्थना एक עזרה है जो परमेश्वर के नज़दीक लाती है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
- किसी भी आध्यात्मिक केंद्र (घर, चर्च, या जीवन के महत्वपूर्ण मोड़) में प्रार्थना करते समय एकाग्रता और ईमानदारी बनाए रखें।
- परमेश्वर के नाम की महिमा के लिए दुआएँ करें, न कि केवल स्वार्थी उद्देश्यों के लिए।
- प्रार्थना के साथ जीवन-नিষ্টता और नैतिकता को जोड़ें—यानी शब्दों के अनुरूप व्यवहार करें।
क्रॉस-रेफरेंसेज़ के साथ संचार
• 2 इतिहास 7:15 - परमेश्वर का आँखे खुले रहने का संदेश मंदिर के विषय के साथ जुड़ता है; पवित्र स्थान पर प्रार्थना का प्रभाव परमेश्वर की स्पष्ट उपस्थिति को आकर्षित करता है।
• भजन 28:2 - आयातित शब्दों के साथ प्रार्थना का आरोहण परमेश्वर तक पहुँचता है; आत्मा की संवेदना और विश्वास जरूरी हैं।
संक्षिप्त सार
यह verse दाऊद के लिए एक निहायत व्यक्तिगत और सामूहिक संदेश है: परमेश्वर अपने घर में असंख्य प्रार्थनाओं को सुनने के लिए कान लगाते हैं। यह विश्वास देता है कि भक्ति-सत्य और पवित्र जीवन से संयुक्त प्रार्थना स्वर्ग की गहराइयों तक पहुँचेगी।
अनुमित उद्धरण (यदि उपयुक्त): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के भीतर इस संदर्भ की स्पष्ट पंक्तियाँ उपलब्ध हैं ये संक्षेप में यहाँ लिखे जाते हैं, परन्तु पूर्ण पाठ उद्धरण के लिए पाठ-संदर्भ देखें।
प्रमुख संदेश: प्रभु के घर-आवाज़ में प्रार्थना की शक्ति और उसकी सुनवाई की मान्यता एक ईमानदार भक्त के लिए जीवन-उद्धारक और मार्गदर्शक है।