Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
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अर्थ का प्रत्यक्ष संदेश
परन्तु यहोवा ने मेरे पिता दाऊद से कहा, 'तेरी जो इच्छा है कि यहोवा के नाम का एक भवन बनाए, ऐसी इच्छा करके तूने भला तो किया; (1 राजा 8:18)
pछ्Contextual background
2 इतिहास 6 में राजा शालोमोन की दीर्घ योजना और दाऊद के वंशज के रूप में विरासत के संदर्भ में यह कहा गया है कि दिव्यता के बजाय मानव इच्छा का उद्देश्य मंदिर निर्माण के लिए प्रेरणा बनती है। दाऊद ने यह इच्छा रखी, पर परमेश्वर ने इसे पूर्ण करने की जिम्मेदारी शालोमोन के कंधों पर डाल दी। यह पद यह दर्शाता है कि परमेश्वर अपने लोगों की चाहतों को सम्मान देता है, पर यह भी स्पष्ट करता है कि पूरी कृपा और निर्माण का कार्य उसके नियंत्रण में है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
थीमेटिक बिंदु
संबद्ध आयतें और संक्षिप्त संपर्क
संरेखण के लिए तीन संदर्भ देखें:
व्यावहारिक निष्कर्ष
हम सीखते हैं कि प्रेरणा और प्रेरक इच्छा परमेश्वर के लिए पर्याप्त नहीं; परमेश्वर की योजना को समझना और उसमें भागीदारी करना जरूरी है। यदि हम अपने उद्देश्यों को परमेश्वर की महिमा के लिए समर्पित करते हैं, तो वह मार्गदर्शन देता है और हमारे प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाता है।
संदर्भ उद्धरण (संक्षेप)
इस पाठ के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के विचारों से प्राप्त सामान्य निष्कर्ष नीचे एक समन्वय में प्रस्तुत हैं। उनके विचारों में यह बात बार-बार उभरती है कि परमेश्वर मानव इच्छाओं को सम्मान देता है जब वे उसके नाम की महिमा के लिए हों; साथ ही, वास्तविक निर्माण और साक्षर प्रयास उसकी योजना के अनुसार चलना चाहिए।