2 इतिहास 6:36 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

“निष्पाप तो कोई मनुष्य नहीं है यदि वे भी तेरे विरुद्ध पाप करें और तू उन पर कोप करके उन्हें शत्रुओं के हाथ कर दे, और वे उन्हें बन्दी बनाकर किसी देश को, चाहे वह दूर हो, चाहे निकट, ले जाएँ,

पिछला पद
« 2 इतिहास 6:35
अगला पद
2 इतिहास 6:37 »

2 इतिहास 6:36 पद-दर-पद बाइबल टीका

2 इतिहास 6:36—हिंदी व्याख्या (HINIRV)

यह पद परमेश्वर के कर्तव्यपूर्ण न्याय और दया के संतुलन को दर्शाता है। सुलैमान ने कूटनीतिक प्रतिज्ञाओं के साथ परमेश्वर के सामने प्रार्थना की थी कि यदि गणना के साथ राष्ट्र पाप करें और दंड को स्वीकार करें, तो देवता उनकी बंदी बनाकर अन्य देशों को ले जाएँ। यहाँ न तो व्यक्ति की निष्पापता का दावा लंबित है और न ही राष्ट्र की पवित्रता को स्वचालित माना गया है। यह अध्याय परमेश्वर की न्याय और अनुग्रह के बीच के संचलन को उद्घाटित करता है।

पंक्ति-दर्शन: अध्याय 6 में इस Verse के साथ क्या संदर्भ बनता है

यह अध्याय शिलाओं के द्वारा मंदिर की महिमा, प्रार्थना-याचना और पाप के परिणामों के बारे में है। राजा दाऊद के बाद बंधन-योग्य एकाग्रता से सुलैमान ने प्रार्थना की कि यदि उनका देश पाप करे और वह उन्हें दण्ड दें, तो परमेश्वर उन्हें विदेशी शक्तियों के हाथों में न दे दें, परन्तु यदि वे पश्चात्ताप करें। यह verse बताता है कि जब लोग अपने पापों के प्रति शर्म और पश्चात्ताप दिखाते हैं, तब भी दयालुत्व और न्याय का संतुलन बनाए रखा जाता है।

मुख्य आध्यात्मिक शिक्षा

1) मनुष्य और राष्ट्र किसी भी पाप से बरी नहीं हैं; निष्पाप व्यक्ति भी दोष दे सकता है, और दण्ड से विमुक्त नहीं।

2) परमेश्वर का न्याय और उसकी करुणा एक साथ चलते हैं—यदि लोग प्रत्यक्ष पाप करें और पश्चात्ताप न करें, तो दंड अवश्य उपयुक्त स्थान लेता है।

3) मसीहीय जीवन में भय, नम्रता और निर्भरता की आवश्यकता है—हमारी सुरक्षा ईश्वर की कृपा और वचन के अनुसार ही है।

अनुप्रयोग: आज के संदर्भ में कैसे लागू करें

- व्यक्तिगत स्तर पर: मैं अपने मन, विचार और कार्यों में पाप से सचेत रहूँ, और यदि पाप हो भी जाए, तो तुरंत पश्चात्ताप करूँ और परमेश्वर के पास लौटूँ।

- सामुदायिक स्तर पर: राष्ट्र और समुदाय के लिए हमारी प्राथनाएं ऐसे हों कि पाप की नीतियों के विरुद्ध हो और परमेश्वर के आदेश के अनुरूप कानून निर्माण हों।

- तथ्य-परख: डर या दया से नहीं, बल्कि सत्य-आधारित आचरण से जीवन बिताऊँ और दया-न्याय के संतुलन को बनाए रखूँ।

क्रॉस-रेफरेंसेज़ (संक्षेप में, और उनका संदर्भ)

  • 2 इतिहास 7:14 — पश्चात्ताप और ईश्वर की करुणा की आवश्यकता स्पष्ट करती है; यदि my people humble themselves और pray करें, तब वेheal हो सकते हैं।

इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि ईश्वर का चित्त, दया और न्याय का संयोजन है—जहाँ पश्चात्ताप और वफादारी से रक्षा संभव है।

1-2 पंक्ति का सार

निष्पाप कोई मनुष्य नहीं है—पर परमेश्वर की करुणा के पीछे, पश्चात्ताप और विश्वास के साथ आने पर बचाव और अनुग्रह मिल सकता है। यह पाठ हमें विनम्रता और निष्ठा से चलने की प्रेरणा देता है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 इतिहास 6:36 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

सभोपदेशक 7:20 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
सभोपदेशक 7:20 (HINIRV) »
निःसन्देह पृथ्वी पर कोई ऐसा धर्मी मनुष्य नहीं जो भलाई ही करे और जिससे पाप न हुआ हो। (रोमि 3:10)

याकूब 3:2 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
याकूब 3:2 (HINIRV) »
इसलिए कि हम सब बहुत बार चूक जाते हैं* जो कोई वचन में नहीं चूकता, वही तो सिद्ध मनुष्य* है; और सारी देह पर भी लगाम लगा सकता है।

1 यूहन्ना 1:8 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
1 यूहन्ना 1:8 (HINIRV) »
यदि हम कहें, कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं और हम में सत्य नहीं।

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें