Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 17:1 2 शमूएल 17:2 2 शमूएल 17:3 2 शमूएल 17:4 2 शमूएल 17:5 2 शमूएल 17:6 2 शमूएल 17:7 2 शमूएल 17:8 2 शमूएल 17:9 2 शमूएल 17:10 2 शमूएल 17:11 2 शमूएल 17:12 2 शमूएल 17:13 2 शमूएल 17:14 2 शमूएल 17:15 2 शमूएल 17:16 2 शमूएल 17:17 2 शमूएल 17:18 2 शमूएल 17:19 2 शमूएल 17:20 2 शमूएल 17:21 2 शमूएल 17:22 2 शमूएल 17:23 2 शमूएल 17:24 2 शमूएल 17:25 2 शमूएल 17:26 2 शमूएल 17:27 2 शमूएल 17:28 2 शमूएल 17:29



2 शमूएल 17:12 (HINIRV) का तत्काल संदर्भ और उसका दृश्य
यह पद एक समय की रणनीतिक योजना से जुड़ा है जब अबशेलोहन ने दान यहूदियों के विरुद्ध गतिविधियाँ तेज कर दी थीं। युद्ध की आशा में वह एक ऐसी चाल चलने का प्रस्ताव करता है जिसमें वे जहाँ–जहाँ मिलें, वहाँ को पकड़ कर तेज़ी से टूट पड़ें, ताकि विरोधी घबराहट में आकर गिर जाये और उनके साथियों का समूचा समूह टूट जाए। यह वक्तव्य दिखाता है कि तलवार के रूप में शक्ति का प्रयोग कब और कैसे भय के साथ जुड़ सकता है, और यह भी कि प्रभु की ओर से बचाव वही हो सकता है जो उसकी योजना के साथियों के साथ है।
ईश्वर या आस्था के बारे में पाठ से जो स्पष्ट होता है
यह पद बताता है कि परमेश्वर की प्रेरणा किसी भी पार्टीगत रणनीति से परे होती है; वह जो कुछ भी घटे, उसका अंत उसी की अनुमति और दिशा में होता है। हथियारबंद आक्रामकता यदि लोगों के मन में भय बनाये, तो वह तबाही का कारण बनती है। विश्वास की दृष्टि से, परमेश्वर की सुरक्षा उन लोगों के साथ रहती है जो निर्दोष और सचेत रहते हैं, और जो उसकी योजना के अनुसार चले।
महत्वपूर्ण शब्दों/छवियों की स्पष्टता
संबंधित पाठ (Cross-references) और संक्षिप्त व्याख्या
आज के लिए आवेदन
हम bhiषण परिस्थितियों में भी यह याद रखें कि सफलता-योजना और भय के बीच सही अंतर परमेश्वर की ओर(io) से आना चाहिए। आत्मविश्वास में, हमें अपने व्यक्तिगत नगर, परिवार और समुदाय के लिए प्रभु के निर्देशन को मानना चाहिए, न कि भय की प्रेरणा से प्रेरित होकर आक्रमकता दिखानी चाहिए। परिशुद्धता के साथ एक दूसरे की रक्षा करें और सत्य पर टिके रहें ताकि संकट में भी हम ओस की तरह न गिरें, बल्कि प्रभु की शक्ति से उठें।
सार-संकलन
इस पद में दिखती है कि शक्ति के प्रदर्शन और सुरक्षा की वास्तविक पहचान प्रभु के आश्रय में है। ओस की तरह गिरना तब होता है जब भय हावी हो; परन्तु जो परमेश्वर के भरोसे रहते हैं, वे उठते हैं और उनके साथियों पर भी प्रार्थना, साहस और एकता के साथ काम करते हैं।
निश्चित उद्धरण (जहाँ उपलब्ध):Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के समान विचारों से प्रेरणा लेते हुए यह टिप्पणी उन्हीं की रूमानी परिकल्पनाओं के साथ संकलित है; किन्तु यहाँ किसी भी पूर्ण उद्धरण को बिना उद्धृत किए संकलित नहीं किया गया है। अगर इनमें से किसी का संक्षिप्त शब्द ठीक प्रत्यक्ष रूप से लिया गया हो, तो उसे नीचे संकेतित किया जाएगा.