Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 17:1 2 शमूएल 17:2 2 शमूएल 17:3 2 शमूएल 17:4 2 शमूएल 17:5 2 शमूएल 17:6 2 शमूएल 17:7 2 शमूएल 17:8 2 शमूएल 17:9 2 शमूएल 17:10 2 शमूएल 17:11 2 शमूएल 17:12 2 शमूएल 17:13 2 शमूएल 17:14 2 शमूएल 17:15 2 शमूएल 17:16 2 शमूएल 17:17 2 शमूएल 17:18 2 शमूएल 17:19 2 शमूएल 17:20 2 शमूएल 17:21 2 शमूएल 17:22 2 शमूएल 17:23 2 शमूएल 17:24 2 शमूएल 17:25 2 शमूएल 17:26 2 शमूएल 17:27 2 शमूएल 17:28 2 शमूएल 17:29

पद के साथ तुरंत का दृश्य (2 शमूएल 17:15)
यह पंक्ति हूशै की वह प्रतिक्रिया दिखाती है जब उसने दाऊद की सत्ता के विरुद्ध अहीतोपेल की योजना के बारे में सुविचारित कदम उठाने का फैसला किया। अहीतोपेल ने আসল में इस्राएली पुरनियों और इस-इस प्रकार की सम्मति दी, जिससे उसने अंशतः भविष्यवाणी के जैसे वितरित योजना दी थी। हूशै ने सादोक और एब्यातार याजकों से कहा कि उन्होंने कीमती तर्कों के साथ आगे बढ़ना चाहिए ताकि दाऊद की सुरक्षा और राज्य की स्थिरता बनी रहे।
1) इस पाठ का परमेश्वर या विश्वास पर संकेत
कथन यह मानता है कि योजनाओं के स्तर पर मानव ज्ञान अक्सर कमजोर पड़ सकता है और परमेश्वर की योजना के अनुसार ही वास्तविकता बनती है। हूशै ने इस स्थिति में शपथपूर्वक और स्पष्ट निर्देश दिया कि कैसे वरदान प्राप्त नेताओं की सम्मति और ईश्वर की कृपा मिलकर राज्य का मार्ग निर्धारित करते हैं। यह दर्शाता है कि विश्वास की दृष्टि से सचेत निर्णय के लिए दखल-ए-हाकिम (सूचित-हुक्म) ईश्वर के मार्गदर्शन के अनुरूप होना चाहिए।
2) महत्त्वपूर्ण शब्दों और छवियों की स्पष्टता
आहीतोपेल की सम्मति एक राजनीतिक युक्ति है, जो मानवीय सलाह और राजनीतिक परामर्श की मिसाल बनती है। इसके विपरीत, हूशै का दायित्व एक ऐसे नेतृत्व का है जो ईश्वर के उद्देश्य के अनुरूप निर्णय ले; यह स्पष्ट करता है कि सत्य और योजना का संतुलन परमेश्वर की सत्ता के सामने राजनीति के सीमाओं को भी मान्यता देता है।
3) संबंधित आयतें (क्रॉस-रेफरेंसेज़) और उनके संगत अर्थ
इन क्रॉस-रेफरेंसेज़ में बिनतीन बात निकलती है: उलझन के समय भी विश्वासयोग्य कर्म और परमेश्वर के निर्देशों की अवश्यता; राजनीतिक निर्णयों में ईश्वर की योजना का सर्वोच्च स्थान।
4) आधुनिक अनुप्रयोग
संक्षेप सार
2 शमूएल 17:15 हमें याद दिलाता है कि God की योजना और मानव-राजनीति के बीच संतुलन बनाकर ही स्थिरता संभव है। हूशै की दृष्टि, उच्च-स्तर के विश्वास-नेतृत्व की दायित्व और याजकों की आध्यात्मिक सलाह एक साथ मिलकर एक नैतिक मार्ग दिखाते हैं—जो आज भी विश्वास के लिए मार्गदर्शक है।
एतिहासिक टिप्पणी से संबद्ध उद्धरण (संशोधित सार): Matthew Henry और Adam Clarke के पुराने पाठ-उद्धरणों से समेकित विचार इस प्रकार मिलते हैं: "जो पथ परमेश्वर के निर्देश से भरे हों, वहाँ ही शत्रुओं के मंसूबे निष्फल होते हैं" (संकेत-उद्धरण की इकाई केवल सार के लिए है और पूर्ण वाक्य नहीं है)।