2 शमूएल 17:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जब वे चले गए, तब ये कुएँ में से निकले, और जाकर दाऊद राजा को समाचार दिया; और दाऊद से कहा, “तुम लोग चलो, फुर्ती करके नदी के पार हो जाओ; क्योंकि अहीतोपेल ने तुम्हारी हानि की ऐसी-ऐसी सम्मति दी है।”

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2 शमूएल 17:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

2 शमूएल 17:21 का संदर्भ और अर्थ

यह पद यहूदा के विद्रोह-योजना में चल रही चुपके-चाल की कथा का भाग है। अहितोपेल की चाल से बचने के लिए दाऊद के समर्थक सुरक्षित मार्ग की खोज कर रहे हैं। इस समय इजरायल के पूर्वी-उत्तर दिशा से भागे हुए लोग नदी के पार और कुएँ के भीतर घुस कर एक-एक कर भागते हैं ताकि दाऊद-जीवी समूह तक खतरे से बचे और वे सुरक्षित स्थान तक पहुँच जाएँ। इस संदर्भ में कुएँ से निकलना और समाचार पहुँचाना एक रणनीतिक कदम है ताकि दाऊद समय पर नदी पार करके शरण पा सके।

केंद्रीय भावार्थ

इस वाक्य का केंद्र यह है कि कैसे अधिकारी और सैनिक हिंसा की तेज धारा से डरकर भी चतुराई और एकजुटता से संकट का सामना करते हैं। असल में यह दिखाता है कि आश्वस्त और विवेकपूर्ण योजना बनाकर विपत्ति से पार पाया जा सकता है, भले ही सत्ता के दावों में कितनी भी करीबी मित्रों की सम्मति क्यों न हो। दाऊद के समर्थक अपने भागने-वाले मार्ग की दिशा में फुर्ती दिखाते हैं, ताकि दाऊद एक सुरक्षित स्थान पर पहुँच सके और दुष्ट योजना से बचे।

मुख्य विषय

  • युद्ध-योजना में चालाकी और सुरक्षा-प्राथमिकता: संकट के समय विवेकपूर्ण निर्णय लेना जरूरी होता है ताकि रणनीति सफल हो सके।
  • विश्वासघात और सच्चे मित्रों की भूमिका: अहितोपेल की सम्मति के विपरीत भी सत्ता-घटना में प्रभु-निर्देश के अनुसार आगे बढ़ना आवश्यक हो सकता है।
  • निर्बल से सुरक्षित मार्ग: विपत्ति में भी ईश्वर की सहायता पथप्रदर्शक बनती है, जैसे वे दाऊद के साथ थे और उनके समर्थक भी एक सामूहिक प्रयास से बच निकले।

संबद्ध पाठ

– 2 शमूएल 15–17 के आगे के घटनाक्रम इन क्षणों में दाऊद के भागने की योजना दिखाते हैं।

– अन्य संकेतक कड़ियाँ: 1 शमूएल 23:9-13 (घटना की नजदीकी संदर्भ में बुद्धिमत्ता से बचना), 2 शमूएल 16:20-23 (अहितोपेल की सत्ता-योजना और दाऊद के शरण-मार्ग के बारे में चेतावनी)।

व्यावहारिक आत्म-चिंतन

हम देखेंगे कि संकट के बीच विवेकपूर्ण निर्णय और सुरक्षित मार्ग खोजना आवश्यक हो सकता है। कठिन परिस्थितियों में भी प्रियजन एवं सहायक समूह के साथ मिलकर सुरक्षित कदम उठाने की प्रेरणा मिलती है। यह पाठ हमें यह सिखाता है कि डर के माहौल में भी विश्वास और योजना के साथ आगे बढ़ना चाहिए, ताकि परमेश्वर के संरक्षण के अंतर्गत बढ़ते रहें।

संक्षिप्त निष्कर्ष

2 शमूएल 17:21 वह क्षण है जिसमें भागते हुए लोग दाऊद के मार्ग को सुरक्षित रखने के लिए चतुराई से कुएँ से निकलकर नदी पार की यात्रा का मार्ग बनाते हैं। यह संदेश देता है कि संकट के समय संगति, सक्रिय चतुराई और ईश्वर के निर्देशन के साथ आगे बढ़ना कितना आवश्यक है।

Cross-references

• भिन्न संदर्भ में, 2 शमूएल 15:13-14 में दाऊद की प्रतिरोध और भागना सामने आता है; यह दिखाता है कि भय के बावजूद निर्भरता परक संकेत उचित मार्ग चयन का हिस्सा है।

• 1 शमूएल 23:12-13 और 2 शमूएल 16:21-22 ऐसे क्षण बताते हैं कि सत्ता-योजना से बचते समय परामर्श और विवेक कितने महत्वपूर्ण होते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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तब हूशै ने सादोक और एब्यातार याजकों से कहा, “अहीतोपेल ने तो अबशालोम और इस्राएली पुरनियों को इस-इस प्रकार की सम्मति दी; और मैंने इस-इस प्रकार की सम्मति दी है।

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