Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 17:1 2 शमूएल 17:2 2 शमूएल 17:3 2 शमूएल 17:4 2 शमूएल 17:5 2 शमूएल 17:6 2 शमूएल 17:7 2 शमूएल 17:8 2 शमूएल 17:9 2 शमूएल 17:10 2 शमूएल 17:11 2 शमूएल 17:12 2 शमूएल 17:13 2 शमूएल 17:14 2 शमूएल 17:15 2 शमूएल 17:16 2 शमूएल 17:17 2 शमूएल 17:18 2 शमूएल 17:19 2 शमूएल 17:20 2 शमूएल 17:21 2 शमूएल 17:22 2 शमूएल 17:23 2 शमूएल 17:24 2 शमूएल 17:25 2 शमूएल 17:26 2 शमूएल 17:27 2 शमूएल 17:28 2 शमूएल 17:29



2 शमूएल 17:23 का अर्थ और संदर्भ
इस पद का शाब्दिक अर्थ है: अहीतोपेल ने अपना दुःख, निराशा और असफलता महसूस करने के बाद अपने गदहे पर काठी मारी, घर लौटे और आत्म-हत्या कर ली। वह शत्रु नहीं; एक वरिष्ठ सलाहकार था जिसकी योजना फिर भी राजा के विरुद्ध या गलत दिशा में जा रही थी। परिणामतः उसने अपने जीवन का सम्मान और अवसर खो दिया।
पृष्ठभूमि
दूसरे समुवेल के अंत में राजा दावीद के समय अहीतोपेल को बुध्दिमान परामर्श के लिए जाना गया, परन्तु बाद में दावीद के पक्ष में उसका प्रभाव घटता गया और दावीद के अनुगमन के कारण जो योजना अपनाई गई, उसका परिणाम स्पष्ट नहीं था। इस प्रसंग में अहीतोपेल ने समझ लिया कि उसका मार्ग सफल नहीं होगा; वह अपने निर्णय पर आधारित था, और जब उसे लगा कि उसका सुझाव नहीं माना जाएगा, तो उसने शोक और निराशा में आत्म-हत्या कर ली।
interpretive observations (सूक्ष्म विश्लेषण)
मotive और निष्कर्ष
अहीतोपेल ने अपनी योजनाओं के सफल न होने के बाद स्वयं को ही समाप्त कर लिया; यह एक नसीहत है कि गलत रास्ते पर बढ़ना और आत्म-नियंत्रण खोना, आत्म-निग्रह खोने से होता है। ईश्वर पर भरोसा बनाये रखना और परिस्थिति चाहे कैसी भी हो, निर्णयों में धैर्य बनाए रखना चाहिए।
सूक्ष्म सन्देश के बिंदु
अन्य बाइबल उद्धरण (क्रॉस-रेफरेंस)
यद्यपि यहाँ विस्तृत उद्धरण नहीं दिए जा रहे, परन्तु यह पाठ अन्य प्रेरणाओं से जुड़ा है:
तर्क-सार (संक्षेप)
2 शमूएल 17:23 में अहीतोपेल की मौत उसकी व्यावहारिक योजना के असफल होने के पराकाष्ठा को दर्शाती है। इसका बल परामर्श है कि किसी भी स्थिति में ईश्वर के मार्ग के अनुसार चलना चाहिए और विवेक, धैर्य और ईमानदारी बनाए रखनी चाहिए।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
कथात्मक संदर्भ
यह कथा दावीद के शासन-यात्रा में निर्णायक मोड़ बनती है और दिखाती है कि बुरे counsel के बावजूद भी ईश्वर की योजना चलती है।
कथन-उद्धरण चिह्नित नहीं किया गया है, क्योंकि यह समन्वयित विवेचनात्मक पुनरावृत्ति है।