Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 19:1 2 शमूएल 19:2 2 शमूएल 19:3 2 शमूएल 19:4 2 शमूएल 19:5 2 शमूएल 19:6 2 शमूएल 19:7 2 शमूएल 19:8 2 शमूएल 19:9 2 शमूएल 19:10 2 शमूएल 19:11 2 शमूएल 19:12 2 शमूएल 19:13 2 शमूएल 19:14 2 शमूएल 19:15 2 शमूएल 19:16 2 शमूएल 19:17 2 शमूएल 19:18 2 शमूएल 19:19 2 शमूएल 19:20 2 शमूएल 19:21 2 शमूएल 19:22 2 शमूएल 19:23 2 शमूएल 19:24 2 शमूएल 19:25 2 शमूएल 19:26 2 शमूएल 19:27 2 शमूएल 19:28 2 शमूएल 19:29 2 शमूएल 19:30 2 शमूएल 19:31 2 शमूएल 19:32 2 शमूएल 19:33 2 शमूएल 19:34 2 शमूएल 19:35 2 शमूएल 19:36 2 शमूएल 19:37 2 शमूएल 19:38 2 शमूएल 19:39 2 शमूएल 19:40 2 शमूएल 19:41 2 शमूएल 19:42 2 शमूएल 19:43



2 शमूएल 19:12 — सार अर्थ
यह पद यहूदा भाइयों की आवाज है जो राजा के साथ पुनः मेल-जोल के लिए प्रयत्न कर रहे हैं। शब्दार्थ में सन्निहित है कि जो लोग मंत्री, भाई-बंधु हैं, वे भी राजा के प्रति निष्ठा दिखाते हुए उसे सम्मानित करने और उसके निर्णयों का पालन करने का संकल्प लें। इसका मूल संदेश है—परिवार और समुदाय के बीच का नाता बलवान हो, क्योंकि एकता में ही नेतृत्व की विविध कठिनाइयों पर विजय पाई जा सकती है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
दशक-भर पहले राजा डॉद के तम्बू के भीतर अलविदा कारण बनकर चले गए थे; अब इश्राइल के जन और यहूदाई निवासियों में एकता के लिए पुनः एक मंच पर आए हैं। ये शब्द राजा के साथ सहयोग और पुनर्संयोजन की माँग के रूप में प्रयुक्त होते हैं, ताकि राजकाज में विश्वास भय या मतभेद से बाधित न हो।
व्याख्यात्मक बिंदु
कथन-विश्लेषण – पारंपरिक टिप्पणी से संयोजन
हिन IRV अनुवाद के संदर्भ में, यहाँ भाइयों की निष्ठा और राजा के प्रति एकता का आग्रह स्पष्ट है। Matthew Henry की दृष्टि में यह दर्शाता है कि परिवार के सदस्य और समुदाय एक साथ मिलकर नेतृत्व के निर्णयों का सम्मान करते हैं; Barnes और Clarke के विवेचनों में भी यह प्रेरणा मिलती है कि एकता से ही बुराइयों पर विजय पाई जा सकती है और व्यक्तियों के बीच विश्वास बढ़ता है।
प्रसंगगत दृष्टिकोण से यह वाक्य यह दिखाता है कि शाही-कौम के बीच टूट-फूट कब और कैसे बढ़ सकती है; किन्तु बहादुरी, प्रेम और निष्कपट प्रयत्न से पुनः सम्मिलन संभव है।
संयुक्त विचार
इस पद का मुख्य पाठ यह है कि परिवार और समुदाय के बीच एकता, निष्ठा और सम्मान से नेतृत्व के साथ सहयोग बढ़ना चाहिए। सभी devem अपने भाई-बंधुओं को राजा के साथ पुनः मिलाने के उद्देश्य में सहभागी बनें।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में)
1) विषयगत समानता वाले पद: विश्वास-प्रणालियों में एकता की आवश्यकता बताने वाले अन्य संदर्भ—जहाँ नेता और समुदाय के बीच स्पष्ट संबंध बनता है।
2) बंधुत्व की डोर: परिवार-परिवार के बीच एकता से नेतृत्व की भूमिका मजबूत होती है; इसे मिल-जुल कर बनाए रखना चाहिए।
3) समर्पण की विवेक-लग्नता: प्रेम और सम्मान से नेतृत्व को सहयोग देना, व्यावहारिक परिणामों को बेहतर बनाता है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
लोक-जीवन में जब भी नेतृत्व पर मतभेद उभरते हों, तब सबसे पहले रिश्तों की शक्ति को याद रखें। भाइयों-बहनों के साथ विश्वासपूर्ण संवाद और एकजुटता से ही सामूहिक निर्णय स्थिरता पाते हैं।
नोट: नीचे के उद्धरण सार्वजनिक-डायरे में उपलब्ध Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विचारों से संक्षेपित बिंदु हैं; यदि किसी उद्धरण का सटीक शब्द-रूप है, तो वही चयनित है:
संकेतित उद्धरणों में स्पष्ट शब्द-रेखाएं उपलब्ध होने पर उनके पूर्ण टेक्स्ट उद्धरण नहीं दे रहे हैं, ताकि पाठ की विशुद्धता बनी रहे।