2 शमूएल 19:34 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

बर्जिल्लै ने राजा से कहा, “मुझे कितने दिन जीवित रहना है, कि मैं राजा के संग यरूशलेम को जाऊँ?

पिछला पद
« 2 शमूएल 19:33
अगला पद
2 शमूएल 19:35 »

2 शमूएल 19:34 पद-दर-पद बाइबल टीका

2 शमूएल 19:34 — तत्काल परिप्रेक्ष्य और पाठ का सार

अध्याय 19 का दृश्य इस समय की कठिनाई और दोहरी अस्थिरता को दर्शाता है जब राजा डेविद ने युध्द-बाद राज्य के पुनर्गठन की कोशिश की। बर्जिल्लै का यह प्रश्न राजा से यह संकेत देता है कि कैसे व्यक्तिगत सुरक्षा और राजसी दायित्व एक साथ टकराते हैं। यहीं से कथा हमारे लिए एक नैतिक मनोयोग और विश्वास-परिप्रेरणा देती है:

पाठ का तुरंत का संदर्भ

पंक्ति में बर्जिल्लै राजा से पूछते हैं कि वे कितने दिन जीवित रहना चाहते हैं ताकि मैं राजा के साथ यरूशलेम आ सकूँ। यह एक शासक की सुरक्षा और उसकी यात्राओं की तैयारी से जुड़ा प्रश्न है जिसे तत्कालीन राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों की पृष्ठभूमि में समझना पड़ता है।

पाठ से ईश्वर और विश्वास के बारे में जो खुलता है

यह वाक्य सीधे तौर पर ईश्वर के साथ हमारे संबंधों में सुरक्षा, प्रशासनिक उत्तरदायित्व और प्रेरित निर्णयों के बीच संतुलन की धुरी को सामने लाता है। राजा के लिए शारीरिक सुरक्षा एक नहीं, बल्कि विश्वस्त और विश्वसनीयात की आवश्यकता है; विश्वास इसे केवल अपने त्वरित सुरक्षा के बजाय ईश्वर की योजना के अनुरूप देखने की प्रेरणा देता है।

महत्वपूर्ण शब्दों और छवियों की स्पष्टता

“मुझे कितने दिन जीवित रहना है…?” यह प्रश्न निर्भरता और समय की नाजुकता को दर्शाता है—जीवन के क्षण-क्षण कितने मूल्यवान हैं। “यरूशलेम” एक आध्यात्मिक और राजनीतिक राजधानी के रूपक के रूप में सामने आता है, जहाँ राजा का परमेश्वर-आस्थित शासन, उसकी यात्रा और सभ्यता के कार्यक्रम जुड़ते हैं।

संबंधित आयतें और उनके संक्षिप्त विचार

- पवित्र ग्रंथ में ऐसे क्षण मिलते हैं जब नेता अपनी सुरक्षा के लिए मानवीय मार्गों के बजाय परमेश्वर की योजना के साथ सामंजस्य बनाते हैं।

- प्रेरक दृष्‍टांतों में यह विचार है कि विश्वसनीय मार्गदर्शक वही हैं जो परमेश्वर के मार्ग में चलते हैं, भले ही रास्ते कठिन हों।

आज के संदर्भ में आवेदन

  • मेहनत और सुरक्षा के बीच संतुलन: जीवन की चुनौतियाँ अक्सर राजा-उचित निर्णयों जैसी होती हैं; विश्वास के साथ योजना बनाना चाहिए।
  • यात्रा से पहले प्रार्थना: प्रत्येक कदम से पहले परमेश्वर की योजना माँगना आवश्यक है।

Cross-references और उनके संकेत

1) यिर्मयाह 29:11 – परमेश्वर के विचारों के बारे में आशा और योजना की तख्ती। स्पष्टीकरण: जीवन के मार्ग में ईश्वर की योजनाओं के प्रति विश्वास बनाए रखना चाहिए।

2) भज 31:14 – तूँ मेरा भाग everlasting है; मेरी दृष्टि तेरे पर है। यह पुष्टि करता है कि कठिन समय में भी ईश्वर की सुरक्षा सबसे ऊँची है।

3) मत्ती 6:33 – पहले परमेश्वर का राज और उसकी-rightousness, फिर सब कुछ। यह पाठ हमें बताता है कि सुरक्षा और सफलता ईश्वर के राज्य के संदर्भ में देखी जाएँगी।

एतिहासिक-टिप्पणी (सार) — 2-3 पंक्तियाँ

यहाँ एंथोलॉजीस्टिक टोन यह बताता है कि राजा के समय में सुरक्षा-नीति और सत्यनिष्ठा का मिश्रण हुआ करता था।

नोट: नीचे उद्धृत कुछ उद्धरण सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों से हैं, यदि उपलब्ध हों।

उद्धरण उल्लेख:

Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के समानांतर विचारों के क्षणों के कारण संकलित हैं; यदि कोई ठोस वाक्यांश मिलते हैं, वे यहाँ संक्षेप में दे दिए जाते हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 शमूएल 19:34 समानांतर पद और संबंधित वचन

उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

उत्पत्ति 47:8 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
उत्पत्ति 47:8 (HINIRV) »
तब फ़िरौन ने याकूब से पूछा, “तेरी आयु कितने दिन की हुई है?”

अय्यूब 14:14 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
अय्यूब 14:14 (HINIRV) »
यदि मनुष्य मर जाए तो क्या वह फिर जीवित होगा? जब तक मेरा छुटकारा न होता तब तक मैं अपनी कठिन सेवा के सारे दिन आशा लगाए रहता।

भजन संहिता 39:5 HINIRV संबंधित बाइबल पद का चित्र
भजन संहिता 39:5 (HINIRV) »
देख, तूने मेरी आयु बालिश्त भर की रखी है, और मेरा जीवनकाल तेरी दृष्टि में कुछ है ही नहीं। सचमुच सब मनुष्य कैसे ही स्थिर क्यों न हों तो भी व्यर्थ ठहरे हैं। (सेला)

HINIRV बाइबल की पुस्तक चुनें