2 शमूएल 19:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

तब सरूयाह के पुत्र अबीशै ने कहा, “शिमी ने जो यहोवा के अभिषिक्त को श्राप दिया था, इस कारण क्या उसका वध करना न चाहिये?”

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2 शमूएल 19:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

शब्दार्थ का प्रत्यक्ष अर्थ

2 शमूएल 19:21 में अबीशै—षुरयाह के पुत्र—पिता के पक्ष में न्याय और प्रभु के अभिषिक्त के प्रति सम्मान से उत्साहित होकर कहता है कि शिमी के द्वारा अभिषिक्त को श्राप दिए जाने के कारण उसकी हत्या ठीक नहीं है, बल्कि उसे दंड मिलना चाहिए। इसका केंद्रीय संदेश है कि धर्मचिन्तन और निष्पक्ष न्याय के अनुसार, प्रभु के चयनित के प्रति अवमानना पर उचित दंड अवश्य हो।

प्रसंग का संदर्भ

योध्या-वापसी के समय दावीद पर विद्रोह का सामना करते हुए, शेम्वेल के शासन के दौरान येरुसलम लौटे दावीद ने शांति और एकता की कोशिश की। इस चरण में अबीशै के कथन से यह स्पष्ट होता है कि युद्ध-पूर्व सौहार्द की रक्षा और अभिषिक्त की महिमा बनाए रखना लोगो के परिप्रेक्ष्य में कितना महत्त्वपूर्ण था।

interpretive observations

  • अबिशै का यह कथन कटु, परन्तु नैतिक रूप से उचित है: अभिषिक्त के प्रति सम्मान बनाए रखना।
  • यह संवाद यह दर्शाता है कि नीतिगत निर्णयों में संतुलन कैसे बना रहता है—न्याय और करुणा दोनों की मांग।
  • शब्द “श्राप” से संकेत मिलता है कि परमेश्वर के चुने हुए के लिए कड़ी प्रतिक्रिया संभव है यदि उस पर अत्याचार हो।

थीम: न्याय, सम्मान, और प्रभु के चयनित के प्रति आस्था

जीवन-वचनावली (Cross-references)

  • व्यवस्थित दया और न्याय के संदर्भ में: पद 2 शमूएल 16:10 — अभिषिक्त के विरुद्ध अपमान सीधे परमेश्वर के निर्णय पर चोट है।
  • धर्म-आचरण का महत्त्व: भजं 105:15 — “न तो मेरे अभिषिक्तों को मारो” के सिद्धांत के अनुरूप सम्मान-पूर्वक प्रतिक्रिया।
  • राज्य-योजना में परमेश्वर की सत्ता: दाऊद के भाग-यात्रा में आस्था का किरदार।

विशेष उद्धरण योग्य पंक्तियाँ

यदि उपलब्ध हों, Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के शाब्दिक कथन छोटे उद्धरण के रूप में प्रयुक्त हो सकते हैं। यहाँ मैंने सीधे पाठ से उद्धरण नहीं जोड़े हैं, ताकि मौलिक हिंदी प्रवाह बना रहे।

निष्कर्ष/Practical takeaway

यह पद हमें सिखाता है कि राजा और परमेश्वर के अभिषिक्त के प्रति सम्मान और सुरक्षा आवश्यक है, भले ही राजनीतिज्ञों के बीच तनाव क्यों न हो। गलत आचरण पर न्याय की अपेक्षा बनती है, परन्तु हर कदम में कृपा और सत्य की खोज बनी रहनी चाहिए। यह कथा एक आंतरिक धैर्य और नैतिक साहस की माँग करती है—अपने नेताओं के प्रति सम्मान बनाए रखें, और परमेश्वर के निर्णयों पर भरोसा रखें।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 शमूएल 19:21 समानांतर पद और संबंधित वचन

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“परमेश्‍वर को श्राप न देना, और न अपने लोगों के प्रधान को श्राप देना।

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1 शमूएल 26:9 (HINIRV) »
दाऊद ने अबीशै से कहा, “उसे नष्ट न कर; क्योंकि यहोवा के अभिषिक्त पर हाथ चलाकर कौन निर्दोष ठहर सकता है।”

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वह अपने जनों से कहने लगा, “यहोवा न करे कि मैं अपने प्रभु से जो यहोवा का अभिषिक्त है ऐसा काम करूँ, कि उस पर हाथ उठाऊँ, क्योंकि वह यहोवा का अभिषिक्त है।”

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