Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 7:1 2 शमूएल 7:2 2 शमूएल 7:3 2 शमूएल 7:4 2 शमूएल 7:5 2 शमूएल 7:6 2 शमूएल 7:7 2 शमूएल 7:8 2 शमूएल 7:9 2 शमूएल 7:10 2 शमूएल 7:11 2 शमूएल 7:12 2 शमूएल 7:13 2 शमूएल 7:14 2 शमूएल 7:15 2 शमूएल 7:16 2 शमूएल 7:17 2 शमूएल 7:18 2 शमूएल 7:19 2 शमूएल 7:20 2 शमूएल 7:21 2 शमूएल 7:22 2 शमूएल 7:23 2 शमूएल 7:24 2 शमूएल 7:25 2 शमूएल 7:26 2 शमूएल 7:27 2 शमूएल 7:28 2 शमूएल 7:29



सीधे अर्थ का स्पष्टीकरण
2 शमूएल 7:14 का अर्थ है— परमेश्वर अपनी तरफ से राजा डेविड के वंश को पुत्र के समान अपनाएगा, उसे पिता के अधिकार से मार्गदर्शन देगा, और यदि वह पाप करे तो उसे मानव-दंड और उकसाने वाले दंड से ताड़ना देगा। यह परमेश्वर की कुटुम्ब-प्रियता और ನ್ಯಾಯ के संतुलन को दर्शाता है: प्रेम के साथ अनुशासन भी है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यहोवा ने नबू की वाक्य से पहले दाऊद से वायदा किया कि उसका राजसी वंश स्थिर रहेगा। 7वाँ अध्याय उस वैध राजसी अंतर्निहित आश्वासन का बुनियादी भाग है, जिसमें नबी नबी-याह के द्वारा दाऊद के घर के लिए विस्तृत नीति बताता है। यह दाऊद के घर के लिए एक पिता-समान संरक्षकता का विचार प्रस्तुत करता है—राष्ट्र के स्वामी के रूप में परमेश्वर उनके लिए एक पवित्र शाश्वत अनुबंध बनता है।
व्याख्या के मुख्य बिंदु
धार्मिक भाव-सम्बद्धता (Themes)
अन्य प्रासंगिक बाइबिल पाठ (Cross-references)
1) 2 कुरिन्थियों 6:18 — परमेश्वर पिता के रूप में आर्शीवादों की स्वीकृति और नाते-रिश्ता। यह दिखाता है कि नया विधान में परमेश्वर की “पिता” की भूमिका एक जीवित सम्बद्धता है।
2) इब्रानियों 1:5 और 12:7 — पुत्र-प्रधान संबोधन और पिता के प्रेम-नियम का स्थापना। यह बताता है कि परमेश्वर अपने पुत्र को अधिकार देता है और अनुशासन को आवश्यकता मानता है।
3) एक साथ विचार: यीशु मसीह के आराधन-रचना में परमेश्वर के पुत्र-रूप की भूमिका भी स्पष्ट होती है—सृष्टि के पालनहार और उद्धारकर्ता के रूप में।
सूक्ष्म टिप्पणियाँ (संदर्भ-नोट्स)
मैकडाल, हैनरी, बार्न्स और क्लार्क (सार्वजनिक-डोमिन):
मैथ्यू हेनरी: “पिता और पुत्र का संबंध परमेश्वर के अद्वितीय प्रशासन का प्रतीक है; जहां पिता के निर्णय प्रेम और सत्ता दोनों से बंधे होते हैं।” (उद्धरण के सारांश का संदर्भ)
एल्बर्ट बार्न्स: “हम देखते हैं कि दाऊद के घर के भीतर आत्म-नियंत्रण और दायित्व कितने महत्व के होते हैं; दंड-प्रभाव एक सुधर की प्रक्रिया है।”
एडम क्लार्क: “कठोर दंड भी परमेश्वर के अनुसार है, परन्तु यह सदैव सुधार और नैतिकता के लिए होता है।”
संक्षिप्त निष्कर्ष और व्यवहारिक शिक्षा
यह पद हमें यह दिखाता है कि परमेश्वर अपने अनुग्रह के साथ आशीर्वाद देता है, परन्तु यदि हमारा जीवन निर्दोषता से विचलित हो, तो प्रभु की अनुशासनात्मक दृष्टि उसे सुधारेगी। हमारे दैनिक जीवन में भी यह विचार अहम है: प्रभु के धर्म-नियम हमें मार्गदर्शित करते हैं; प्रेम के साथ कठोरता भी साथ रहती है ताकि हम पाप से दूर रहें और उनके उद्देश्य के अनुसार विकसित हों।