2 शमूएल 7:25 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

अब हे यहोवा परमेश्‍वर, तूने जो वचन अपने दास के और उसके घराने के विषय दिया है, उसे सदा के लिये स्थिर कर, और अपने कहने के अनुसार ही कर;

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2 शमूएल 7:25 पद-दर-पद बाइबल टीका

2 शमूएल 7:25 का संदर्भ और प्रमुख अर्थ

सार में यह पद यहोवा के वचन की प्रतिष्ठा और दास डेविड के घर के प्रति परमेश्वर की वाचाओं के स्थायित्व की पुष्टि है। दाऊद ने परमेश्वर से अपने दानवहीन परिवार के लिए एक स्थिर, विश्वसनीय यथार्थ की मांग की, ताकि जिसके अनुसार परमेश्वर ने अपने वचनों को किया है, वही कदम आगे बढ़े। यह वचन पुराने साम्राज्य के अंतर्गत भगवान के अनुयायों के जीवन-व्यस्त अनुबंध की गवाही देता है: परमेश्वर अपने दास और उसके घर के बारे में जो भी कहा है, वह अवश्य पूरा होगा।

केन्द्रिय अर्थ

यह वचन दाऊद के अनुरोध की संजीदगी को दर्शाता है: परमपरिशुद्ध वचन के अनुरूप ही परमेश्वर के कथन सदा के लिए स्थिर रहेंगे। इसे हम यहोवा के सम्मान और उसकी करूणा के लिए एक सुनिश्चित आशीर्वचन मानते हैं—कि उन्होंने जो कहा है, वह होगा। दाऊद इस बात को स्वीकार कर रहा है कि ईश्वर की योजना एक स्थिर, समय-अनुसार और परम-स्थायित्व के साथ पूरी होगी, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों।

मुख्य विषय

  • परमेश्वर के वचन अप्रति-परिवर्तित रहते हैं; उनकी प्रतिज्ञाएँ सत्य हैं और समय के आगे भी कायम रहती हैं।
  • दाऊद का घराना परमेश्वर के वादों के केंद्र में है; परमेश्वर उसकी रक्षा और सम्मान के लिए प्रतिज्ञाबद्ध है।
  • परमेश्वर के वचनों की पूर्णता का अर्थ है कि अनुग्रह और कानून, कृपा और न्याय एक साथ चलते हैं।

संबद्ध पद

यह भाग संकेत करता है कि परमेश्वर अपने चुने हुए लोगों के प्रति वचन-निष्ठ है, जैसे कि 2 शमूएल 7 का समीपस्थ संदर्भ—दाऊद के चरणों में प्रतिज्ञाओं की पुष्टिः

• अन्य: इब्रानी प्रेरकता में भगवान के वचनों की स्थिरता के लिए पूर्व-वचन—मनुष्यों की योजना बनते समय भी परमेश्वर की योजना सर्वोपरि रहती है।

व्यावहारिक विचार

हमारे लिए यह वक्तव्य उत्साह और आशा देता है कि चाहे परिस्थिति कितनी भी अचानक बदले, परमेश्वर के वचन की भरोसेमंदता स्थिर है। जीवन के उत्तर-आधार पर: अगर हम अपने जीवन-घराने में ईश्वर के वचनों को केंद्र में रखें, तो वे आशीष-रूपी स्थिरता लाते हैं। इस वचन को अपने दिनचर्या में उतारें—प्रार्थना, वचन-पढ़ना, और नैतिक दायित्वों में ईमानदारी—ताकि आपके परिवार और समुदाय में परमेश्वर की प्रतिज्ञा प्रतिबिंबित हो।

क्रॉस-रेफरेंसेस

  • Retrieval: पूराने नियम में परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं की स्थिरता बताने वाले अवसर: यह समान ध्वनि देता है कि ईश्वर के वचन अंततः पूरा होते हैं। (उद्धरण संक्षेप में: “वचन स्थिर रहता है” प्रकार के विचार)
  • आपसी सुरक्षा: परमेश्वर की शाश्वत योजनाओं के अनुरूप हमारे विश्वास की चाबी—वचन और आस्था का संयोजन।
  • दया और वचनों की पूर्णता: कृपा—न्याय—कर्म एक साथ चलते हैं, और वचन-विश्वास से ही जीवन की दिशा मिलती है।

संक्षिप्त निष्कर्ष

2 शमूएल 7:25 में दाऊद का प्रार्थनात्मक बयान यह जताता है कि परमेश्वर ने दास के घराने के लिए जो वचन दिया है, वह निर्गुण स्थिर रहेगा। यह वचन-विश्वास आज भी हमारी यात्रा में प्रेरणा बनता है: परमेश्वर के वचन कभी नहीं टूटते; हमारे विश्वास और व्यवहार को उन के अनुग्रहीत मार्ग पर आधृत होना चाहिए।

कुल मिलाकर यह वचन यह स्पष्ट करता है कि ईश्वर की प्रतिज्ञा और उसकी योजना समय-अनुकूल और अटूट है। हमारे लिये आवश्यक है कि हम भी अपने जीवन में वही विश्वास रखें और अपने घरों में उनके वचनों को प्राथम्य दें।

संदर्भित टिप्पणियाँ: यह विचार Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणी-ऊर्जनाओं से प्रेरित समन्वय से संकलित हैं, उनके संक्षेप कथनों को सामान्यीकृत किया गया है।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

2 शमूएल 7:25 समानांतर पद और संबंधित वचन

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