Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
2 शमूएल 7:1 2 शमूएल 7:2 2 शमूएल 7:3 2 शमूएल 7:4 2 शमूएल 7:5 2 शमूएल 7:6 2 शमूएल 7:7 2 शमूएल 7:8 2 शमूएल 7:9 2 शमूएल 7:10 2 शमूएल 7:11 2 शमूएल 7:12 2 शमूएल 7:13 2 शमूएल 7:14 2 शमूएल 7:15 2 शमूएल 7:16 2 शमूएल 7:17 2 शमूएल 7:18 2 शमूएल 7:19 2 शमूएल 7:20 2 शमूएल 7:21 2 शमूएल 7:22 2 शमूएल 7:23 2 शमूएल 7:24 2 शमूएल 7:25 2 शमूएल 7:26 2 शमूएल 7:27 2 शमूएल 7:28 2 शमूएल 7:29



मुख्य व्याख्या बिंदु
2 शमूएल 7:28 में दाऊद का परमेश्वर के प्रति सुविचारित विश्वास उद्घाटित होता है: प्रभु यहोवा ही परमेश्वर हैं, उनके शब्द सत्य हैं, और उन्होंने दास के प्रति भक्तिपूर्ण भलाई का वचन दिया है। यह पद यह दर्शाता है कि दाऊद ने ईश्वर की वाणी पर पूरा भरोसा किया, न कि मनुष्यों की परिस्थितियों पर, और ईश्वर ने अपने वचन को निभाने की प्रतिज्ञा से उसे आश्वस्त किया।
साहित्यिक संदर्भ
यह कविता-भाव 2 शमूएल के अंतर्गत दाऊद के प्रार्थना-स्वर का भाग है, जहाँ वह परमेश्वर के प्रति गहन विनम्रता और विश्वास व्यक्त करता है। दाऊद की यह अनुभूति एक ऐतिहासिक समय के बादJehovah के वचन-आधारित संरक्षण और वंशानुक्रम के प्रति उसकी आशा को समेटती है।
धर्मशास्त्रीय महत्त्व
- परमेश्वर का वचन सत्य है: ईश्वर के वचन अचल, परिवर्तनरहित और निष्कर्ष-युक्त होते हैं। दाऊद इसे व्यक्तिगत रूप से स्वीकार करता है।
- दास Nice के प्रति वरदान-स्वर: परमेश्वर ने दाऊद के लिए भलाई का वचन दिया है, जो उसकी गरिमा और राजसी योजना के साथ जुड़ा है। यह वचना बताता है कि परमेश्वर की कृपा और वचन एक-दूसरे का समर्थन करते हैं।
क्रॉस-रेफरेंस और उनका संक्षिप्त अर्थ
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि परमेश्वर का वचन विश्वस्त है और उसकी योजना समय के अनुसार पूरी होती है।
विचार के प्रश्न (Reflection)
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पद दाऊद के भाव-भरे आत्म-समर्पण का केंद्र है: प्रभु तू ही परमेश्वर है, तेरे वचन सत्य हैं और तूने दास के लिए भलाई करने का वचन दिया है। इसका प्रेरक संदेश है—आत्म-विश्वास बनाकर हम परमेश्वर के सत्य के किनारे टिके रहें, क्योंकि उसकी योजना और उसका वचन हमारे जीवन की दिशा तय करते हैं।
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पूर्व-समाहित उद्धरण (Public-domain स्रोतों से)
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