Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 20:1 प्रेरितों के काम 20:2 प्रेरितों के काम 20:3 प्रेरितों के काम 20:4 प्रेरितों के काम 20:5 प्रेरितों के काम 20:6 प्रेरितों के काम 20:7 प्रेरितों के काम 20:8 प्रेरितों के काम 20:9 प्रेरितों के काम 20:10 प्रेरितों के काम 20:11 प्रेरितों के काम 20:12 प्रेरितों के काम 20:13 प्रेरितों के काम 20:14 प्रेरितों के काम 20:15 प्रेरितों के काम 20:16 प्रेरितों के काम 20:17 प्रेरितों के काम 20:18 प्रेरितों के काम 20:19 प्रेरितों के काम 20:20 प्रेरितों के काम 20:21 प्रेरितों के काम 20:22 प्रेरितों के काम 20:23 प्रेरितों के काम 20:24 प्रेरितों के काम 20:25 प्रेरितों के काम 20:26 प्रेरितों के काम 20:27 प्रेरितों के काम 20:28 प्रेरितों के काम 20:29 प्रेरितों के काम 20:30 प्रेरितों के काम 20:31 प्रेरितों के काम 20:32 प्रेरितों के काम 20:33 प्रेरितों के काम 20:34 प्रेरितों के काम 20:35 प्रेरितों के काम 20:36 प्रेरितों के काम 20:37 प्रेरितों के काम 20:38


प्रेरितों के काम 20:15 के Immediate Setting और संदर्भ
यह पद प्रेरित पवित्रों के जीवन के मार्ग में एक चरण का वर्णन है, जहाँ पौलुस और उनके साथियों ने समुद्री मार्ग से यात्रा जारी रखी। वे जहाज से निकलकर खियुस के सामने पहुँचे, फिर सभवतः अगले दिन सामूस पहुँचे और इसके बाद मीलेतुस के लिए प्रस्थान किया गया। यह दूरी और नाविक मार्ग उनकी मिसाल प्रस्तुत करती है कि धर्मयात्रा में धैर्य, संगठन और समयबद्ध कदम कितने महत्त्वपूर्ण होते हैं।
ईश्वर और विश्वास से जुड़ी समझ
इस वाक्य से स्पष्ट होता है कि ईश्वर के निर्देश के अनुसार यात्रा क्रमबद्ध रूप से होती है। मार्ग में बाधाओं के बावजूद विश्वासियों का ध्येय ईश्वर की योजना के अनुसार चलता है। यह दुर्घटनाओं से परे, प्रभु की योजना के अनुसार चरणबद्ध advancement को दर्शाता है—यानी विश्वास के साथ चलना और समयानुसार परिवर्तन स्वीकारना।
महत्वपूर्ण शब्दों और छवियों की स्पष्ट व्याख्या
संबद्ध उद्धरण और समान विचारशील विश्लेषण
हमारे पवित्र लेखन के समकक्ष संदर्भों में यह दर्शाता है कि यात्रा के हर चरण में ईश्वर की सुरक्षा और प्रेरितों की दृढ़ता बनी रहती है।Matthew Henry, Albert Barnes, और Adam Clarke के टिप्पणियों में ऐसे क्षणों को धार्मिक बुलाहट के क्रम के रूप में समझाया गया है—जहाँ आकाशीय मार्गदर्शक का अनुसरण और समुदायिक सहयोग एक साथ रहते हैं।
सार-सार: यह पाठ हमें सिखाता है कि विश्वास के साथ यात्रा करते समय छोटे-छोटे कदम भी विकास का हिस्सा होते हैं, और हर कदम में प्रभु के मार्गदर्शन को भरोसे के साथ स्वीकारना चाहिए।
पहचानने योग्य cross-references और उनका संक्षेप उपयोग
आज-के-दिन की उपयोगिता
आज के जीवन में हम भी अपनी योजनाओं को ईश्वर की योजना के साथ संतुलित करें। कठिन परिस्थितियों में धैर्य रखें, धीमे पर steady कदम उठाते रहें, और समुदाय के साथ मिलकर कार्य करें। हर छोटे चरण में प्रभु की उपस्थिति महसूस करें, ताकि विश्वास गहराए और कार्य वास्तविक समुदाय तक पहुँचे।
सूचियाँ और समापन
मुख्य बिंदु: यात्रा का क्रम, विश्वास की आस्था, समुदाय का योगदान, और ईश्वर की योजना के अनुसार परिवर्तन।