Old Testament
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प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 20:1 प्रेरितों के काम 20:2 प्रेरितों के काम 20:3 प्रेरितों के काम 20:4 प्रेरितों के काम 20:5 प्रेरितों के काम 20:6 प्रेरितों के काम 20:7 प्रेरितों के काम 20:8 प्रेरितों के काम 20:9 प्रेरितों के काम 20:10 प्रेरितों के काम 20:11 प्रेरितों के काम 20:12 प्रेरितों के काम 20:13 प्रेरितों के काम 20:14 प्रेरितों के काम 20:15 प्रेरितों के काम 20:16 प्रेरितों के काम 20:17 प्रेरितों के काम 20:18 प्रेरितों के काम 20:19 प्रेरितों के काम 20:20 प्रेरितों के काम 20:21 प्रेरितों के काम 20:22 प्रेरितों के काम 20:23 प्रेरितों के काम 20:24 प्रेरितों के काम 20:25 प्रेरितों के काम 20:26 प्रेरितों के काम 20:27 प्रेरितों के काम 20:28 प्रेरितों के काम 20:29 प्रेरितों के काम 20:30 प्रेरितों के काम 20:31 प्रेरितों के काम 20:32 प्रेरितों के काम 20:33 प्रेरितों के काम 20:34 प्रेरितों के काम 20:35 प्रेरितों के काम 20:36 प्रेरितों के काम 20:37 प्रेरितों के काम 20:38



प्रेरितों के काम 20:12 का बाइबल-विचार
この पाद में सूखापन या अथक संघर्ष के बावजूद ईश्वरीय कृपा कैसे चमत्कार दिखाती है, इसका छोटा-सा नमूना मिलता है। पवित्र प्रेरित पौलुस की यात्रा के दौरान एक युवक, जो गम्भीर रूप से निर्जीव सा पड़ा था, उसे जीवित लाकर समुदाय के बीच शांति बनी। यह घटना दिव्य सुरक्षा, वेदना में भी आश्वासन और मंत्रालय की शक्ति का संकेत है।
मुख्य अर्थ
इस verses में याजकों-प्रशंसकों के बीच एक युवक को जीवित रखा गया, और पूरा अवसर शांति तथा विश्वास के व्यवहार में बदला गया। यह दिखाता है कि मर्यादा से भरे पुजारी-समुदाय के बीच भी जोखिम और दुख आते हैं, पर परमेश्वर के उद्धार के प्रचार से वह स्थिति भी सकारात्मक परिणाम दे सकती है।
दो-तीन प्रमुख विषय
संदर्भित बिंदु और उनके संबंध
1) प्रेरितों के काम 20:9-12 — पौलुस की शिक्षा और युवकों के जीवन से निकट संबंध दिखाते हैं कि शब्द और उपस्थिति, दोनों से जीवन में परिवर्तन आ सकता है।
2) प्रेरितों के काम 16:25-34 — व्यवस्थापिका-सेवा के भीतर प्रभु का उद्धार व्यक्त होता है; संगति के कारण शांति और विश्वास बढ़ता है।
3) प्रार्थना और विश्वास के साथ उद्धार — न देखने पर भी परमेश्वर का करुणा-सूर्य चमकता है, जिससे जीवन-निर्वाण संभव होता है।
अंतर्निहित टिप्पणियाँ (प्रशंसित पुरानी टीकाओं से संक्षेप)
मैथ्यू हेनरी के अनुसार, इस प्रकार की घटनाएं स्पष्ट रूप से दिखाती हैं कि परमेश्वर की शक्ति सांसारिक संकट में भी अपने समुदाय के बीच प्रकट होती है, ताकि विश्वास मजबूत हो और प्रभु की सेवा आगे बढ़े।
एलबर्ट बार्न्स बताते हैं कि ऐसे चमत्कार, यदि समझने योग्य न भी हों, उद्धार के एक सत्य-साक्ष्य हैं जो जीवित विश्वास को पुष्ट करते हैं।
एडम क्लार्क का तर्क है कि यह घटना उद्धार के प्रचार के लिए एक प्रत्यक्ष संकेत है कि परमेश्वर की कृपा भय-आस्था को भी बिना क्षण के उठा सकती है।
व्यावहारिक चिंतन
जब हम संकट के बीच हों, तो यह कथा स्मरण कराती है कि ईश्वर के पास जीवन-उद्धार की शक्ति है। भय या निराशा के समय प्रार्थना और समुदाय की सहायता से हम भी क्रूर परिस्थितियों को शांतिपूर्ण ढंग से पार कर सकते हैं। जीवन-उद्धार के लिए विश्वास और विश्वस्त सहयोग आवश्यक है।
संक्षिप्त समापन
20:12 में एक युवक के जीवन के पुनःप्राप्ति से स्पष्ट होता है कि प्रभु की कृपा अकेले में नहीं, बल्कि समुदाय के बीच उभरकर शांति और नई प्रेरणा बनाती है। यह घटना भविष्य के प्रयासों के लिए एक मजबूत संकेत है कि विश्वास के साथ चलना ही उद्धार का मार्ग है।