Old Testament
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प्रेरितों के काम 1 प्रेरितों के काम 2 प्रेरितों के काम 3 प्रेरितों के काम 4 प्रेरितों के काम 5 प्रेरितों के काम 6 प्रेरितों के काम 7 प्रेरितों के काम 8 प्रेरितों के काम 9 प्रेरितों के काम 10 प्रेरितों के काम 11 प्रेरितों के काम 12 प्रेरितों के काम 13 प्रेरितों के काम 14 प्रेरितों के काम 15 प्रेरितों के काम 16 प्रेरितों के काम 17 प्रेरितों के काम 18 प्रेरितों के काम 19 प्रेरितों के काम 20 प्रेरितों के काम 21 प्रेरितों के काम 22 प्रेरितों के काम 23 प्रेरितों के काम 24 प्रेरितों के काम 25 प्रेरितों के काम 26 प्रेरितों के काम 27 प्रेरितों के काम 28Verse
प्रेरितों के काम 20:1 प्रेरितों के काम 20:2 प्रेरितों के काम 20:3 प्रेरितों के काम 20:4 प्रेरितों के काम 20:5 प्रेरितों के काम 20:6 प्रेरितों के काम 20:7 प्रेरितों के काम 20:8 प्रेरितों के काम 20:9 प्रेरितों के काम 20:10 प्रेरितों के काम 20:11 प्रेरितों के काम 20:12 प्रेरितों के काम 20:13 प्रेरितों के काम 20:14 प्रेरितों के काम 20:15 प्रेरितों के काम 20:16 प्रेरितों के काम 20:17 प्रेरितों के काम 20:18 प्रेरितों के काम 20:19 प्रेरितों के काम 20:20 प्रेरितों के काम 20:21 प्रेरितों के काम 20:22 प्रेरितों के काम 20:23 प्रेरितों के काम 20:24 प्रेरितों के काम 20:25 प्रेरितों के काम 20:26 प्रेरितों के काम 20:27 प्रेरितों के काम 20:28 प्रेरितों के काम 20:29 प्रेरितों के काम 20:30 प्रेरितों के काम 20:31 प्रेरितों के काम 20:32 प्रेरितों के काम 20:33 प्रेरितों के काम 20:34 प्रेरितों के काम 20:35 प्रेरितों के काम 20:36 प्रेरितों के काम 20:37 प्रेरितों के काम 20:38



सीधे अर्थ की घोषणा
प्रेरितों के काम 20:19 में प्रेरित पॉल अपने सेवा-कार्य को दृढ़ संकल्प के साथ प्रस्तुत करते हैं: बड़े दीनता के साथ, अश्रुपूर्ण भाव से, और उन परीक्षा-समयों में जो यहूदियों के षड़यंत्र के कारण उन पर आ पड़ीं, वह प्रभु की सेवा किए चले गए।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पद क्रिस्तियन मिशन के कठिनाईपूर्ण चरणों को दर्शाता है। पॉल असीरियाई-यूरोपियन क्षेत्र में प्रचार कर रहे थे; यहूदी नेताओं की मिलीभगत से उनके विरुद्ध कई बार प्रतिशोध आया। परंतु पॉल की धारणा स्पष्ट है—स्वर्गीय बुलाहट के अनुसार उनकी सेवाकोष अब भी जारी है। उद्धार-कार्य में कठिनाईयाँ आती हैं, पर वह दीनता और आस्था से चलते रहे।
विश्लेषणात्मक बिंदु
तेश्वरोचित संदेश के 2-3 प्रेरक निष्कर्ष
अन्य संबंधी पाठ (cross-references)
- प्रेरितों के काम 20:24: पॉल अपने जीवन की राह को प्रभु के उद्देश्य के अनुरूप समर्पित रहने का दृढ़ संकल्प दोहराते हैं। - 2 कॉरिंथी 6:4-5: कष्टों के बीच दृढ़ सेवा के नमूने दिए गए हैं; धैर्य और संकल्प के साथ आस्था को बनाए रखना महत्त्वपूर्ण है। - फिलिप्पी 1:12-14: कठिन परिस्थितियों में भी मिशन के प्रचार का विहंग दृश्य प्रकट होता है; प्रभु के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कई बार बाधाओं से गुजरना पड़ता है।
संयोजनात्मक निष्कर्ष
यह पाठ हमें सिखाता है कि प्रभु की सेवा में दीनता, समर्थित आस्था, और धैर्यपूर्वक संघर्ष करने की आवश्यकता है। पॉल का जीवन हमें यह दिखाता है कि चुनौतियाँ कम नहीं पड़तीं, पर प्रभु की बुलाहट पर चलते हुए उद्धार-कार्य के प्रति निष्ठा बना रहनी चाहिए। सही दिशा में चलना वही है जो आत्म-स्वीकृति और 사랑 से भरा हो, ताकि दुख और विरोध के बीच भी संदेश स्पष्ट रहे।
सार तत्व-रेखा
- दीनता, आँसू, प्रतिरोध—इन तीनों के बीच सेवा का क्रम।