Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
दानिय्येल 5:1 दानिय्येल 5:2 दानिय्येल 5:3 दानिय्येल 5:4 दानिय्येल 5:5 दानिय्येल 5:6 दानिय्येल 5:7 दानिय्येल 5:8 दानिय्येल 5:9 दानिय्येल 5:10 दानिय्येल 5:11 दानिय्येल 5:12 दानिय्येल 5:13 दानिय्येल 5:14 दानिय्येल 5:15 दानिय्येल 5:16 दानिय्येल 5:17 दानिय्येल 5:18 दानिय्येल 5:19 दानिय्येल 5:20 दानिय्येल 5:21 दानिय्येल 5:22 दानिय्येल 5:23 दानिय्येल 5:24 दानिय्येल 5:25 दानिय्येल 5:26 दानिय्येल 5:27 दानिय्येल 5:28 दानिय्येल 5:29 दानिय्येल 5:30 दानिय्येल 5:31



मुख्य व्याख्या बिंदु
दानिय्येल 5:19 में बेता-चंद्रग्रहण जैसे प्रभाव और परम-स्वामित्व की कहानी दर्शाई गई है—वह राजा जैसा हर चीज़ पर अधिकार रखता था, परन्तु उसकी सत्ता परमेश्वर की इच्छा और लोक-कल्याण के नियमों के अधीन थी। यह पद बताता है कि दानिय्येल के समक्ष शासक का वास्तविक भय तब उभरता है जब कानून और निर्णय के पीछे परमेश्वर की स्थापना की भावना ही न हो।
साहित्यिक संदर्भ
यह-वाक्य इतिहास-काल के एक प्रकाशमान दृश्य को प्रस्तुत करता है: सलवनकी, नाश के पास खड़ी शक्तियों के बीच मानव राज्य की अस्थिरता और परमसत्ता की अनिवार्यता। जहां राजा विभिन्न जातियों और भाषाओं के लोगों के बीच सत्ता-प्रभाव दिखाता है, वहीं देव-ताक़तों के सामने उसकी शक्ति निर्भर है और समय के साथ परिवर्तनशील रहती है।
धार्मिक-संरचना और theological संकेत
वाक्य में विस्तार से दिखता है कि सत्ता के परम-आदेश किस प्रकार बहु-जातियों में भय, सम्मान और आसक्ति के केंद्र बनते हैं। यह दिखाता है कि मानव संस्थाओं की एक छवि कितनी भी विशाल क्यों न हो, परमेश्वर के नियम और उसकी योजना के सामने वे तुच्छ और अस्थिर रहती हैं। इसके साथ यह भी स्पष्ट होता है कि ताकत का सही उपयोग और न्यायप्रिय शासन ईश्वरीय दिशा-निर्देश से गढ़े जाते हैं, न कि केवल अपनी इच्छा से।
मुख्य उद्धरण और उनके बहाव
मतेयाह, ऐल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क की सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणी से चयनित सहज विचार इस प्रकार हैं:
विवाद-विचार: cross-reference विचार
कुछ प्रचलित क्रॉस-रेफरेंस जो विचार के लिए उपयुक्त हैं—
संक्षेपण: इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि सत्ता और नीति-निर्णय परमेश्वर के नियंत्रण में रहते हैं, और मनुष्यों को धैर्य, न्याय और नैतिकता के साथ शासन करना चाहिए।
पाठ से पूछे जाने वाले प्रश्न
छोटी निष्कर्ष रेखा
यह पद बतलाता है कि शक्तिशाली शासन भी परमेश्वर के नियंत्रण से मुक्त नहीं है; सत्ता का वास्तविक रूप उसीमें निहित रहता है जो ईश्वरीय आदेश के अनुरूप न्याय और दयालुता के साथ संचालित हो। मानव-राज्य की ताकत कितनी भी विशाल हो, परम-निर्णय और न्याय के सामने उसका स्थान सीमित है।