Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
दानिय्येल 5:1 दानिय्येल 5:2 दानिय्येल 5:3 दानिय्येल 5:4 दानिय्येल 5:5 दानिय्येल 5:6 दानिय्येल 5:7 दानिय्येल 5:8 दानिय्येल 5:9 दानिय्येल 5:10 दानिय्येल 5:11 दानिय्येल 5:12 दानिय्येल 5:13 दानिय्येल 5:14 दानिय्येल 5:15 दानिय्येल 5:16 दानिय्येल 5:17 दानिय्येल 5:18 दानिय्येल 5:19 दानिय्येल 5:20 दानिय्येल 5:21 दानिय्येल 5:22 दानिय्येल 5:23 दानिय्येल 5:24 दानिय्येल 5:25 दानिय्येल 5:26 दानिय्येल 5:27 दानिय्येल 5:28 दानिय्येल 5:29 दानिय्येल 5:30 दानिय्येल 5:31



दानिय्येल 5:23 पर टिप्पणी—स्वर्गीय प्रभु का सम्मान करना आवश्यक क्यों?
यह पद दानिय्येल 5 में बिब्लाइलोक इतिहास का एक निर्णायक मोड़ दर्शाता है। बेलशज्जर राजा बेलशाज़ार के समय, राजा ने अपनी सत्ता, वैभव और मदिरा-आनंद के जरिए परमेश्वर के विरुद्ध उठता अंहकार प्रदर्शन किया। दानिय्येल 5:23 में यह स्पष्ट किया गया है कि देव-प्रतिमाओं की पूजा या सम्मुख उनका सम्मान करना, प्रभु के हाथ में राजा के जीवन-प्राण और उसके हर चलना-फिरना के नियंत्रण को न मानना है। यह परमेश्वर की सर्वोच्चता पर खुला परीक्षण है: जब मनुष्य अपनी शक्ति और वैभव पर निर्भर रहता है, तब वह विश्वस्त स्रोत को छोड़ देता है और परमेश्वर की सत्ता को अस्वीकार कर देता है।
प्रमुख संदर्भ: मूल संदर्भ और संदेश
यह आयत Nebuchadnezzar के उत्तराधिकारी और मगद का राज्याभिषेक कर चुके राजा बेलशज्जर के समय की कथा से जुड़ी है। राजा ने देवताओं के बजाय अपने भवन के पात्रों, गड़बड़ाबड़ में दाखमधु पिया और मान लिया कि वह सब शक्तिशाली है। परन्तु दिव्य हाथ ने उसकी निष्ठा और चल-फिरने की दिशा पर स्पष्ट चोट की—परमेश्वर के हाथ में मानव जीवन का निरंतर नियंत्रण है।
पद यह संदेश देता है: वास्तविक सम्मान वही है जो परमेश्वर के अधिकार को स्वीकार करे। भले ही लोग मनोरंजन, शक्ति और धन के जाल में फँस जाएँ, परन्तु परमेश्वर के हाथ में उनकी सांस है और उसी के अनुसार उनके कर्मों का फल तय होता है।
मुख्य उद्देश्य और विषय
निरपेक्ष टेक्निकल अंश—आध्यात्मिक गूढ़ता
- परमेश्वर के विरुद्ध उठे अहंकार का परिणाम: विनाश और चेतावनी।
- मानव जीवन की दिशा-निर्देश का स्रोत: परमेश्वर के हाथ में प्राण।
संदर्भ-क्रॉसरेफरेंसेस
— अय्यूब 12:10: व्यक्ति के जीवन-श्वास का स्रोत परमेश्वर के हाथ में है; वही उसकी चाल-फिरफर नियंत्रित करता है।
— भज 115:4-8: मूर्त-पूजा का असत्य और निर्जीव देवताओं की ताकतों का निष्कर्ष स्पष्ट किया गया है।
— दानिय्येल 4:37: परमेश्वर की सत्तात्मक महिमा कबूलना एक राजा के लिए भी अनिवार्य है; प्रत्येक राजएं भी उसी के अधीन हैं।
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि मानवीय शक्तियों के बावजूद परमेश्वर ही सबसे ऊँचा हैं—उनके हाथ में जीवन और भाग्य है।
आध्यात्मिक प्रस्तुति: 2-3 ठोस बिंदु
आत्म-चिंतन (देवotional reflection)
यह अध्याय हमें यह स्मरण दिलाता है कि हमारे दिन-प्रतिदिन के निर्णयों में सबसे कठिन प्रश्न यह है कि मैं अपने प्राण-जीवन के स्रोत को कहाँ रख रहा/रही हूँ—दुनिया की सुविधाओं या परमेश्वर के हाथ में? जब भी अहंकार हावी हो, स्मरण रहे: जो प्रभु के आगे झुक नहीं सकता, उसे वास्तविक संतोष नहीं मिलता। हमें हर गतिविधि में परमेश्वर के सम्मान की पहल करनी चाहिए, ताकि हमारे जीवन में उसकी महिमा प्रकट होती रहे।
कथनात्मक उद्धरण (यदि आवश्यक हो)
एमैथ्यू हैनरी (Matthew Henry) और डेविड क्लार्क के विचार: जब मनुष्य दृढ़ता से अपने आप को ऊपर मानते हैं, तब परमेश्वर उस प्रभुता को चिह्नित करते हैं जो उसका अधिकार है; भविष्य में न्याय के दिन वह सच का भाग स्वीकार कराते हैं।
छोटे उद्धरण (कृतियों के अनुसार):
“जो परमेश्वर के हाथ में नहीं होता, वही स्थिर नहीं रहता।”
हम कैसे इस संदेश को अपनाएँ? हर दिन के निर्णयों में परमेश्वर के हाथ की पुष्टि करें, और ठहराव से पहले यह कहें: परमेश्वर, तेरा ही वश है मेरे जीवन का रास्ता।