Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीVerse
दानिय्येल 5:1 दानिय्येल 5:2 दानिय्येल 5:3 दानिय्येल 5:4 दानिय्येल 5:5 दानिय्येल 5:6 दानिय्येल 5:7 दानिय्येल 5:8 दानिय्येल 5:9 दानिय्येल 5:10 दानिय्येल 5:11 दानिय्येल 5:12 दानिय्येल 5:13 दानिय्येल 5:14 दानिय्येल 5:15 दानिय्येल 5:16 दानिय्येल 5:17 दानिय्येल 5:18 दानिय्येल 5:19 दानिय्येल 5:20 दानिय्येल 5:21 दानिय्येल 5:22 दानिय्येल 5:23 दानिय्येल 5:24 दानिय्येल 5:25 दानिय्येल 5:26 दानिय्येल 5:27 दानिय्येल 5:28 दानिय्येल 5:29 दानिय्येल 5:30 दानिय्येल 5:31


अर्थ का संक्षेप
दानिय्येल 5:29 में बेलशज्जर ने दानिय्येल को दीर्घकालीन सम्मान देकर दिखाया कि फिरौन-राज की सत्ता एक क्षण की चकाचौंध नहीं, बल्कि ईश्वर के हाथों से संचालित होती है। राजा ने बेलगाम आत्म-गर्व के बावजूद दानिय्येल को जो सम्मान दिया, उसका उद्देश्य उसकी सत्ता की द्योतकता और देवमंदिरिक नियंत्रण से परे एक संकेत था कि परमेश्वर ही सभी राज्यों के संचालनकर्ता हैं।
पार्श्वभूमि
फैली हुई शक्तियाँ और दानिय्येल की स्थिति—नीति-संरक्षित बप्तिस्त पन्नों के बीच—बेलशज्जर एक अचानक आए विजयी राजा है, जिसने दानिय्येल की समझदारी और प्रकाश के बिना भी अपने साम्राज्य की सफलता में ईश्वर की इच्छा को मानने की चुनौती दी। यह पद बदली हुई सत्ता के समय का संकेत है, जहाँ दानिय्येल को एक बार फिर राजसी सम्मान दिया गया ताकि लोग यह देखें कि सत्य कैसे सत्ता के शिखर तक पहुंचता है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
अनुवादक वक्तव्य से प्रेरित टिप्पणी (संदर्भात्मक संदर्भ)
मैथ्यू हेनरी, अल्बर्ट बार्न्स एवं एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डोमिनियन टिप्पणियों में से संक्षिप्त उद्धरण अगर उपलब्ध हों, तो वे संदेश-वाक्य को विवेकपूर्ण ढंग से पुष्ट करते हैं. यहाँ उनका सार यह है कि दानिय्येल की स्थिति ईश्वरीय सत्ता के अधीन है, और राजा की ज्यादती भी परमेश्वर के नियंत्रण के भीतर है।
संयुक्त थेमैटिक बिंदु
क्रॉस-रेफरेंस और उनके संक्षिप्त अर्थ
overcome संदर्भ-1: Daniel 4:17 — सत्ता की गति और ईश्वर के दायरे के बीच संतुलन. संदर्भ-2: Daniel 6:28 — दानिय्येल की स्थिरता और परमेश्वर के उद्धार के कारण जीवन भर शासन। संदर्भ-3: Psalm 75:7 — ऊँचे स्थान के भाव का परमेश्वर के हाथ में होना।
संक्षेप में ये संकेत बताते हैं कि मानव प्रशासनिक प्रतिष्ठा चाहे कितनी भी महत्त्वपूर्ण क्यों न लगे, वास्तविक अधिकार और उद्धार परमेश्वर के हाथों में है।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
यदि आप प्रशंसा या सफलता पाते हैं, तो उसे आत्मसंतुष्टि का स्रोत बनायें नहीं; बल्कि यह स्मरण रखें कि परमेश्वर की योजना के भीतर आपकी भूमिका है। कठोर परीक्षणों में भी आस्थाहीन चकाचौंध से बचें और नम्रता से अपने कार्य को ईश्वर के मानदंडों के अनुसार निभाएं।
cross-references with brief notes
- दानिय्येल 4:17: सत्ता के बदलावים परमेश्वर के निर्णय से होते हैं; मनुष्यों की महत्ता उसके समर्पण के साथ मापक हो।
- दानिय्येल 6:28: दानिय्येल की पाठशाला—धैर्य और ईश्वर-भक्ति के कारण शासन मिलता है।
- भजन 75:7: ऊँचा और नीचे—सब कुछ परमेश्वर के हाथ में है; वह ही निर्णय देता है कि कौन ऊँचा उठे।